सिल्वर बाजार में खरीदारों की हल्की वापसी के बावजूद अल्पावधि की तकनीकी स्थिति अभी भी मंदड़ियों के पक्ष में बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की मौजूदा कीमत 0.93% की तेजी के साथ 64.88 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज की गई है, जो इसके पिछले बंद भाव 64.28 डॉलर से अधिक है। हालांकि, आज के सत्र में 62.94 डॉलर के निचले स्तर को छूने के बाद की गई इस रिकवरी के बाद भी यह धातु 'हेड एंड शोल्डर्स' चार्ट पैटर्न की महत्वपूर्ण नेकलाइन से नीचे ही कारोबार कर रही है। यह स्थिति संकेत देती है कि हालिया बाजार सेंटिमेंट काफी हद तक कमजोर बना हुआ है और आगे भी बिकवाली का दबाव हावी रह सकता है।
तकनीकी संकेतकों में कमजोरी और मूविंग एवरेज का प्रभाव
सिल्वर के तकनीकी चार्ट का बारीकी से अध्ययन करने पर पता चलता है कि बाजार में तेजी लाने वाले कारक फिलहाल कमजोर पड़ रहे हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 49 के स्तर पर है, जो कि 50 के न्यूट्रल यानी तटस्थ स्तर से नीचे है। भले ही RSI ऊपर जाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसका 50 से नीचे होना इस बात की पुष्टि करता है कि विक्रेता अभी भी बाजार पर नियंत्रण बनाए हुए हैं। इसके साथ ही, एमएसीडी (MACD) संकेतक भी मंदी का संकेत दे रहा है। वर्तमान में MACD 0.63 पर है, जबकि इसकी सिग्नल लाइन 1.07 पर चल रही है, जिसके कारण हिस्टोग्राम नकारात्मक 0.44 पर आ गया है।
मूविंग एवरेज की बात करें तो बाजार में स्पष्ट रूप से मंदी का दौर दिख रहा है। 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) इस समय 65.07 डॉलर पर है, जबकि 200-दिवसीय EMA 66.14 डॉलर पर बना हुआ है। चार्ट पर 50 EMA का 200 EMA के नीचे होना एक 'डेथ क्रॉस' का निर्माण करता है, जिसे तकनीकी विश्लेषण में दीर्घकालिक मंदी का एक बड़ा संकेत माना जाता है। सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) की स्थिति देखें तो 50-दिवसीय SMA 62.52 डॉलर पर है और 200-दिवसीय SMA 72.21 डॉलर पर मौजूद है। ये सभी स्तर चांदी की कीमतों के लिए ऊपर की ओर बढ़ने में बड़ी बाधा के रूप में काम कर रहे हैं।
तेजी की स्थिति में महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर
अगर आने वाले दिनों में खरीदार बाजार में हावी होते हैं और चांदी की कीमतें 65.00 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर जाती हैं, तो तकनीकी रूप से सुधार के रास्ते खुल सकते हैं। इस तेजी की स्थिति में चांदी का अगला लक्ष्य 20-दिवसीय EMA यानी 65.69 डॉलर और उसके बाद 100-दिवसीय SMA स्तर हो सकता है, जो कि लगभग 66.94 डॉलर के आसपास है। यदि बाजार का रुख और मजबूत होता है, तो सांड (बुल्स) 67.00 डॉलर के अवरोध को पार करने की कोशिश करेंगे। इस बाधा के हटने के बाद कीमतों को 70.00 डॉलर के बड़े मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ बढ़ने में मदद मिलेगी, जिसके बाद अगला प्रमुख प्रतिरोध स्तर 200-दिवसीय SMA यानी 73.05 डॉलर (लाइव तकनीकी गणना में 72.21 डॉलर) पर देखा जा सकता है।
गिरावट की स्थिति में सहारा देने वाले सपोर्ट लेवल्स
दूसरी तरफ, यदि कीमतों पर मंदी का दबाव दोबारा बढ़ता है, तो चांदी के लिए सबसे पहला तात्कालिक समर्थन (सपोर्ट) 64.00 डॉलर के स्तर पर होगा। विक्रेताओं के हावी होने की स्थिति में कीमतें 50-दिवसीय SMA यानी 62.52 डॉलर (या पूर्व के ऐतिहासिक स्तरों के अनुसार 62.55 डॉलर) की ओर फिसल सकती हैं। इस स्तर के टूटने के बाद, 22 जुलाई के उच्चतम स्तर पर बना सपोर्ट यानी 61.01 डॉलर परीक्षण के दायरे में आ जाएगा। अगर मंदी और गहरी होती है, तो चांदी की कीमतें 60.00 डॉलर के अहम स्तर तक नीचे जा सकती हैं। पिछले 52 हफ्तों के दौरान चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है, जहां इसका न्यूनतम स्तर 41.35 डॉलर और उच्चतम स्तर 121.30 डॉलर दर्ज किया गया है।
निवेश माध्यम के रूप में चांदी की बुनियादी भूमिका
सिल्वर एक अत्यंत मूल्यवान धातु है जिसे दुनिया भर के निवेशक काफी पसंद करते हैं। ऐतिहासिक रूप से चांदी का उपयोग धन को सुरक्षित रखने (स्टोर ऑफ वैल्यू) और विनिमय के माध्यम के रूप में किया जाता रहा है। यद्यपि सोने की तुलना में इसे कम तरजीह दी जाती है, लेकिन अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और उच्च मुद्रास्फीति (महंगाई) के दौर में अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए ट्रेडर अक्सर चांदी का रुख करते हैं। निवेशक फिजिकल रूप में चांदी के सिक्के या बार (सिल्वर ब्रिक्स) खरीद सकते हैं, या फिर वे अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) के माध्यम से डिजिटल रूप से व्यापार कर सकते हैं, जो वैश्विक बाजारों में चांदी की लाइव कीमतों को ट्रैक करते हैं।
