देश के भीतर हवाई संपर्क को नए आयाम देने के लिए उड़ान योजना के दायरे को अब वैश्विक स्तर तक फैलाया जा रहा है। सरकार की ओर से यह तैयारी की जा रही है कि देश के छोटे और मझोले शहरों को सीधे विदेशों तक की कनेक्टिविटी मुहैया कराई जाए। इस पूरी योजना के तहत कुल 44 हवाईअड्डों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाना है, जिसमें चार प्रमुख हब एयरपोर्ट भी शामिल होंगे। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की पहुंच को महानगरों तक सीमित न रखकर देश के टियर टू और टियर थ्री शहरों तक पहुंचाना है ताकि आम जनता को सहूलियत मिल सके।
क्या है हब एंड स्पोक मॉडल और कैसे करेगा काम
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी साझा की कि इस पूरी प्रक्रिया को हब एंड स्पोक मॉडल के नाम से जाना जाता है। इस प्रणाली के तहत छोटे हवाईअड्डों को स्पोक कहा जाता है और बड़े एयरपोर्ट्स को हब माना जाता है। स्पोक यानी छोटे शहरों से यात्री उड़ान भरकर हब एयरपोर्ट पहुंचते हैं और वहां से उन्हें वैश्विक गंतव्यों के लिए सीधी फ्लाइट मिल जाती है। भारत को वैश्विक विमानन केंद्र बनाने की इस महात्वाकांक्षी पहल के जरिए देश के दूरदराज के इलाकों को दुनिया के बाकी हिस्सों से जोड़ने का ताना-बाना बुना जा रहा है।
अमृतसर और वाराणसी से हुई शुरुआत
अमृतसर हवाईअड्डे पर इस मॉडल की शुरुआत से जुड़े एक विशेष कार्यक्रम में नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि इस योजना के अंतर्गत चार हब और चालीस अन्य एयरपोर्ट्स का विकास किया जाएगा। इस बारे में नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यह मॉडल भारत के लिए केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि विमानन संप्रभुता और देश के विकास का एक सुनहरा अवसर है। सरकार की दीर्घकालिक योजनाओं में अगले दस वर्षों के भीतर देश भर में कुल 100 नए हवाईअड्डे और 200 हेलीपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
ईजी कनेक्ट सेवा से सफर हुआ आसान
इस आधुनिक मॉडल के तहत एयर इंडिया ने विशेष रूप से ईजी कनेक्ट उड़ान सेवाएं शुरू की हैं, जिससे महानगरों से दूर रहने वाले यात्रियों को काफी सहूलियत मिलने लगी है। इस व्यवस्था के माध्यम से यात्री अपने शुरुआती डिपार्चर एयरपोर्ट पर ही अपना सामान चेक-इन कर सकते हैं। इसके अलावा, यात्रियों को शुरुआती स्टेशन पर ही वीजा से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करने की सुविधा भी दी जाती है, जिससे उन्हें आगे की यात्रा में किसी भी तरह की अतिरिक्त कागजी कार्रवाई या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। देश में इस तरह की पहली ईजी कनेक्ट सेवा की शुरुआत 25 जून को वाराणसी से की जा चुकी है।
अमृतसर के लिए इनबाउंड उड़ानों की तैयारी
एयर इंडिया की आगामी योजनाओं के मुताबिक, आने वाले दो महीनों के भीतर अमृतसर के लिए इस मॉडल के तहत इनबाउंड अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू कर दी जाएंगी। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अमृतसर आने वाले यात्रियों को अब देश में प्रवेश करने वाले पहले एयरपोर्ट पर आव्रजन जांच और सामान लेने की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। वे सीधे अपने अंतिम गंतव्य अमृतसर में ही इमिग्रेशन क्लियरेंस पूरी करेंगे और वहीं पर अपना सामान भी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे समय की भारी बचत होगी।
मानक संचालन प्रक्रिया लागू करने वाली पहली एयरलाइन
पारंपरिक व्यवस्था में यात्रियों को भारत में उतरते ही पहले एयरपोर्ट पर औपचारिकताएं पूरी करनी होती थीं और फिर घरेलू उड़ान पकड़नी होती थी, लेकिन अब यह बाधा पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। एयर इंडिया ने यह जानकारी दी है कि वह इस हब एंड स्पोक इनबाउंड परिचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी लागू करने वाली देश की पहली विमानन कंपनी बन जाएगी। दिल्ली के रास्ते अमृतसर की यात्रा करने वाले यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय से घरेलू उड़ानों में ट्रांसफर के दौरान अब किसी भी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और उनका यह सफर पूरी तरह निर्बाध रूप से संपन्न हो सकेगा।



















