तीन दशक पहले तक वीरान और बंजर भूमि के रूप में पहचाना जाने वाला गुरुग्राम आज भारत का सबसे आधुनिक और महंगा रियल एस्टेट केंद्र बन चुका है। दिल्ली-एनसीआर के इस प्रमुख शहर में देश के नामी बिल्डर्स और डेवलपर्स लग्जरी लाइफस्टाइल का वादा करके प्रॉपर्टी खरीदारों से करोड़ों रुपये वसूल रहे हैं। मौजूदा दौर में गुरुग्राम की हाई-एंड गेटेड सोसाइटीज में 100 करोड़ रुपये तक की कीमत वाले अपार्टमेंट्स, पेंटहाउस और लग्जरी विला का बिकना बहुत सामान्य घटना बन गई है। प्रीमियम क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, निजी गोल्फ कोर्स और चौबीसों घंटे सुरक्षा के दावों के साथ इन प्रॉपर्टीज को बेचा जाता है। लेकिन इन बहुमंजिला सोसायटियों में जिन सुविधाओं को बेहद खास और दुर्लभ बताकर विज्ञापित किया जाता है, उनकी असली सच्चाई को लेकर अब एक नई बहस छिड़ गई है।
कनाडा यात्रा से बदला रियल एस्टेट विशेषज्ञ का नजरिया
दिल्ली-एनसीआर के प्रॉपर्टी बाजार में बीते 20 सालों से सक्रिय रूप से काम कर रहे रियल एस्टेट विशेषज्ञ अरुण प्रकाश ने इस पूरे विषय पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए गुरुग्राम के प्रीमियम हाउसिंग सेक्टर पर गंभीर सवाल खड़े किए। अरुण प्रकाश पिछले एक सप्ताह से कनाडा के प्रवास पर हैं और वहां के शहरी जीवन व सार्वजनिक सुविधाओं को देखकर उनका नजरिया पूरी तरह से बदल गया। उन्होंने बताया कि कनाडा में जो नागरिक सुविधाएं हर आम इंसान के लिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध हैं, उन्हीं सुविधाओं को गुरुग्राम में लग्जरी का नाम देकर करोड़ों रुपये की ऊंची कीमतों पर बेचा जा रहा है।
पब्लिक पार्क और बुनियादी सुविधाओं का तुलनात्मक विश्लेषण
अपने सोशल मीडिया संदेश में अरुण प्रकाश ने कनाडा के सार्वजनिक पार्कों और सड़कों की एक वीडियो क्लिप शेयर की। इस वीडियो में उन्होंने दिखाया कि किस तरह वहां के पब्लिक पार्कों में बच्चों के खेलने के लिए अत्याधुनिक और सुरक्षित झूले लगे हुए हैं, आसपास चौड़ी और साफ-सुथरी सड़कें हैं तथा खेलकूद की बेहतरीन सुविधाएं आम जनता के लिए हर समय खुली रहती हैं। इस अनुभव के आधार पर उन्होंने कहा कि जिन सुविधाओं को गुरुग्राम की गेटेड सोसाइटीज में अति-विशिष्ट मानकर प्रचारित किया जाता है, वे वास्तव में इंसान के दैनिक जीवन की मौलिक और बुनियादी आवश्यकताएं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के खेलने के लिए हरे-भरे मैदान, स्वच्छ वातावरण, पैदल चलने के ट्रैक और खेल सुविधाएं हर आवासीय सोसाइटी का हिस्सा होनी चाहिए। ऐसी बुनियादी जरूरतों को प्रीमियम बताकर खरीदारों से भारी रकम वसूलने की प्रवृत्ति पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
इंटरनेट पर यूज़र्स ने जताई सहमति और चिंता
अरुण प्रकाश का यह वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रॉपर्टी खरीदारों और आम नागरिकों की ओर से व्यापक प्रतिक्रियाएं आई हैं। अधिकांश लोगों ने उनकी बात से सहमति जताते हुए भारतीय शहरों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं की कमी पर चिंता व्यक्त की। बहस में हिस्सा लेते हुए एक यूज़र ने लिखा कि इंसान बाहर घूमने या सैर करने का आनंद तभी उठा सकता है जब हवा सांस लेने योग्य और स्वच्छ हो, लेकिन गुरुग्राम जैसे औद्योगिक शहरों में इस तरह की सुविधाएं केवल बनावटी और कृत्रिम बनकर रह गई हैं।
इसी मुद्दे पर एक अन्य यूज़र ने टिप्पणी की कि कनाडा जैसे देश में हर आय वर्ग के माता-पिता अपने बच्चों को विश्वस्तरीय पार्कों और खेल सुविधाओं में ले जा सकते हैं। वहां यह सब किसी अमीर व्यक्ति का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक सामान्य नागरिक अधिकार माना जाता है। एक अन्य यूज़र ने भारत के रियल एस्टेट परिदृश्य पर तंज कसते हुए लिखा कि हमारे देश में एक बुनियादी और स्वच्छ जीवनशैली हासिल करने के लिए भी इंसान का अति-अमीर होना जरूरी हो गया है। हालांकि दुनिया के अधिकांश विकसित हिस्सों में स्वच्छ वातावरण और खुले पार्क हर नागरिक को मुफ्त मिलते हैं, लेकिन भारत में आज भी इन्हें लग्जरी का चोला ओढ़ाकर आम जनता की जेब ढीली की जा रही है।



