चांदी की वैश्विक कीमतों को प्रभावित करने वाले बड़े कारक
चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव कई व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक कारकों पर निर्भर करता है। जब भी दुनिया में कोई राजनीतिक अस्थिरता पैदा होती है या बड़ी मंदी की आशंका सताती है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की तरफ भागते हैं, जिससे इसकी कीमतें बढ़ जाती हैं। चूंकि चांदी पर कोई ब्याज (यील्ड) नहीं मिलता, इसलिए केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती किए जाने पर चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर (USD) के उतार-चढ़ाव का भी इस पर सीधा असर पड़ता है क्योंकि वैश्विक बाजारों में चांदी का मूल्य डॉलर में आंका जाता है (XAG/USD)। एक मजबूत अमेरिकी डॉलर चांदी की कीमतों को दबाकर रखता है, जबकि डॉलर के कमजोर होने पर इसकी कीमतों को पंख लग जाते हैं। इसके साथ ही खदानों से होने वाली चांदी की आपूर्ति और रीसाइक्लिंग की दरें भी इसकी उपलब्धता को तय करती हैं।
औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक इंजन की भूमिका
सोने के विपरीत, चांदी का एक बहुत बड़ा हिस्सा औद्योगिक गतिविधियों में इस्तेमाल होता है। बिजली का सबसे अच्छा सुचालक होने के कारण, तांबे और सोने से भी अधिक चालकता होने की वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा (सोलर पैनल) क्षेत्रों में इसकी भारी मांग है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में जब भी औद्योगिक उत्पादन बढ़ता है, तो चांदी की कीमतें ऊपर जाती हैं। अमेरिका, चीन और भारत जैसे देशों की आर्थिक नीतियां और वहां की औद्योगिक गति भी कीमतों को तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र में इसकी खपत बहुत ज्यादा है, जबकि भारत में गहनों और पारंपरिक तौर-तरीकों के कारण चांदी की उपभोक्ता मांग हमेशा मजबूत बनी रहती है।
गोल्ड और सिल्वर का आपसी संबंध
आमतौर पर चांदी की चाल काफी हद तक सोने के नक्शेकदम पर चलती है। जब सोने की कीमतें बढ़ती हैं, तो चांदी भी उसी दिशा में आगे बढ़ती है क्योंकि दोनों की पहचान सुरक्षित निवेश के रूप में है। दोनों धातुओं के बीच के मूल्य अंतर को समझने के लिए गोल्ड/सिल्वर रेशियो (सोने और चांदी का अनुपात) का सहारा लिया जाता है। यह अनुपात दर्शाता है कि एक औंस सोने की कीमत के बराबर पहुंचने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी। निवेशक मानते हैं कि जब यह अनुपात बहुत ऊंचा होता है, तो इसका मतलब है कि चांदी का मूल्य वास्तविक से कम (अंडरवैल्यूड) है या फिर सोने का मूल्य आवश्यकता से अधिक (ओवरवैल्यूड) हो चुका है। इसके विपरीत, इस अनुपात के कम होने पर सोने को चांदी की तुलना में अंडरवैल्यूड माना जाता है।
अन्य मुद्रा और कमोडिटी बाजारों का हाल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में मंदी और महंगाई के आंकड़ों का असर अन्य संपत्तियों पर भी देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD की जोड़ी 0.7100 के मध्य स्तर के पास स्थिर दिखाई दी, जिससे पिछले सत्र की भारी गिरावट पर कुछ विराम लगा। अमेरिकी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) की गर्म रिपोर्ट के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें मजबूत हुईं, जिससे अमेरिकी डॉलर को बल मिला। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के कड़े रुख की उम्मीदों ने इस गिरावट को सीमित रखा। दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी जापानी पीपीआई (PPI) के मजबूत आंकड़ों के बाद 154.00 के आसपास कारोबार कर रही है, जिससे बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा नीतिगत दरों में बदलाव की संभावना बढ़ गई है। इसी बीच, पीली धातु यानी सोना भी अमेरिकी डॉलर के उतार-चढ़ाव के बीच संभलने में कामयाब रहा और वैश्विक बाजार में फिर से 4,440 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा है।



















