रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ी कंपनी यूनिटेक लिमिटेड के जरिए अपने सपनों का मकान बुक कराने वाले 15,000 ग्राहकों का इंतजार अब बेहद दर्दनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर देश के कई अन्य महानगरों तक फैले इन प्रोजेक्ट्स में पिछले डेढ़ दशक (15 वर्षों) से अधिक समय से निर्माण रुका हुआ है। हालांकि देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी इस मामले में दिशा-निर्देश जारी किए थे, लेकिन उसके बाद भी हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे। वर्तमान समय में कंपनी के भीतर शीर्ष कार्यकारी अधिकारी की अनुपस्थिति और निर्माण के लिए फंड का भारी टोटा इन बेघर खरीदारों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बना हुआ है।
शीर्ष नेतृत्व का पद खाली होने से अटका काम
इस बिगड़ते गतिरोध को सुलझाने के मकसद से यूनिटेक से पीड़ित ग्राहकों के 5 अलग-अलग वेलफेयर एसोसिएशनों ने केंद्र सरकार और शीर्ष अदालत के समक्ष गुहार लगाई है। इन संगठनों की सबसे पहली मांग यह है कि कंपनी में चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक (CMD) का जो स्थान लगभग 30 दिनों से रिक्त है, उसे तुरंत भरा जाए। उल्लेखनीय है कि यूनिटेक में शीर्ष पद संभाल रहे युधवीर सिंह मलिक की सेवाएं 20 जुलाई, 2026 को खत्म हो चुकी थीं। इसके बाद से ही कंपनी बिना किसी प्रशासनिक प्रमुख के चल रही है। यद्यपि कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा नए CMD के पद के लिए एक उपयुक्त व्यक्ति के नाम की सिफारिश की जा चुकी है, परंतु जब तक इस पर सुप्रीम कोर्ट की अंतिम स्वीकृति की मुहर नहीं लग जाती, तब तक नए प्रमुख का कार्यभार ग्रहण करना संभव नहीं है। इस वक्त कंपनी के कंधों पर 15,000 परिवारों के आवासीय व व्यावसायिक परिसरों के निर्माण की भारी जिम्मेदारी है, जो 15 वर्ष बीत जाने के बाद भी अधर में लटके हैं।
निर्माण पूरा करने के लिए 12,000 करोड़ की दरकार
कंपनी की रुकी हुई तमाम परियोजनाओं को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधनों की भारी कमी सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है। प्रोजेक्ट विशेषज्ञों का आकलन है कि कंपनी के सभी रुके हुए टावरों को पूरा करने में 11,000 करोड़ से 12,000 करोड़ रुपये का विशाल खर्च आएगा। इसके विपरीत ग्राहकों के बकाया की बात करें तो उनसे अधिकतम 3,000 करोड़ रुपये ही मिलने की गुंजाइश है, जिसके कारण फंड का यह भारी अंतर निर्माण के सामने पहाड़ बनकर खड़ा है। इस 9,000 करोड़ रुपये के अंतर को पाटने के लिए खरीदार समूहों ने आग्रह किया है कि अटकी हुई हाउसिंग स्कीम्स को दोबारा चालू करने और निर्माण गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए यूनिटेक की गैर-इस्तेमाल वाली जमीनों और परिसंपत्तियों की नीलामी करके आवश्यक पूंजी जुटाई जानी चाहिए।
विभिन्न शहरों के खरीदार संगठनों की प्रमुख मांगें
यूनिटेक के अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के घर खरीदारों ने अपनी समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार और अदालत के सामने कई ठोस मांगें रखी हैं
- गुरुग्राम (एस्पेस प्रीमियर ओनर्स एसोसिएशन): गुरुग्राम की एस्पेस प्रीमियर ओनर्स एसोसिएशन की अध्यक्षा विभा बत्रा के अनुसार, उनकी संस्था के सदस्य बीते 16 वर्षों से लगातार अपने मकानों के आबंटन की राह देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिन फ्लेट्स का सौदा वर्ष 2010-11 के दौरान किया गया था, उनकी पज़ेशन मिलने की समयसीमा वर्ष 2013-14 तय थी, लेकिन इतने सालों बाद भी वहां सिर्फ अधूरे कंक्रीट के ढांचे खड़े हैं।
- चेन्नई (यूनिवर्ल्ड चेन्नई ओनर्स एसोसिएशन): चेन्नई एसोसिएशन ने उच्चतम न्यायालय से निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
- एल्डर ग्रोव विला ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन: इस संगठन ने वित्तीय संस्थानों के दावों की पुनर्जांच करने तथा उन पर किसी प्रकार का ब्याज न देने का तर्क रखा है।
- एंथिया फ्लोर्स खरीदार संघ: संघ ने बैंकिंग क्षेत्र के नियामक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से आग्रह किया है कि वर्ष 2005 के पश्चात यूनिटेक को जारी किए गए सभी बैंक ऋणों का एक विशेष फॉरेंसिक ऑडिट करवाया जाए। इस ऑडिट के जरिए कर्ज स्वीकृत करने व उसकी निगरानी प्रक्रिया में हुई अनियमिताओं की जवाबदेही तय कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाने की मांग की गई है।
कोलकाता संघ का रुख और कंपनी के वित्तीय आंकड़े
उधर, पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में सक्रिय यूनिवर्ल्ड सोशल एंड कल्चरल वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष मनीष गांधी ने स्पष्ट कहा कि किसी भी कानूनी समाधान में सबसे पहला अधिकार उन खरीदारों का होना चाहिए जिन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई इसमें लगाई है। उन्हें विश्वास है कि शीर्ष अदालत जल्द ही सभी प्रशासनिक रुकावटों को खत्म करते हुए नए CMD के नाम को हरी झंडी देगी और वैधानिक नियमों के तहत कंपनी की संपत्तियों को बेचकर धन जुटाने का स्पष्ट मार्ग प्रशस्त करेगी।
कंपनी की खस्ता वित्तीय स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यूनिटेक लिमिटेड को कुल 2,455.73 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कंसोलिडेटेड नेट लॉस उठाना पड़ा है, जबकि समान अवधि में कंपनी की कुल प्राप्तियां अथवा आमदनी मात्र 566.80 करोड़ रुपये सिमट कर रह गई थी।



















