देशभर में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों को अपनी प्रॉपर्टी का पज़ेशन पाने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी गंभीर संघर्ष और उससे वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण भारत के रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत दी गई है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने सभी राज्यों के रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) को एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। इसके तहत डेवलपर्स को अपनी आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा करने तथा पंजीकरण के लिए 4 महीने का अतिरिक्त समय देने का निर्देश दिया गया है। सरकार के इस कदम से दिल्ली-एनसीआर समेत देश के प्रमुख शहरों में चल रही कई परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की चुनौतियों से जूझ रहे डेवलपर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पश्चिम एशिया संकट और सप्लाई चेन में पैदा हुई बड़ी चुनौतियां
बीते कुछ समय से पश्चिम एशिया में बने भू-राजनीतिक हालात और संघर्ष की वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसका सीधा असर भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ा है, जहां इमारतों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सामग्रियों की सप्लाई में भारी कमी आ गई है। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरी केंद्रों में निर्माण सामग्री की आपूर्ति बाधित होने से प्रोजेक्ट्स की गति धीमी पड़ गई थी। डेवलपर्स को न केवल ईंट, सीमेंट, स्टील और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी का सामना करना पड़ रहा था, बल्कि सामग्रियों की लागत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी भी दर्ज की गई थी। इसके साथ ही, कई स्थानों पर कुशल और अकुशल श्रमिकों की उपलब्धता को लेकर भी गंभीर व्यावहारिक समस्याएं पैदा हो गई थीं, जिससे तय समय पर निर्माण कार्य पूरा करना लगभग असंभव हो गया था।
मंत्रालय का परामर्श और राहत पाने वाली परियोजनाओं के मानदंड
निर्माण उद्योग को इस संकट से उबारने के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने बीते शुक्रवार को सभी राज्यों के रेरा प्राधिकरणों को आधिकारिक परामर्श पत्र भेजा। इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय रसद और सप्लाई चेन प्रणाली छिन्न-भिन्न हो गई है। इसी वजह से निर्माण सामग्री की भारी कमी पैदा हुई है, जिसका विपरीत प्रभाव परियोजनाओं के समयबद्ध निर्माण पर पड़ रहा है। मंत्रालय ने राज्यों के रेरा निकायों से सिफारिश की है कि वे पात्र रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की अंतिम तिथि को 4 महीने तक बढ़ा दें।
मंत्रालय द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार, यह 4 महीने की राहत उन सभी रियल एस्टेट परियोजनाओं पर लागू होगी जिनकी मूल तिथि, संशोधित तिथि या पूर्व में बढ़ाई गई निर्माण समयसीमा 28 फरवरी, 2026 या उसके बाद पड़ती है। इस निर्णय से पहले रियल एस्टेट उद्योग से जुड़े विभिन्न संगठनों, डेवलपर्स और हितधारकों ने सरकार को ज्ञापन सौंपकर राहत देने का अनुरोध किया था। उन्होंने निर्माण कार्य में आ रही वास्तविक बाधाओं का हवाला देते हुए समय सीमा में विस्तार की मांग की थी।
क्रेडाई, नारेडको और उद्योग जगत का सकारात्मक रुख
सरकार के इस परामर्श का रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रमुख संगठनों क्रेडाई और नारेडको ने जोरदार स्वागत किया है। क्रेडाई के अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा कि मंत्रालय का यह परामर्श रियल एस्टेट सेक्टर की वाजिब मांग के अनुरूप लिया गया एक बेहद सकारात्मक निर्णय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध के कारण सप्लाई चेन टूटने से डेवलपर्स के सामने लॉजिस्टिक्स और श्रमिकों की भारी किल्लत खड़ी हो गई थी। इस समय विस्तार से डेवलपर्स को मौजूदा बाजार स्थितियों के हिसाब से अपनी परियोजनाओं का शेड्यूल फिर से तय करने में मदद मिलेगी।
इसी क्रम में, नारेडको के अध्यक्ष परवीन जैन ने बताया कि पश्चिम एशिया की विषम भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण निर्माण सामग्री की उपलब्धता और उनकी कीमतों पर गहरा असर पड़ा है, जिससे परियोजनाओं का समय पर पूरा न हो पाना एक स्वाभाविक परिणाम था। वहीं, रियल एस्टेट कंपनी सिग्नेचर ग्लोबल के संस्थापक और चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने सरकार के फैसले की सराहना करते हुए इसे व्यावहारिक और दूरदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि 4 महीने का यह अतिरिक्त समय वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं से जूझ रहे डेवलपर्स को संभलने का मौका देगा। उद्योग जगत के इन सभी दिग्गजों ने राज्यों के रेरा प्राधिकरणों से अपील की है कि वे मंत्रालय के परामर्श पर अमल करते हुए जल्द से जल्द नोटिफिकेशन जारी करें ताकि इस फैसले का लाभ नीचे तक पहुंच सके।



















