देश में पढ़ाई-लिखाई का दायरा भले ही तेजी से बढ़ा हो, लेकिन पैसे की समझ अब भी बहुत पीछे है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साक्षरता दर 80 फीसदी के पार पहुंच चुकी है, फिर भी वित्तीय जानकारी रखने वालों का आंकड़ा आज भी करीब 27 फीसदी पर ही अटका है। जैसे-जैसे निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग की जरूरत बढ़ रही है, वैसे-वैसे फाइनेंशियल मामलों को समझने की मांग भी तेज होती जा रही है। दिक्कत यह है कि छोटे शहरों में इस तरह की जानकारी का भारी अभाव है, जबकि वहीं निवेशकों की संख्या लगातार ऊपर जा रही है। इसी खाई को पाटने के मकसद से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड ने पटना की एक कंपनी के साथ मिलकर लोगों को फाइनेंशियल एजुकेशन देने की पहल शुरू की है।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री (AMFI) में रजिस्टर्ड पटना की म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी एसआईडीए सर्विसेज ने वित्तीय साक्षरता और निवेशक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक इन्वेस्टर लर्निंग सेंटर की शुरुआत की है। इस सेंटर का उद्घाटन आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ निमेश शाह ने किया। इसी मौके पर एसआईडीए सर्विसेज ने अपनी वित्तीय साक्षरता पहल ‘पैसा की पाठशाला’ की पायलट शुरुआत भी कर दी। इसका मकसद निवेशकों को पर्सनल फाइनेंस, लंबी अवधि के निवेश और परिवार की वित्तीय योजना से जुड़ी अहम बातें आसान, व्यवस्थित और बातचीत वाले अंदाज में समझाना है।
क्लासरूम नहीं, सवाल-जवाब का माहौल
यहां 15 से 20 लोगों के छोटे-छोटे ग्रुप में लर्निंग सेशन कराए जाएंगे। खास बात यह है कि ये सेशन क्लासरूम वाले लेक्चर की तरह नहीं, बल्कि बातचीत और सवाल-जवाब के तरीके से होंगे। इनमें वसीयत और संपत्ति की योजना, महंगाई, व्यवस्थित निवेश, कर्ज लेने में अनुशासन, रिटायरमेंट प्लानिंग और परिवार के वित्तीय फैसलों जैसे विषयों पर बात होगी। हर सेशन करीब 45 से 75 मिनट का रहेगा और इसके बाद सवाल-जवाब का इंटरैक्टिव दौर भी चलेगा, जहां लोग अपनी उलझनें खुलकर रख सकेंगे।
छोटे शहरों की SIP में बड़ी भागीदारी
यह पूरी पहल इसी सोच पर टिकी है कि निवेशकों को बेहतर तरीके से जागरूक करना जरूरी है। नेशनल सेंटर फॉर फाइनेंशियल एजुकेशन के आंकड़े बताते हैं कि भारत में सिर्फ 27 फीसदी लोग ही वित्तीय रूप से साक्षर हैं। दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वालों की हिस्सेदारी अब बड़े शहरों की सीमा से बाहर निकलकर दिखने लगी है। मौजूदा हालात में 54 फीसदी एक्टिव SIP अकाउंट B-30 शहरों से आ रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि बिहार इसी बदलते रुझान की एक बड़ी मिसाल है। यहां लोग व्यवस्थित निवेश में दिलचस्पी तो खूब दिखा रहे हैं, लेकिन सही और भरोसेमंद विकल्प मिलने के बाद ही निवेश का फैसला लेते हैं।
हर उम्र के लिए अलग पाठ
एसआईडीए सर्विसेज के फाउंडर संजीव दयाल का कहना है कि निवेश की शिक्षा वहीं तक पहुंचनी चाहिए, जहां लोग रहते हैं और अपने वित्तीय फैसले लेते हैं। उनके मुताबिक इस लर्निंग सेंटर का मकसद ऐसा आरामदायक माहौल बनाना है, जहां लोग और परिवार बिना झिझक सवाल पूछ सकें, पैसों की बातें समझ सकें और ज्यादा समझदारी से फैसले ले सकें। सेंटर में युवाओं के लिए SIP में नियमित निवेश, बजट बनाना और कर्ज से जुड़े व्यवहार जैसे विषय रखे गए हैं। नौकरीपेशा लोगों और परिवारों के लिए महंगाई, लक्ष्य आधारित योजना, वित्तीय सुरक्षा और परिवार की वित्तीय योजना पर बात होगी। वहीं उम्रदराज निवेशकों के लिए रिटायरमेंट फंड तैयार करना, नियमित आय की योजना और संपत्ति की योजना जैसे विषय शामिल किए गए हैं।













