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जुलाई में आम थाली पर महंगाई की मार, वेज खाना 4% और नॉन-वेज 9% तक हुआ महंगाव्यापार
8 अग॰ 2026, 4:33 pm (3 घंटे पहले)· 0

जुलाई में आम थाली पर महंगाई की मार, वेज खाना 4% और नॉन-वेज 9% तक हुआ महंगा

जुलाई के महीने में रसोई गैस, खाद्य तेल, प्याज और चिकन की कीमतों में तेजी के कारण वेज और नॉन-वेज थाली की लागत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

घर में तैयार होने वाले दैनिक भोजन की थाली जुलाई के महीने में अधिक खर्चीली साबित हुई है। सालाना आधार पर तुलना की जाए तो शाकाहारी थाली तैयार करने का खर्च 4 प्रतिशत बढ़ गया है, जबकि मांसाहारी थाली की लागत में 9 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है। रसोई के इस बढ़ते बजट के पीछे मुख्य रूप से प्याज, खाद्य तेल, रसोई गैस सिलेंडर और ब्रॉयलर चिकन की बढ़ती कीमतें जिम्मेदार रही हैं। क्रिसिल इंटेलिजेंस की तरफ से शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में भोजन की थाली पर पड़े इस वित्तीय दबाव का पूरा ब्योरा प्रस्तुत किया गया है।

थाली की लागत बढ़ाने वाले मुख्य घटक

रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार, जुलाई में शाकाहारी थाली की औसत लागत बढ़ने का सबसे बड़ा कारण प्याज की कीमतों में आई भारी तेजी है। सालाना आधार पर प्याज के भाव में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही भोजन पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल की कीमतों में 11 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि रसोई गैस सिलेंडर के दाम में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन आवश्यक वस्तुओं की दरें एक साथ बढ़ने की वजह से आम परिवारों का रसोई का बजट प्रभावित हुआ है।

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चिकन और मौसम की मार से नॉन-वेज थाली महंगी

मांसाहारी थाली के मामले में महंगाई का असर और भी अधिक दिखाई दिया है। प्याज और एलपीजी सिलेंडर के महंगे होने के अलावा ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत का उछाल आया। गौरतलब है कि एक मांसाहारी थाली को तैयार करने में आने वाली कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा अकेले चिकन का होता है। बाजार में प्याज की दरें ऊंचे स्तर पर बने रहने के पीछे पुराना स्टॉक महंगा मिलना एक बड़ी वजह रहा। इसके अतिरिक्त, मार्च और अप्रैल के दौरान महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि के कारण फसल और भंडारण को भारी नुकसान पहुंचा था, जिससे बाजार में आपूर्ति प्रभावित हुई।

गैस, तेल के अंतरराष्ट्रीय कारण और सब्जियों से राहत

खाद्य तेल और रसोई गैस की कीमतों में दर्ज की गई इस तेजी के लिए आपूर्ति में आए व्यवधानों और पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी तनाव को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा दरों में उछाल देखने को मिला। हालांकि, थाली की लागत में हुई इस समग्र बढ़ोतरी को नियंत्रित करने में आलू और टमाटर की घटती कीमतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सालाना आधार पर आलू के भाव में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि टमाटर के दाम 2 प्रतिशत घटे। आलू के उत्पादन में सुधार और बोया गया रकबा अधिक होने से इसके दाम सस्ते रहे, वहीं टमाटर की देरी से हुई बुवाई के बाद जुलाई में बाजार में आवक बढ़ने से इसकी कीमतें नियंत्रण में रहीं।

मासिक आधार पर जून से जुलाई का तुलनात्मक रुझान

यदि एक महीने से दूसरे महीने की तुलना की जाए, तो जून के मुकाबले जुलाई में शाकाहारी थाली तैयार करने का खर्च 2 प्रतिशत बढ़ा। इस मासिक वृद्धि के पीछे प्याज के दामों में आया 23 प्रतिशत का बड़ा उछाल और आलू की कीमतों में हुई 4 प्रतिशत की बढ़त मुख्य कारक रही। हालांकि, इस दौरान टमाटर के भाव में 1 प्रतिशत की मामूली कमी आई और अन्य जरूरी चीजों की दरें स्थिर रहीं, जिससे शाकाहारी थाली की लागत अधिक नहीं बढ़ी। दूसरी ओर, जून की तुलना में जुलाई में मांसाहारी थाली की लागत लगभग स्थिर बनी रही, क्योंकि ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में अनुमानित 2 प्रतिशत की गिरावट ने अन्य सामग्रियों में हुई महंगाई के प्रभाव को संतुलित कर दिया।

सवाल-जवाब

जुलाई में वेज थाली की लागत में कितनी बढ़ोतरी दर्ज की गई?
जुलाई में शाकाहारी थाली की औसत लागत में सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
नॉन-वेज थाली अधिक महंगी होने का मुख्य कारण क्या रहा?
नॉन-वेज थाली की लागत 9 प्रतिशत बढ़ी है, जिसका प्रमुख कारण ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में 14 प्रतिशत का उछाल और प्याज व गैस का महंगा होना है।
किन सब्जियों की कीमतों में गिरावट से थाली की लागत में कुछ राहत मिली?
सालाना आधार पर आलू के दाम 12 प्रतिशत और टमाटर के दाम 2 प्रतिशत घटे, जिससे थाली की महंगाई थोड़ी नियंत्रित रही।
प्याज के दामों में इतनी तेजी क्यों देखने को मिली?
बाजार में महंगे पुराने स्टॉक की आपूर्ति और मार्च-अप्रैल में महाराष्ट्र में हुई बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से फसल प्रभावित होने के कारण प्याज की कीमतें ऊंची रहीं।
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