भारत की मेज़बानी में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन की गतिविधियों के तहत सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों (एफएमसीबीजी) ने एक महत्वपूर्ण बैठक की है। इस उच्चस्तरीय बैठक में ब्रिक्स देशों ने आपस में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने और सीमा पार भुगतान प्रणाली को बेहतर बनाने पर अपनी सहमति जताई है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन सख्त चेतावनियों के बावजूद उठाया गया है, जिनमें उन्होंने अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। ब्रिक्स देशों की इस पहल से एक बार फिर वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में डॉलर पर निर्भरता कम करने को लेकर बहस तेज़ हो गई है।
स्थानीय मुद्रा व्यापार और सीमा पार भुगतान प्रणाली पर सहमति
एफएमसीबीजी की ओर से जारी संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया है कि सदस्य देश कजान और रियो डी जनेरियो सम्मेलनों के घोषणापत्रों में निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इसके तहत एक व्यावहारिक और सुचारू क्रॉस बॉर्डर पेमेंट सिस्टम तैयार करने पर काम किया जा रहा है। बैठक के दौरान ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स (बीपीटीएफ) द्वारा किए गए अध्ययनों की समीक्षा की गई, जिसमें विभिन्न देशों की भुगतान प्रणालियों और मैसेजिंग माध्यमों को एक-दूसरे के अनुकूल बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन और निवेश को उनकी अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में प्रोत्साहित करना है।
मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि वित्तीय एकीकरण की कोई भी योजना सभी देशों पर एक समान रूप से नहीं थोपी जा सकती। प्रत्येक देश की अपनी आर्थिक प्राथमिकताएं और जरूरतें होती हैं, इसलिए एक ऐसा लचीला तंत्र तैयार किया जा रहा है जो सभी के लिए लाभदायक हो। इस पहल से सदस्य देशों को विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के जोखिम से सुरक्षा मिलेगी और क्षेत्रीय व्यापार को गति प्राप्त होगी।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और बीडब्ल्यूआई में सुधार का आह्वान
ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर भी बल दिया है। बैठक में मुख्य रूप से ब्रेटन वुड्स संस्थानों (बीडब्ल्यूआई), विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक में तत्काल सुधार की आवश्यकता दोहराई गई। समूह का मानना है कि इन संस्थानों को अधिक प्रभावी, निष्पक्ष, समावेशी और समकालीन आर्थिक वास्तविकताओं के अनुकूल बनाया जाना बेहद जरूरी है।
इसके साथ ही, एफएमसीबीजी ने आईएमएफ कोटा और शासन सुधारों के संबंध में 'ब्रिक्स रियो डी जनेरियो विजन' की पुष्टि की है। ब्रिक्स नेताओं ने कहा कि कमजोर और विकासशील देशों को प्रभावी वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक मजबूत, कोटा आधारित और पर्याप्त संसाधनों वाले आईएमएफ की आवश्यकता है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरते बाजारों की आवाज को अधिक मजबूती मिलेगी।
न्यू डेवलपमेंट बैंक का दूसरा स्वर्णिम दशक और रणनीतिक भूमिका
न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) के संचालन के दूसरे दशक में प्रवेश करने के अवसर पर ब्रिक्स देशों ने बैंक की बढ़ती भूमिका की सराहना की है। एनडीबी को ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ के देशों में विकास तथा आधुनिकीकरण का एक प्रमुख रणनीतिक कारक माना गया है। बैठक में एनडीबी को सलाह दी गई कि वह स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण का विस्तार करे, वित्तीय संसाधनों के स्रोतों में विविधता लाए और परियोजना-तैयारी सुविधाओं को अधिक मजबूत बनाए।
एनडीबी का उद्देश्य सदस्य देशों में टिकाऊ और समावेशी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। स्थानीय मुद्रा में ऋण देने से विकासशील देशों पर डॉलर के कर्ज का दबाव कम होगा, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ चेतावनियों के बावजूद बढ़ता ब्रिक्स का कदम
ब्रिक्स की इस बैठक में स्थानीय मुद्रा में लेनदेन का मुद्दा उठने से वाशिंगटन के साथ तनाव बढ़ने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व में ब्रिक्स देशों द्वारा डॉलर के विकल्प तलाशने के प्रयासों पर कड़ा ऐतराज जताया था। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा था कि डॉलर को चुनौती देने या उसका विकल्प बनाने की कोशिश करने वाले देशों से आयातित वस्तुओं पर 500 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाया जाएगा।
इस तरह की सख्त चेतावनियों के बावजूद ब्रिक्स देशों का एकजुट होकर अपनी मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का फैसला दर्शाता है कि सदस्य देश वैश्विक वित्तीय संतुलन में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ब्रिक्स देशों की इस लगातार कोशिश से अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच पर डॉलर के एकाधिकार के खिलाफ एक नई रणनीति आकार ले रही है।



















