अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाज़ारों में कीमती धातुओं के भाव में एक बार फिर तेज़ उछाल देखने को मिला है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में दर्ज की गई लगभग 0.90% की गिरावट के साथ ही सोने की कीमतें 5 दिनों के उच्चतम स्तर $4,126 प्रति औंस तक पहुंच गईं। मुद्रा बाज़ार में जापानी अधिकारियों द्वारा येन को सहारा देने के लिए किए गए संभावित हस्तक्षेप ने डॉलर पर गहरा दबाव बनाया। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को मापने वाला DXY इंडेक्स गिरकर 99.90 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। डॉलर की इस कमजोरी ने सर्राफ़ा निवेशकों को आकर्षित किया, जिससे सोने ने लगातार दो दिनों की बढ़त दर्ज करते हुए $4,100 का अहम मनोवैज्ञानिक आंकड़ा सफलतापूर्वक पार कर लिया।
वर्तमान में हाजिर बाज़ार की गतिविधियों को देखें तो सोना $4,161 के स्तर के आसपास मज़बूती के साथ टिका हुआ है। पिछले सत्र में $4,035 पर बंद होने के बाद इसमें 3.13% से अधिक की सीधी बढ़त दर्ज की गई है। बाज़ार में आई इस तेज़ी का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के 19.15 गुना तक पहुंच गया। हालांकि पिछले 52 हफ्तों के दौरान सोने का दायरा $3,264 से $5,586 के बीच रहा है, लेकिन हालिया बिकवाली के बाद यह ताज़ा उछाल निवेशकों के भरोसे को फिर से बहाल कर रहा है।
कमज़ोर आर्थिक आंकड़ों से फ़ेडरल रिज़र्व पर ढील देने का दबाव
अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए हालिया व्यापक आर्थिक आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे हैं, जिससे केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की आशंकाएं काफी हद तक कम हो गई हैं। ब्यूरो ऑफ़ इकोनॉमिक एनालिसिस द्वारा जारी कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में सालाना आधार पर कोर मुद्रास्फीति 3.4% से घटकर 3.3% पर आ गई, जो कि बाज़ार के अनुमानों के बिल्कुल अनुरूप थी। वहीं मुख्य हेडलाइन PCE मुद्रास्फीति भी पिछले महीने के 4.1% से धीमी होकर 3.7% YoY पर दर्ज की गई।
मुद्रास्फीति के नरम पड़ने के साथ-साथ अमेरिकी आर्थिक विकास की गति में भी रुकावट देखने को मिली है। कॉमर्स डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही (Q2) के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर मात्र 1.5% रही। विश्लेषकों ने इस अवधि में 2.1% की जीडीपी विकास दर का अनुमान जताया था। व्यापार घाटे में हुई अचानक वृद्धि को जीडीपी आंकड़ों में इस गिरावट की मुख्य वजह माना जा रहा है। सुस्त विकास दर और घटती मुद्रास्फीति के इस मिश्रण ने फ़ेडरल रिज़र्व की आगामी मौद्रिक नीतियों को लेकर निवेशकों की सोच को बदल दिया है।
सितंबर की ब्याज दरों पर बाज़ार की नई उम्मीदें और बॉन्ड बाज़ार का हाल
मनी मार्केट के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर महीने की बैठक में फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के दांव काफी घट गए हैं। प्राइम टर्मिनल के डेटा से पता चलता है कि सितंबर में दरें बढ़ने की संभावना अब सिमटकर केवल 30% रह गई है। इसके विपरीत, फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा दरों को वर्तमान स्तर पर ही बनाए रखने (होल्ड करने) की संभावना तेज़ी से बढ़कर 70% तक पहुंच गई है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी न होने की यह धारणा सोने जैसी बिना ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों के लिए बेहद सकारात्मक मानी जाती है।
हालांकि, लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में प्रीमियम बना हुआ है। फ़ेडरल रिज़र्व के अधिकारियों की ओर से भविष्य के नीतिगत दिशानिर्देशों को लेकर दिए गए अस्पष्ट बयानों के कारण बॉन्ड मार्केट में पूरी तरह से नरमी नहीं आई है। इसके बावजूद, डॉलर में आई चौतरफा बिकवाली ने सोने के भाव को नीचे नहीं गिरने दिया। आगामी शुक्रवार को जारी होने वाले यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन कंज्यूमर सेंटीमेंट इंडेक्स के आंकड़ों पर अब निवेशकों की निगाहें टिकी हैं, जो अमेरिकी उपभोक्ता विश्वास की स्थिति को और अधिक स्पष्ट करेंगे।
कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितता
खाड़ी युद्ध के मोर्चे पर नए सिरे से भड़की सैन्य हलचल ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया में संघर्ष फिर से शुरू होने के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने और ऊर्जा की लागत बढ़ने की आशंका गहरा गई है। अमेरिकी क्रूड बेंचमार्क वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) की बात करें तो यह दैनिक कारोबार में 1% की गिरावट के साथ $83.59 प्रति बैरल पर देखा गया। हालांकि, इस एकदिवसीय गिरावट के बावजूद जुलाई महीने के दौरान WTI के भाव में अब तक लगभग 20% का भारी उछाल दर्ज किया जा चुका है।
