देश में नए व्यवसायों को पंख देने और नवाचार का अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने 5 निजी कंपनियों और विशेषज्ञ संगठनों के साथ रणनीतिक समझौते किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य उभरते हुए भारतीय स्टार्टअप्स को केवल वित्तीय मदद ही उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उन्हें अपने शुरुआती चरण से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर विस्तार करने के लिए आवश्यक ढांचागत, तकनीकी और व्यावसायिक सहयोग प्रदान करना भी है। इन समझौतों के जरिए नए फाउंडर्स को नए ग्राहक तलाशने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने और आधुनिक तकनीक को अपनाने में सीधी मदद मिलेगी।
भुगतान समाधान और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
नए व्यवसायों के लिए सुगम लेनदेन और मजबूत तकनीकी आधार बहुत जरूरी होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए डीपीआईआईटी ने फिनटेक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी कैशफ्री पेमेंट्स इंडिया के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत मान्यता प्राप्त और योग्य स्टार्टअप्स को सुरक्षित तथा आसानी से विस्तार करने योग्य भुगतान सेवाएं प्रदान की जाएंगी। इसके साथ ही, धोखाधड़ी से बचाव के लिए जोखिम प्रबंधन, पहचान सत्यापन, प्राथमिकता के आधार पर ऑनबोर्डिंग सहायता और विशेष व्यावसायिक रियायतें भी मुहैया कराई जाएंगी।
डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए वल्चर इंडिया के साथ सहयोग स्थापित किया गया है। यह साझेदारी उभरते स्टार्टअप्स की क्लाउड कंप्यूटिंग संसाधनों तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करेगी। इसके अतिरिक्त, तकनीकी क्षमता निर्माण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से युवा उद्यमी अपने उत्पादों का अधिक कुशलता से निर्माण, परीक्षण और विस्तार कर सकेंगे।
ग्रीन एनर्जी, एआई और ऑटो-टेक में नई पहल
रणनीतिक और भविष्य के तकनीकी क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए डार्विन डायनामिक्स के साथ हाथ मिलाया गया है। यह समझौता स्वच्छ ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जलवायु प्रौद्योगिकियों और उन्नत निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के संचालन पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य देश में पर्यावरण-अनुकूल और उच्च-तकनीकी समाधानों को विकसित करना है।
इसी क्रम में, ऑटोमोटिव क्षेत्र और मोबिलिटी में नए विचारों को बढ़ावा देने के लिए कार्स24 के साथ एमओयू किया गया है। इसके माध्यम से स्टार्टअप फाउंडर्स को अनुभवी विशेषज्ञों से मेंटरशिप मिलेगी। साथ ही, मोबिलिटी और ऑटो-टेक कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे। कार्स24 द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रौद्योगिकियों को सक्षम बनाने के साथ-साथ हैकाथॉन और नवाचार प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे युवाओं को अपने व्यावहारिक समाधान पेश करने का मंच मिल सके।
ग्लोबल मार्केट एक्सेस और आवेदन की प्रक्रिया
स्टार्टअप्स को रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए डीपीआईआईटी ने काउंसिल फॉर स्टार्टअप इंडिया (CSI) के साथ भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। यह संस्था स्टार्टअप्स को निवेशकों से जोड़ने, रणनीतिक भागीदारी कराने, नेतृत्व विकास की ट्रेनिंग देने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश की सुविधा प्रदान करने में मदद करेगी। इससे नए उद्यमियों के लिए पूंजी प्राप्त करना और अपने परिचालन का विस्तार करना आसान हो जाएगा।
सरकार की इस दूरगामी योजना का लाभ उठाने के इच्छुक युवा उद्यमियों और फाउंडर्स को आधिकारिक सरकारी स्टार्टअप पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण और आवेदन करना होगा। पोर्टल पर पात्रता की जांच के बाद पात्र स्टार्टअप्स इन सभी 5 कंपनियों द्वारा दी जा रही सुविधाओं, तकनीकी सहायता और वित्तीय लाभों का फायदा उठा सकते हैं।



















