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भीलवाड़ा के किसानों को राहत: नैनो यूरिया और नैनो डीएपी छिड़काव पर सरकार देगी आधा खर्च, सीधे खाते में आएगा 50 फीसदी अनुदानव्यापार
16 जून 2026, 7:11 pm (45 दिन पहले)· 2

भीलवाड़ा के किसानों को राहत: नैनो यूरिया और नैनो डीएपी छिड़काव पर सरकार देगी आधा खर्च, सीधे खाते में आएगा 50 फीसदी अनुदान

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भीलवाड़ा जिले में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव पर 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा, जो डीबीटी के जरिए किसानों के बैंक खाते में पहुंचेगा। इससे खेती की लागत घटेगी और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के किसानों के लिए खेती की जेब पर पड़ने वाला बोझ अब हल्का होने वाला है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत एक खास अनुदान योजना शुरू की है, जिसके जरिए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे आधुनिक तरल उर्वरकों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इन नैनो खादों के छिड़काव पर किसानों को होने वाले खर्च का आधा हिस्सा, यानी 50 प्रतिशत तक, सरकार खुद उठाएगी।

अनुदान सीधे खाते में, बिचौलिए की कोई गुंजाइश नहीं

योजना के तहत मिलने वाली अनुदान राशि किसी दफ्तर के चक्कर काटे बिना सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से पहुंचेगी। सरकार का मकसद साफ है, खेती की लागत घटाना, परंपरागत रासायनिक खादों पर किसानों की निर्भरता कम करना और साथ ही मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखना। माना जा रहा है कि कम जमीन वाले छोटे और सीमांत किसानों को इस पहल का सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा, क्योंकि वे कम खर्च में बेहतर पैदावार हासिल कर सकेंगे।

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जिले में कितने रकबे पर होगा प्रदर्शन

भीलवाड़ा जिले को इस योजना के तहत बड़ा लक्ष्य सौंपा गया है। यहां नैनो यूरिया का छिड़काव 482 हेक्टेयर क्षेत्र में और नैनो डीएपी का छिड़काव 337 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रदर्शन के रूप में कराया जाएगा। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक विनोद कुमार जैन के मुताबिक खरीफ और रबी, दोनों ही सीजन में इन नैनो उर्वरकों के छिड़काव पर किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसका मूल उद्देश्य रासायनिक खादों पर निर्भरता को घटाकर मिट्टी की सेहत सुधारना और किसानों की उत्पादन लागत कम करना है।

छिड़काव के लिए आधुनिक तकनीक को प्राथमिकता

खेतों में नैनो खादों का छिड़काव हाथ से नहीं, बल्कि आधुनिक उपकरणों से कराने पर जोर रहेगा। किसान अपने स्तर पर ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर, बैटरी ऑपरेटेड स्प्रेयर, नैपसैक स्प्रे या फिर अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक का इंतजाम कर सकते हैं। इन तरीकों से छिड़काव तेज, समान और कम मेहनत वाला हो जाता है, जिससे खाद का असर भी बेहतर मिलता है।

कितना पैसा, कितनी बचत

योजना में लागत का हिसाब वैज्ञानिक तरीके से तय किया गया है। सिफारिश के अनुसार फसलों में प्रति हेक्टेयर एक छिड़काव के लिए 2.5 बोतल नैनो खाद का उपयोग किया जाएगा। नैनो यूरिया के लिए प्रति हेक्टेयर कुल लागत 2000 रुपए रखी गई है, जिस पर किसान को 1000 रुपए का अनुदान मिलेगा। वहीं नैनो डीएपी के लिए प्रति हेक्टेयर कुल लागत 2900 रुपए तय की गई है, जिस पर 1450 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यानी कुल राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा सीधे अनुदान के रूप में देय होगा, जबकि बाकी का 50 प्रतिशत खर्च किसान को खुद वहन करना होगा।

कौन सी फसलें और कितना रकबा

कृषि अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर ने बताया कि फसलों के वैज्ञानिक चक्र के अनुसार यह योजना दोनों सीजन की प्रमुख फसलों को कवर करेगी। रबी सीजन में गेहूं, जौ, सरसों, चना और जीरा, जबकि खरीफ सीजन में बाजरा, मक्का, सोयाबीन और मूंगफली इसमें शामिल हैं। हर किसान के लिए प्रदर्शन क्षेत्र की सीमा कम से कम 0.4 हेक्टेयर से लेकर अधिकतम 10 हेक्टेयर तक रखी गई है, ताकि छोटे और सीमांत किसानों को इसका सबसे ज्यादा लाभ मिल सके।

निगरानी और सत्यापन के बाद ही भुगतान

योजना की पारदर्शिता पर भी खास ध्यान दिया गया है। खेतों में होने वाला छिड़काव कृषि पर्यवेक्षक और सहायक कृषि अधिकारी की निगरानी में किया जाएगा। भौतिक सत्यापन पूरा होने के बाद ही अनुदान की राशि किसानों के खाते में भेजी जाएगी। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर कम से कम 10 किसानों का एक प्रदर्शन क्लस्टर बनाया जाएगा, जिससे एक ही इलाके में योजना का असर सामूहिक रूप से दिखाई दे।

सवाल-जवाब

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी पर कितना अनुदान मिलेगा?
दोनों नैनो उर्वरकों के छिड़काव पर कुल लागत का 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा, जो डीबीटी के जरिए किसान के बैंक खाते में जमा होगा।
प्रति हेक्टेयर किसान को कितनी राशि मिलेगी?
नैनो यूरिया पर प्रति हेक्टेयर 2000 रुपए की लागत में से 1000 रुपए, और नैनो डीएपी पर 2900 रुपए की लागत में से 1450 रुपए का अनुदान मिलेगा।
यह योजना किन फसलों और सीजन पर लागू है?
यह खरीफ और रबी दोनों सीजन पर लागू है। रबी में गेहूं, जौ, सरसों, चना और जीरा तथा खरीफ में बाजरा, मक्का, सोयाबीन और मूंगफली इसमें शामिल हैं।
अनुदान का भुगतान कब किया जाएगा?
छिड़काव कृषि पर्यवेक्षक और सहायक कृषि अधिकारी की निगरानी में होगा, और भौतिक सत्यापन पूरा होने के बाद ही अनुदान राशि किसान के खाते में भेजी जाएगी।
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