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भारतीय रियल एस्टेट में विदेशी झटकों के बीच भी संस्थागत निवेश ने तोड़े रिकॉर्डव्यापार
28 जून 2026, 12:45 pm (46 दिन पहले)· 5

भारतीय रियल एस्टेट में विदेशी झटकों के बीच भी संस्थागत निवेश ने तोड़े रिकॉर्ड

दुनिया भर में व्याप्त अनिश्चितता के बावजूद, साल 2026 की पहली छमाही में भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में संस्थागत निवेश 4.33 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इस दौरान घरेलू निवेशकों का दबदबा रहा और ऑफिस सेक्टर सबसे आकर्षक निवेश विकल्प के रूप में उभरा।

वैश्विक स्तर पर फैली आर्थिक अस्थिरता और महंगाई के तमाम दबावों को दरकिनार करते हुए, भारत का संस्थागत रियल एस्टेट बाजार पिछले कुछ वर्षों में अपनी सबसे मजबूत स्थिति में पहुंच गया है। साल 2026 की पहली छमाही (जनवरी से जून) के दौरान इस क्षेत्र में 4.33 बिलियन डॉलर का संस्थागत निवेश प्राप्त हुआ है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 23 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। जेएलएल इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान कुल 54 बड़े सौदे हुए, जो भारतीय रियल एस्टेट के इतिहास में दर्ज अब तक का सबसे उच्च स्तर है।

घरेलू निवेशकों का बढ़ा प्रभाव

साल 2026 की पहली छमाही में निवेश का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। इस बार कुल निवेश का 64 प्रतिशत हिस्सा घरेलू संस्थागत पूंजी से आया है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इस दौरान स्थानीय निवेशकों ने 2.8 बिलियन डॉलर की राशि रियल एस्टेट में लगाई है। इस बदलाव के पीछे मुख्य रूप से घरेलू प्राइवेट इक्विटी फंड और आरईआईटी (REITs) रहे, जिनकी कुल घरेलू निवेश में 72 प्रतिशत की भागीदारी रही। अब निवेशक कर्ज और इक्विटी के संतुलित मिश्रण के बजाय इक्विटी पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुल घरेलू निवेश का 83 प्रतिशत केवल इक्विटी निवेश रहा।

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विदेशी निवेशकों की सतर्कता

जहाँ घरेलू पूंजी में भारी उछाल आया है, वहीं विदेशी निवेशकों का रुझान थोड़ा धीमा हुआ है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती मुद्रास्फीति और करेंसी में उतार-चढ़ाव के कारण विदेशी संस्थागत निवेश में साल-दर-साल 37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कुल निवेश में विदेशी पूंजी की हिस्सेदारी अब घटकर 36 प्रतिशत रह गई है, जबकि साल 2020 में यह 98 प्रतिशत हुआ करती थी। यह आंकड़ा भारतीय रियल एस्टेट बाजार के वित्तीय ढांचे में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है।

जेएलएल इंडिया की सीनियर एमडी और कैपिटल मार्केट्स हेड लता पिल्लई का कहना है कि जैसे-जैसे वैश्विक भू-राजनीतिक हालात सामान्य होंगे, विदेशी निवेशक भारत में फिर से सक्रिय होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि घरेलू आधार मजबूत होने और विदेशी भागीदारी के बढ़ने से भविष्य में अधिक संतुलित निवेश पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा।

ऑफिस सेक्टर में सबसे अधिक निवेश

संस्थागत पूंजी के लिए ऑफिस सेक्टर इस बार सबसे पसंदीदा क्षेत्र बनकर उभरा है, जिसने आवासीय संपत्तियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी पुरानी बादशाहत फिर से हासिल कर ली है। ऑफिस रियल एस्टेट में निवेश 34 प्रतिशत बढ़कर 2.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें कुल 17 बड़े सौदे हुए, जो कुल संस्थागत निवेश का 54 प्रतिशत हिस्सा है। दिलचस्प बात यह है कि ऑफिस सेक्टर में होने वाले निवेश का 89 प्रतिशत हिस्सा घरेलू निवेशकों द्वारा दिया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऑफिस मार्केट की इस चमक के पीछे कई ठोस कारण हैं। इनमें भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का लगातार विस्तार, लोगों का कार्यालयों में वापस लौटना और वैश्विक स्तर पर अन्य देशों की तुलना में भारत में आकर्षक रेंटल यील्ड (लगभग 7.8 से 8 प्रतिशत) मिलना शामिल है। यह अनिश्चित ब्याज दरों के माहौल में भी निवेशकों को स्थिर आय का भरोसा दिलाता है।

बेंगलुरु और चेन्नई का दबदबा

भौगोलिक दृष्टिकोण से देखें तो बेंगलुरु और चेन्नई ने मिलकर देश के कुल संस्थागत निवेश का 34 प्रतिशत हिस्सा आकर्षित किया है। इन शहरों के तकनीकी और कमर्शियल गलियारों में हुए बड़े सौदों ने यह मुकाम हासिल करने में मदद की। इसके अलावा, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और अन्य वैकल्पिक रियल एस्टेट जैसे नॉन-कोर एसेट्स में भी 57 प्रतिशत निवेश हुआ है, जो भारतीय निवेशकों की बदलती और परिपक्व होती रुचि को दर्शाता है।

औसत सौदे का आकार घटकर 80 मिलियन डॉलर रह गया है, जो एक साल पहले 133 मिलियन डॉलर था। मोतीलाल ओसवाल अल्टरनेट्स में रियल एस्टेट फंड्स के को-हेड सौरभ राठी का मानना है कि निवेशक अब जोखिम को कम करने के लिए बड़ी रकम को एक जगह लगाने के बजाय कई छोटे सौदों में निवेश करना पसंद कर रहे हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे वैश्विक तनाव कम होगा, विदेशी पूंजी का प्रवाह फिर बढ़ेगा और भारत का रियल एस्टेट बाजार अपनी मजबूत नींव के साथ आगे भी निवेशकों के लिए भरोसेमंद बना रहेगा।

सवाल-जवाब

साल 2026 की पहली छमाही में रियल एस्टेट में कुल कितना संस्थागत निवेश हुआ?
इस दौरान कुल 4.33 बिलियन डॉलर का संस्थागत निवेश हुआ है।
क्या रियल एस्टेट निवेश में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ी है?
हाँ, घरेलू संस्थागत पूंजी का हिस्सा बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है।
कौन सा सेक्टर निवेश के मामले में सबसे आगे रहा?
ऑफिस सेक्टर ने सबसे अधिक 2.3 बिलियन डॉलर का निवेश प्राप्त किया, जो कुल निवेश का 54 प्रतिशत है।
विदेशी निवेश में गिरावट का क्या कारण है?
वैश्विक स्तर पर फैली अनिश्चितता, महंगाई का दबाव और करेंसी में उतार-चढ़ाव के कारण विदेशी निवेशकों ने सतर्कता बरती है।
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