कृषि क्षेत्र में कम लागत और कम समय में अधिक लाभ देने वाली फसलें किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में पारंपरिक और पौष्टिक हरी भाजियों की मांग मंडियों में लगातार बनी रहती है। इन साग-सब्जियों की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये एक से दो महीने के अल्प समय में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं। यदि किसान सही तकनीक, उचित खाद प्रबंधन और समय पर देखरेख के साथ इनकी बुवाई करें, तो बेहद मामूली खर्च में बंपर मुनाफा हासिल किया जा सकता है।
पालक और मूली की उन्नत खेती से बंपर पैदावार
पत्तेदार सब्जियों में पालक भाजी की लोकप्रियता सबसे अधिक मानी जाती है। बाजार में वर्ष भर इसकी सुगम बिक्री और भारी मांग बनी रहती है। किसान पालक की खेती बेड विधि यानी क्यारी बनाकर कर सकते हैं, जिससे जल निकासी सुचारू रहती है और पैदावार में वृद्धि होती है। इस फसल में कीट तथा बीमारियों का प्रकोप अपेक्षाकृत काफी कम देखने को मिलता है। पालक के बेहतर पोषण के लिए DAP, पोटाश और यूरिया खाद का संतुलित मात्रा में प्रयोग करना लाभदायक होता है। एक एकड़ भूमि पर पालक भाजी उगाने में लगभग 20 हजार रुपये की लागत आती है, जिसके एवज में किसान 70 से 80 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर सकते हैं।
इसी क्रम में मूली की खेती भी किसानों के लिए अत्यधिक फायदेमंद साबित होती है। मूली मुख्य रूप से कंद वर्गीय फसलों की श्रेणी में आती है और बाजार में सलाद के रूप में इसकी भरपूर मांग बनी रहती है। एक एकड़ क्षेत्र में मूली की फसल लगाने पर 20 से 25 हजार रुपये तक का कुल खर्च आता है। हालांकि, मूली में कीड़ों का हमला होने की संभावना रहती है, इसलिए फसल की सुरक्षा हेतु आवश्यकतानुसार कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव अनिवार्य होता है। इसमें यूरिया, पोटाश के साथ-साथ देशी गोबर की खाद का उपयोग कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है। उचित देखभाल करने पर एक एकड़ मूली की फसल से 1 लाख रुपये तक की शानदार कमाई की जा सकती है।
लाल भाजी और मेथी से कम दिनों में शानदार कमाई
खाने में लाजवाब स्वाद देने वाली लाल भाजी की फसल बस्तर के साथ-साथ अन्य बाजारों में भी खूब पसंद की जाती है। लाल भाजी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बुवाई के मात्र 25 दिन बाद ही यह कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है। एक एकड़ खेत में लाल भाजी की खेती करने पर 20 से 25 हजार रुपये की लागत आती है। इस फसल में प्राकृतिक गोबर की खाद डालना सबसे उपयुक्त माना जाता है और इसमें बीमारियों का खतरा भी नाममात्र रहता है। महज 25 दिनों की इस फसल से किसान 80 हजार रुपये तक का मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं।
मेथी भाजी की सब्जी भी अपने औषधीय गुणों और स्वाद के कारण बाजारों में काफी अच्छी कीमत पर बिकती है। एक एकड़ जमीन पर मेथी भाजी उगाने में 25 से 30 हजार रुपये तक का खर्च आता है। इसमें फसल के समुचित विकास के लिए गोबर की सड़ी खाद और DAP का प्रयोग किया जाता है। मेथी की फसल में भी कीट और बीमारियों का प्रकोप बहुत कम होता है, जिससे किसानों को कीटनाशकों पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता है और बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है।
बस्तर की प्रसिद्ध खेड़ा और खट्टा भाजी की मांग
खेड़ा भाजी बस्तर क्षेत्र की एक अत्यंत लोकप्रिय और मांग वाली पारंपरिक फसल है। स्थानीय खान-पान में खेड़ा भाजी की सब्जी को विशेष रूप से शामिल किया जाता है। एक एकड़ भूमि में खेड़ा भाजी की खेती करने में करीब 25 हजार रुपये का खर्च आता है। इस फसल के पोषण के लिए गोबर की खाद, DAP तथा यूरिया का प्रयोग किया जाता है। इसमें बीमारियों का प्रभाव काफी कम रहता है। महज 45 दिनों की अल्पावधि में यह फसल तैयार हो जाती है और एक एकड़ से किसानों को 70 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो सकता है।
बस्तर की एक और विख्यात साग खट्टा भाजी है, जिसका अनूठा स्वाद ग्राहकों को बार-बार आकर्षित करता है। बाजार में आते ही यह सब्जी हाथों-हाथ बिक जाती है। खट्टा भाजी लगभग डेढ़ महीने में पककर तैयार हो जाती है। किसान इसमें गोबर की खाद डालकर पूरी तरह जैविक पद्धति से इसकी खेती कर सकते हैं। यदि किसान मात्र आधे एकड़ क्षेत्र में भी खट्टा भाजी लगाते हैं, तो इसमें केवल 5 हजार रुपये का खर्च आता है, जबकि इससे होने वाली कमाई 30 से 40 हजार रुपये तक पहुंच जाती है।
प्याज भाजी और चेच भाजी से लंबे समय तक नियमित आय
प्याज भाजी अपनी विशिष्ट सुगंध और बेहतरीन स्वाद के लिए जानी जाती है। इसकी खेती से भी किसान कम समय में अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। प्याज भाजी के खेत में गोबर खाद, DAP और यूरिया का उपयोग करके फसल की वृद्धि को गति दी जाती है। यह फसल मात्र 30 दिन में तैयार हो जाती है। इसमें बीमारियों का प्रकोप बहुत कम देखा जाता है। आधे एकड़ रकबे में प्याज भाजी की बुवाई करने पर 10 हजार रुपये का खर्च आता है, जबकि इससे 30 से 50 हजार रुपये तक की शानदार कमाई दर्ज की जा सकती है।
बस्तर की अन्य प्रसिद्ध और अत्यधिक मांग वाली किस्मों में चेच भाजी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इस भाजी में भी बीमारियों और कीटों का खतरा बेहद कम रहता है। चेच भाजी की एक एकड़ में खेती करने के लिए लगभग 10 हजार रुपये की बेहद कम लागत आती है। इसमें जैविक खाद या गोबर की खाद डालकर अच्छी उपज ली जा सकती है। यह भाजी डेढ़ महीने के भीतर तैयार हो जाती है और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक बार लगाने के बाद लगभग छह महीने तक लगातार उपज देती रहती है। एक एकड़ से किसान 30 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त कर सकते हैं।



















