वैश्विक पटल पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जहां लगभग एक वर्ष के अंतराल के बाद भारत, चीन और रूस की आपसी जुगलबंदी एक बार फिर खुलकर सामने आई। इस पूरे घटनाक्रम में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का बेहद बेबाक और आक्रामक अंदाज देखने को मिला। उन्होंने न केवल पश्चिमी देशों के शक्तिशाली आर्थिक संगठन G-7 पर तीखा निशाना साधा, बल्कि भारतीय औद्योगिक घराने महिंद्रा एंड महिंद्रा की जमकर सराहना भी की। पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच आपसी तालमेल और सहभागिता का ही परिणाम है कि आज इन देशों की घरेलू कंपनियां एक-दूसरे के बाजारों में लगातार प्रगति कर रही हैं और अपनी स्थिति मजबूत बना रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिंद्रा समूह के सूचना प्रौद्योगिकी यानी IT और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI क्षेत्र में योगदान को रेखांकित किया।
ब्रिक्स के मंच से वैश्विक कॉर्पोरेट सफलता का गुणगान
रूसी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों के भीतर पनप रही कॉर्पोरेट सफलताओं की कहानियों को साझा करते हुए महिंद्रा समूह को एक बेहतरीन उदाहरण के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि महिंद्रा द्वारा IT और AI जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में दिया जा रहा योगदान इस समूह के अन्य देशों के विकास में काफी मददगार साबित हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने ब्रिक्स देशों की अन्य प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियों का भी उल्लेख किया, जिनमें चीन की हुवावे, ब्राजील की एम्ब्रेयर, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की टीपीओ और रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम शामिल हैं। पुतिन का मानना है कि इन राष्ट्रीय कंपनियों की असाधारण सफलता ब्रिक्स देशों के विशाल घरेलू बाजारों, तेजी से बढ़ रहे शहरीकरण और उनके भीतर लगातार विकसित हो रही अत्याधुनिक तकनीकी क्षमताओं का एक जीवंत और अनूठा प्रमाण है।
महिंद्रा को ही सराहना के लिए चुने जाने के पीछे के कारण
वैश्विक मंच पर महिंद्रा का नाम लिया जाना कोई सामान्य घटना नहीं है और इस बयान के कई गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। लोगों के बीच यह जिज्ञासा स्वाभाविक है कि आखिर पुतिन ने केवल महिंद्रा का ही विशेष जिक्र क्यों किया। इसका मुख्य कारण यह है कि महिंद्रा समूह ने ब्रिक्स देशों के बाजारों में खुद को महज एक वाहन निर्माता यानी ऑटोमोबाइल कंपनी के रूप में सीमित नहीं रखा है। इसके विपरीत, कंपनी ने तकनीकी क्षेत्र में भारी निवेश कर खुद को IT और AI क्षेत्र के एक बड़े खिलाड़ी के तौर पर स्थापित कर लिया है। इसके अतिरिक्त, पुतिन के इस बयान का एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक उद्देश्य भी था। वे पश्चिमी ताकतों को स्पष्ट संदेश देना चाहते थे कि वैश्विक व्यापार में अब केवल अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों का ही एकाधिकार नहीं रह गया है, बल्कि ब्रिक्स देशों की कंपनियां भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना दबदबा बना रही हैं और उनमें भविष्य में असीमित विस्तार की संभावनाएं मौजूद हैं।
ब्रिक्स और सहयोगी देशों में महिंद्रा का निवेश विवरण
यदि हम ब्रिक्स और अन्य वैश्विक बाजारों में महिंद्रा समूह के आर्थिक निवेश और व्यापारिक गतिविधियों पर नजर डालें, तो आंकड़े इसकी मजबूत पकड़ को दर्शाते हैं
- रूस: हालांकि महिंद्रा ने रूसी बाजार में अभी तक कोई बड़ी उत्पादन इकाई या प्लांट स्थापित नहीं किया है, लेकिन लगभग दो दशक पहले कंपनी ने रूस में अपने लोकप्रिय मॉडल स्कॉर्पियो की असेंबलिंग करने की एक व्यापक योजना तैयार की थी।
- दक्षिण अफ्रीका: महिंद्रा समूह ने दक्षिण अफ्रीकी बाजार में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए लगभग 161 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण निवेश किया है।
- ब्राजील: इस लातिन अमेरिकी देश में महिंद्रा का कारोबार काफी तेजी से बढ़ा है, जहां कंपनी ने करीब 281 करोड़ रुपये की पूंजी निवेश की है।
- इंडोनेशिया: दक्षिण-पूर्वी एशियाई बाजार में कदम बढ़ाते हुए महिंद्रा समूह ने इंडोनेशिया में लगभग 10 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
- यूएई: पश्चिम एशिया के इस प्रमुख व्यापारिक केंद्र में महिंद्रा समूह द्वारा अब तक लगभग 87 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है।
पश्चिमी वित्तीय प्रणाली से मुक्ति और न्यू डेवलपमेंट बैंक मॉडल
रूसी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों को भविष्य की राह दिखाते हुए कहा कि यदि इन उभरती अर्थव्यवस्थाओं को आगे बढ़ना है, तो उन्हें निवेश और आपसी सहयोग के पारंपरिक तरीकों को छोड़कर नए और आधुनिक रास्ते अपनाने होंगे। इस संदर्भ में उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक यानी NDB के मॉडल का विशेष उल्लेख किया। पुतिन के अनुसार, वर्तमान समय में ब्रिक्स की साझा सफलताओं को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए NDB जैसे मजबूत निवेश मंचों की अत्यंत आवश्यकता है। इस बैंक के जरिए सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार, AI के क्षेत्र में तकनीकी आदान-प्रदान, वित्तीय सहायता और व्यावसायिक सहयोग को बेहद सुगम बनाया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह निवेश ढांचा पश्चिमी वित्तीय संस्थानों और प्रणालियों पर ब्रिक्स देशों की निर्भरता को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा, जिससे इन देशों के आपसी संबंध और अधिक मजबूत व आत्मनिर्भर बनेंगे।



















