भारतीय स्मार्टफोन बाजार के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एक दौर ऐसा था जब देश के मोबाइल बाजार पर चीनी कंपनियों का पूरी तरह से दबदबा था। शुरुआत में शाओमी और उसके बाद वीवो ने बाजार के शीर्ष स्थान पर लंबे समय तक कब्जा जमाए रखा और पिछले दस सालों से ये दोनों ब्रांड नंबर एक की पोजीशन पर बने हुए थे। हालांकि अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और चीनी स्मार्टफोन निर्माताओं की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। सितंबर तिमाही के दौरान चीनी स्मार्टफोन्स की शिपमेंट में पिछले 10 सालों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मोबाइल बाजार का विश्लेषण करने वाली संस्था ओम्डिया के अनुसार, जुलाई से सितंबर के बीच शिपमेंट में 26 फीसदी की भारी गिरावट देखने को मिली है।
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट की प्रमुख वजहें
इस रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि फोन्स की कीमतों में लगातार हुई बढ़ोतरी के कारण ग्राहकों ने नए स्मार्टफोन खरीदने से दूरी बना ली। इसके अलावा त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले निर्माताओं की तरफ से भी सप्लाई में कटौती कर दी गई। इन्ही तमाम कारणों की वजह से इस साल की तीसरी तिमाही में कुल शिपमेंट लुढ़ककर 3.58 करोड़ यूनिट्स पर सिमट गई। साल 2016 के बाद से यह तीसरा क्वार्टर है जब शिपमेंट अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस बड़ी गिरावट ने भारतीय बाजार की पूरी रैंकिंग को ही उलट-पुलट कर रख दिया है। अब दक्षिण कोरियाई दिग्गज सैमसंग ने वीवो को पीछे छोड़ते हुए पहला पायदान अपने नाम कर लिया है, जबकि चीनी ब्रांड्स की कुल बाजार हिस्सेदारी एक साल पहले के 75 फीसदी से घटकर अब लगभग 68 फीसदी पर आ गई है।
सैमसंग की शानदार वापसी और वीवो को झटका
दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने इस दौरान कुल 67 लाख फोन्स का शिपमेंट किया और साल 2024 की शुरुआत के बाद पहली बार दोबारा से टॉप पोजीशन हासिल करने में सफलता पाई। कंपनी की किफायती गैलेक्सी A-सीरीज ने इस बिक्री को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही आकर्षक कैशबैक ऑफर्स, एक्सचेंज स्कीम्स और लंबे फाइनेंसिंग प्लांस ने हर बजट के ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित किया। दूसरी तरफ, वीवो का शिपमेंट 34 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 64 लाख यूनिट्स पर आ गया, जो कि शीर्ष पांच कंपनियों में सबसे बड़ी गिरावट है। बार-बार दाम बढ़ने की वजह से रिटेलर्स की इन्वेंट्री प्लानिंग बुरी तरह प्रभावित हुई और एंट्री-लेवल स्मार्टफोन्स की कम उपलब्धता ने कंपनी की स्थिति को काफी कमजोर कर दिया।
शाओमी, ओप्पो और ऐपल का हाल
चीनी स्मार्टफोन निर्माता शाओमी की वह सबसे बड़ी ताकत भी इस दौरान भारी दबाव में आ गई, जिसके लिए वह हमेशा से पहचानी जाती थी। शाओमी को बाजार में कम कीमत पर बेहतरीन फीचर्स देने वाले ब्रांड के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन पार्ट्स की बढ़ती लागत के चलते कंपनी को अब कीमतों और मेमोरी कॉन्फिगरेशन दोनों ही मामलों में समझौता करना पड़ गया है। यही वजह रही कि कंपनी का शिपमेंट 28 फीसदी लुढ़ककर 47 लाख यूनिट्स पर पहुंच गया। एक अन्य चीनी ब्रांड ओप्पो ने 49 लाख यूनिट्स का शिपमेंट दर्ज करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया, हालांकि इसके शिपमेंट में भी 24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इस बीच ऐपल ने 39 लाख आईफोन्स की शिपमेंट के साथ पांचवां स्थान हासिल किया। आईफोन 16 और बेस आईफोन 17 को लेकर ग्राहकों की मजबूत मांग के साथ-साथ भविष्य में कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से पहले स्टॉक जुटाने की कोशिशों ने ऐपल के आंकड़ों को सहारा दिया।
आगे कैसा रहेगा मोबाइल बाजार का भविष्य
ओम्डिया के प्रिंसिपल एनालिस्ट संयम चौरसिया के मुताबिक, कम एक्सक्लूसिव लॉन्च होने, बजट मॉडलों की सीमित उपलब्धता और प्रमोशनल ऑफर्स में आई कमी के कारण ऑनलाइन चैनलों को इस त्योहारी सीजन में मिलने वाला पारंपरिक फायदा नहीं मिल पाया। इस साल दिवाली का त्योहार थोड़ा देर से होने के कारण भी तिमाही के आंकड़ों में यह गिरावट कुछ ज्यादा ही दिखाई दी, क्योंकि त्योहारी सीजन से जुड़ा कुछ ऑफलाइन स्टॉक अक्टूबर के महीने में शिफ्ट हो गया था। ये सारे आंकड़े रिटेलर्स और विक्रेताओं तक पहुंचाई गई सप्लाई को दर्शाते हैं, न कि सीधे ग्राहकों द्वारा की गई खरीदारी को। हालांकि बाजार की यह कमजोरी त्योहारी सीजन के खत्म होने के बाद भी बनी रह सकती है और साल 2027 में भी बाजार में थोड़ी बहुत और सुस्ती देखने को मिल सकती है।






