ऊर्जा बाज़ार में बनी यह तेज़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबाव को दोबारा जगा सकती है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध या सीमा विवाद बढ़ते हैं, तो निवेशक जोखिम भरी परिसंपत्तियों जैसे शेयर बाज़ार से पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों का रुख करते हैं। इतिहास गवाह है कि ऐसी अशांत परिस्थितियों में सोने को सबसे भरोसेमंद हेजिंग विकल्प माना जाता है, जिससे इसके भाव को लगातार सपोर्ट मिलता रहता है।
सोने का तकनीकी विश्लेषण: रेजिस्टेंस और सपोर्ट स्तर
तकनीकी चार्ट पर सोने के रुझान को देखें तो $4,100 का स्तर पार करने के बाद तकनीकी संकेतकों में सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 50 के तटस्थ स्तर से ऊपर निकलकर 54 पर पहुंच चुका है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि बाज़ार में खरीदार एक बार फिर हावी हो रहे हैं। वहीं MACD इंडिकेटर में हिस्टोग्राम 18.98 पर सकारात्मक है, हालांकि MACD लाइन -33.27 पर सिग्नल लाइन -52.25 के ऊपर कारोबार कर रही है, जो एक बुलिश क्रॉसओवर की पुष्टि करती है। स्टोकैस्टिक ऑसिलेटर में फास्ट लाइन 91 और सिग्नल लाइन 56 पर है।
आगे की तेज़ी के लिए खरीदारों को 22 जुलाई के उच्चतम स्तर $4,165 की बाधा को पार करना होगा। यदि सोने के भाव $4,165 के ऊपर टिकते हैं, तो अगला लक्ष्य 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) होगा जो $4,194 (और लाइव EMA50 $4,212) के आसपास स्थित है। इसके ऊपर निकलने पर 6 जुलाई का पीक लेवल $4,202 परीक्षण के लिए खुल जाएगा। दूसरी ओर, यदि बाज़ार में बिकवाली का दबाव बनता है, तो पहला तत्काल सपोर्ट $4,100 पर है। इसे तोड़ने पर 24 जुलाई का निचला स्तर $4,022 सामने आएगा, जिसके बाद $4,000 का मनोवैज्ञानिक स्तर और फिर 17 जून का निचला स्तर $3,959 सुरक्षा कवच का काम करेगा। वर्तमान में 14-दिवसीय एटीआर (ATR) 72.90 पर है, जो बाज़ार में दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा को दर्शाता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में सोने का ऐतिहासिक महत्व और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी
मानव इतिहास में सोने की भूमिका केवल एक आभूषण तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसे सदियों से धन के संचय और विनिमय के सबसे मजबूत माध्यम के रूप में स्वीकार किया गया है। आधुनिक वित्तीय व्यवस्था में भी सोने का महत्व कम नहीं हुआ है। जब भी वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता या मंदी की आशंका बनती है, तो इसे एक सुरक्षित निवेश विकल्प (सेफ़-हेवन एसेट) माना जाता है। सोने में निवेश की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी भी विशिष्ट देश, सरकार या संस्था के साख जोखिम से पूरी तरह मुक्त होता है, जिससे यह मुद्रास्फीति और गिरती मुद्राओं के खिलाफ एक बेहतरीन ढाल बनता है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। वित्तीय संकट के दौरान अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को स्थिर रखने और देश की साख में अंतरराष्ट्रीय विश्वास बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड 1,136 टन सोना अपने भंडारों में जोड़ा, जिसकी कुल कीमत लगभग $70 अरब थी। आधिकारिक रिकॉर्ड की शुरुआत के बाद से यह किसी भी एक वर्ष में केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई सोने की सबसे बड़ी खरीद थी। वर्तमान में चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाज़ारों के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार को तेज़ी से बढ़ा रहे हैं।
विदेशी मुद्रा बाज़ार का चौतरफा हाल: EUR/USD और GBP/USD में उछाल
अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी का असर केवल सोने पर ही नहीं पड़ा, बल्कि दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिली। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) गुरुवार के कारोबारी सत्र में 1.3450 का स्तर पार करते हुए कई हफ़्तों के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। बैंक ऑफ़ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी हालिया बैठक में बेंचमार्क ब्याज दर को 3.75% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। इस बैठक में 6-3 के बहुमत से दरें स्थिर रखने का निर्णय लिया गया, जबकि 3 सदस्यों ने दरें बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया था। अमेरिका के जीडीपी आंकड़ों में सुस्ती के कारण पाउंड को डॉलर के मुकाबले अतिरिक्त मजबूती मिली।
दूसरी ओर, यूरो (EUR/USD) भी अमेरिकी सत्र के दौरान 1.1530 के आसपास कारोबार करता देखा गया, जो पिछले छह हफ़्तों का उच्चतम स्तर है। फ़ेडरल रिज़र्व की विभाजित नीति और सितंबर में दरें न बढ़ने की बढ़ती संभावनाओं ने अमेरिकी डॉलर पर लगातार दबाव बनाए रखा। येन में संभावित हस्तक्षेप और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के सुस्त संकेतों के चलते वैश्विक विदेशी मुद्रा बाज़ार में डॉलर की स्थिति कमज़ोर बनी हुई है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की कीमत डॉलर (XAU/USD) में तय होती है, इसलिए डॉलर की किसी भी बिकवाली का सीधा सकारात्मक असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।



















