अपना खुद का आशियाना तैयार करना हर इंसान का एक बहुत बड़ा सपना होता है, जिसके लिए लोग अपनी जीवनभर की कमाई लगा देते हैं। लेकिन घर की तामीर के दौरान अगर छोटी सी भी कोताही बरत ली जाए, तो आगे चलकर वह बड़ी मुसीबत का सबब बन सकती है। खासकर जब आप 100 गज के सीमित प्लॉट पर मकान बनवा रहे हों, तो जमीन की न नजाकत, स्ट्रक्चर की मजबूती, नक्शे की रूपरेखा और निर्माण सामग्री की क्वालिटी पर बेहद बारीकी से गौर करना जरूरी हो जाता है। उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में एबी कंस्ट्रक्शन से जुड़े सिविल इंजीनियर अजय भदौरिया पिछले करीब 16 सालों से भवन निर्माण के पेशे से जुड़े हुए हैं और इस क्षेत्र में लंबा तजुर्बा रखते हैं।
इंजीनियर अजय भदौरिया का कहना है कि अगर आपका प्लॉट सीधे सड़क के लेवल पर ही मौजूद है, तो हर हाल में पारंपरिक तरीके से बहुत ज्यादा गहरी नींव खोदने की जरूरत महसूस नहीं होती है। आज के दौर की आधुनिक तकनीक में जमीन की मौजूदा स्थिति और आर्किटेक्चरल डिजाइन के हिसाब से एक मजबूत फ्रेम स्ट्रक्चर आसानी से खड़ा किया जा सकता है। सही डिजाइन तैयार करवाने और निर्माण के तय मानकों का पूरी सख्ती से पालन करने से इमारत की ताकत में काफी इजाफा होता है। इसके अलावा भूकंप के तेज झटकों को भी आसानी से झेल सकने वाला एक सुरक्षित और टिकाऊ ढांचा तैयार किया जा सकता है।
घर का काम शुरू करने से पहले एक पेशेवर और अच्छे आर्किटेक्ट से कायदे से नक्शा पास या तैयार करवाना बेहद आवश्यक होता है। निर्माण कार्य के दौरान इस्तेमाल होने वाली बुनियादी चीजें जैसे कि सीमेंट, सरिया, ईंट और अन्य सामग्री की गुणवत्ता से कभी भी किसी भी तरह का समझौता नहीं करना चाहिए। मकान को तामीर कराने के लिए लोग अपनी सुविधा के अनुसार या तो मटेरियल समेत पूरा कॉन्ट्रैक्ट दे सकते हैं या फिर केवल लेबर और मजदूरी के आधार पर काम का ठेका तय कर सकते हैं। हालांकि दोनों ही सूरतों में काम की तमाम शर्तों और सामान की जिम्मेदारी को शुरुआत में ही बिल्कुल साफ कर लेना समझदारी का काम माना जाता है।
अक्सर देखने में आता है कि लोग मकान बनाते वक्त दीवारों की चुनाई, फर्श की डिजाइनिंग और सुंदर सजावट पर तो पूरा ध्यान केंद्रित रखते हैं, लेकिन प्लंबिंग के बेहद अहम काम को पूरी तरह नजरअंदाज कर जाते हैं। जबकि किसी भी इमारत को लंबे वक्त तक मजबूत बनाए रखने और उसकी उम्र बढ़ाने में प्लंबिंग की भूमिका बहुत बड़ी होती है। निर्माण प्रक्रिया के दौरान हमेशा उच्च कोटि के पाइप और अन्य प्लंबिंग फिटिंग का ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही पाइपों की फिटिंग और उनके जोड़ को बिल्कुल सटीक तरीके से लगाया जाना निहायत जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की लीकेज की आशंका न रहे।
अगर अंडरग्राउंड पाइपलाइन में थोड़ी सी भी मामूली लीकेज रह जाती है, तो वह वक्त के साथ-साथ दीवारों और फर्श के भीतर सीलन और नमी पैदा कर देती है। इसकी वजह से दीवारों पर हुआ महंगा पेंट बदरंग होने के साथ-साथ पूरे भवन की आंतरिक संरचना को भी अंदर से कमजोर कर सकता है। यही वजह है कि प्लंबिंग का यह काम हमेशा किसी तजुर्बेकार और कुशल कारीगर से ही करवाना चाहिए। पाइपलाइन फिट करने के बाद उसकी अच्छी तरह से टेस्टिंग की जानी चाहिए और जब पूरी तरह तसल्ली हो जाए, तभी उसे ढका जाना चाहिए ताकि बाद में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इंजीनियर अजय भदौरिया के मुताबिक मकान बनवाना किसी भी इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा निवेश होता है, इसलिए इसमें जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। निर्माण कार्य में हमेशा सही तकनीक का इस्तेमाल और किसी अनुभवी इंजीनियर का मार्गदर्शन बेहद लाजिमी है। मकान का ठोस ढांचा तैयार करवाने के लिए हमेशा एक कुशल इंजीनियर की सलाह लेनी चाहिए ताकि लगभग 1000 स्क्वायर फीट क्षेत्रफल के हिसाब से इंजीनियर एक बेहतरीन भवन का स्ट्रक्चर डिजाइन कर सके। इसी बुनियादी गणित के आधार पर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि 100 गज के प्लॉट पर लगभग 10 लाख रुपये के खर्च में मकान का मजबूत स्ट्रक्चर तैयार किया जा सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक लागत भवन के डिजाइन, निर्माण सामग्री के दाम, मंजिलों की कुल संख्या और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। एक बार जब मकान का यह बुनियादी ढांचा पूरी तरह बनकर तैयार हो जाता है, उसके बाद ही प्लास्टर, फर्श बिछाने, पेंट करने, बिजली की फिटिंग, प्लंबिंग और इंटीरियर डिजाइनिंग जैसे फिनिशिंग के तमाम काम किए जाते हैं।




















