नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत की रक्षा तैयारियों और चुनौतियों पर चर्चा करते हुए देश के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को तुर्किये और सऊदी अरब के साथ हुए नए रक्षा समझौतों के बाद किसी भी तरह के भ्रम या अहंकार में नहीं रहना चाहिए। यदि पाकिस्तानी हुक्मरान खुद को जरूरत से ज्यादा ताकतवर मानकर भारत के खिलाफ किसी दुस्साहस की हिमाकत करते हैं, तो उन्हें इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
राजधानी के तीन मूर्ति भवन में ‘भारत की सुरक्षा के लिए खतरे और चुनौतियां’ विषय पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान आने वाले समय में भी भारत के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बना रहेगा। वैश्विक स्तर पर तेजी से बदल रहे राजनीतिक और रणनीतिक समीकरणों के बीच देश को अपनी रक्षात्मक चौकियों और सैन्य तैयारियों को हर वक्त चाक-चौबंद रखना होगा।
हाल ही में सात अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस संधि के प्रावधानों के अनुसार, यदि इन तीनों देशों में से किसी पर भी बाहरी हमला होता है, तो इसे संयुक्त रूप से तीनों पर आक्रमण माना जाएगा। इस रणनीतिक समझौते के बाद से इस्लामाबाद में गैर-जरूरी आत्मविश्वास और अकड़ बढ़ने लगी है। इसी संदर्भ में बोलते हुए पूर्व सैन्य प्रमुख ने आगाह किया कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौते अक्सर देशों में शक्ति का मिथ्या बोध पैदा कर देते हैं, जिससे गलत आकलन और गलत फैसले लेने की आशंका बढ़ जाती है और पूरे क्षेत्र की शांति खतरे में पड़ सकती है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने याद दिलाया कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर हमेशा से आक्रामक और स्पष्ट रुख रखता है। ऑपरेशन सिंदूर, सिंधु जल संधि पर रोक जैसे फैसलों के माध्यम से भारत ने अपनी मंशा पहले ही साफ कर दी है। हालांकि देश केवल उम्मीदों के भरोसे नहीं बैठ सकता, बल्कि उसे हर संभावित परिस्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे पूरी तरह तैयार रहना होगा।
पाकिस्तान की पुरानी रणनीतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से छद्म युद्ध और सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल करता आया है। परमाणु हथियारों की मौजूदगी के कारण भले ही प्रत्यक्ष और बड़े युद्ध की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं, लेकिन पाकिस्तान इसी आड़ में आतंकवाद को पोषित करता है। वह सीधे टकराव से बचकर आतंकियों के जरिए परोक्ष वार करने की फिराक में रहता है, जिसमें उसका पूरा ढांचा और वित्तीय सहयोग प्रणाली मुख्य भूमिका निभाती है।
आतंकवाद के इस पूरे तंत्र पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि केवल कुछ खास आतंकी संगठनों को कमजोर करने से सुरक्षा का यह संकट समाप्त नहीं होने वाला है। जब तक कट्टरता की सोच, आतंकवादियों की नई भर्ती, उनकी फंडिंग, ट्रेनिंग और दुष्प्रचार करने वाले संपूर्ण तंत्र को नेस्तनाबूद नहीं किया जाता, तब तक यह खतरा बार-बार सिर उठाता रहेगा। सीमाओं पर बढ़ते तनाव, साइबर अंतरिक्ष और समुद्री मार्गों की बदलती गतिविधियों के बीच भारत हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है और पड़ोसी देश की हरकतों पर पैनी निगाह रखी जा रही है।


















