ग्राहकों की संख्या के लिहाज से भारतीय स्टेट बैंक के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक अपने ग्राहकों को फिक्स्ड डिपॉजिट पर 3.00 प्रतिशत से लेकर 7.40 प्रतिशत तक का सालाना ब्याज ऑफर कर रहा है। पंजाब नेशनल बैंक में खाताधारक न्यूनतम 7 दिनों से लेकर अधिकतम 10 सालों तक की अवधि के लिए एफडी खाता खुलवा सकते हैं। कम समय के लिए बचत करने वाले निवेशकों के लिए 91 दिनों की एफडी एक लोकप्रिय विकल्प है, जिस पर बैंक अलग-अलग उम्र वर्ग के हिसाब से आकर्षक रिटर्न दे रहा है।
91 दिनों की एफडी पर मिलने वाली ब्याज दरों का पूरा ब्योरा
पंजाब नेशनल बैंक 91 दिनों की मैच्योरिटी वाली एफडी योजना पर 4.90 प्रतिशत से लेकर 5.70 प्रतिशत तक का ब्याज प्रदान कर रहा है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये ब्याज दरें केवल 3 करोड़ रुपये से कम के रिटेल डिपॉजिट पर ही लागू होती हैं। उम्र के हिसाब से ब्याज दरों का वर्गीकरण इस प्रकार है
- सामान्य नागरिक (59 साल तक): 59 वर्ष तक की आयु वाले सभी सामान्य ग्राहकों को 91 दिनों की एफडी पर 4.90 प्रतिशत का सालाना ब्याज दिया जा रहा है।
- सीनियर सिटीजन्स (60 साल या उससे अधिक): 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 91 दिनों की एफडी दर 5.40 प्रतिशत तय की गई है।
- सुपर सीनियर सिटीजन्स (80 साल या उससे अधिक): 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के अति वरिष्ठ नागरिकों को इस 91 दिनों की अवधि पर सबसे ज्यादा 5.70 प्रतिशत का ब्याज मिल रहा है।
वरिष्ठ और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष ब्याज लाभ
पंजाब नेशनल बैंक अपनी एफडी योजनाओं पर वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में 0.50 प्रतिशत (50 बेसिस पॉइंट्स) ज्यादा ब्याज दर का फायदा देता है। वहीं, सुपर सीनियर सिटीजन्स को सीनियर सिटीजन्स की तय दर से भी 0.30 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज दिया जाता है। इस तरह सुपर सीनियर सिटीजन्स को सामान्य ग्राहकों के मुकाबले कुल 0.80 प्रतिशत अधिक रिटर्न हासिल होता है। अलग-अलग व्यावसायिक बैंकों में सुपर सीनियर सिटीजन्स के लिए ब्याज दरों के नियम भिन्न हो सकते हैं।
ग्राहक अपनी आर्थिक जरूरतों के अनुसार पीएनबी में न्यूनतम 7 दिनों की अल्पावधि से लेकर अधिकतम 10 वर्षों की दीर्घावधि तक के लिए एफडी करवा सकते हैं।
दरों में बदलाव की तारीख और आरबीआई की नीति का प्रभाव
पंजाब नेशनल बैंक ने अपने एफडी खातों की ब्याज दरों में आखिरी बार 1 जून, 2026 को संशोधन किया था। तब से बैंक की ब्याज दरें इसी स्तर पर बनी हुई हैं। देश के बड़े बैंकों की एफडी दरें काफी हद तक भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और रेपो रेट पर निर्भर करती हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 5 अगस्त, 2026 को मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक में लगातार चौथी बार मुख्य नीतिगत दर रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया। रिजर्व बैंक ने इससे पहले दिसंबर 2025 में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी, जिसके बाद रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया था। दिसंबर 2025 के बाद से रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे बैंकों की एफडी ब्याज दरों में भी स्थिरता देखने को मिल रही है।



















