टाइल निर्माता वरमोरा ग्रेनिटो लिमिटेड के वित्तीय नतीजों ने शेयर बाजार में कारोबारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के दौरान कंपनी की लाभप्रदता में भारी उछाल दर्ज किया गया, जिसमें सितंबर तिमाही के दमदार प्रदर्शन का सबसे बड़ा योगदान रहा। 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुई छह महीने की इस अवधि में कंपनी का कर पश्चात शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 498 फीसदी बढ़कर 53.7 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी समान अवधि में कंपनी का मुनाफा लगभग 9 करोड़ रुपये रहा था। वहीं, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनी का कुल राजस्व 3.3 फीसदी की बढ़त के साथ 714.2 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
शेयर बाजार में हलचल और दिन का उतार-चढ़ाव
बुधवार 21 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी का शेयर 131.02 रुपये पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र की शुरुआत में शेयर 145 रुपये के स्तर पर खुला था। इसके बाद खरीदारी के सहारे यह दिन के ऊपरी स्तर 146.90 रुपये तक चढ़ा, लेकिन बाद में मुनाफावसूली के कारण फिसलकर 129.90 रुपये के निचले स्तर तक आ गया। वित्त वर्ष की कठिन शुरुआत के बाद कंपनी की वित्तीय सेहत में आए इस बड़े बदलाव ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। साल के शुरुआती महीनों में उत्पादन से जुड़ी बाधाओं और महंगे ईंधन की मार ने पूरे सिरेमिक उद्योग को गहरे दबाव में डाल दिया था।
सितंबर तिमाही में दर्ज की गई 206 फीसदी की शुद्ध वृद्धि
कंपनी की पहली छमाही की मजबूत कमाई की मुख्य आधारशिला सितंबर में समाप्त दूसरी तिमाही साबित हुई। इस तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व 399 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के 366 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 9 फीसदी अधिक है। लाभ के मोर्चे पर यह उछाल और भी तेज रहा। सितंबर तिमाही में शुद्ध लाभ 44 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि बीते वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह आंकड़ा 14.4 करोड़ रुपये था। इस तरह तिमाही शुद्ध लाभ में तकरीबन 206 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जून तिमाही के मुकाबले चौगुना हुआ मुनाफा
सितंबर तिमाही के आंकड़े जून तिमाही के मुकाबले एक बड़े बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं। जून में समाप्त पहली तिमाही में कंपनी का राजस्व 315.3 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 9.7 करोड़ रुपये रहा था। जून तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही का राजस्व क्रमिक रूप से करीब 27 फीसदी बढ़ गया। वहीं, अगर तिमाही शुद्ध लाभ की बात करें तो यह जून तिमाही के स्तर से चार गुना से भी अधिक हो गया। इस तेज सुधार ने पहली छमाही के कुल शुद्ध लाभ को 53.7 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
मोरबी में गैस संकट और शुरुआती बाधाएं
गुजरात का मोरबी क्षेत्र देश का प्रमुख सिरेमिक विनिर्माण केंद्र माना जाता है। पश्चिम एशिया में उपजे तनाव और संघर्ष के कारण प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था, जिसका सीधा असर यहां के कारखानों पर पड़ा। ईंधन की बढ़ती लागत और सप्लाई की समस्याओं के चलते मार्च की शुरुआत से अप्रैल के मध्य तक कई विनिर्माण इकाइयां पूरी तरह बंद रहीं। इस बंदी ने उत्पादन और बाजार में आपूर्ति दोनों को भारी झटका दिया था।
इन गंभीर व्यवधानों के चलते वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वरमोरा ग्रेनिटो का राजस्व सालाना आधार पर 2.9 फीसदी गिरकर 315.3 करोड़ रुपये रह गया था। हालांकि, कारखानों के दोबारा शुरू होने और सितंबर तिमाही में विनिर्माण व बिक्री की गति तेज होने से कंपनी की कमाई की रफ्तार पटरी पर लौट सकी।
प्रीमियम टाइल्स और भविष्य के प्रमुख कारक
सिरेमिक और टाइल उद्योग में उत्पादन क्षमता का उपयोग, ईंधन की कीमतें और उत्पादों की मूल्य निर्धारण शक्ति मुनाफे को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। जब कारखाने बिना किसी रुकावट के लगातार चलते हैं, तो स्थिर लागत अधिक उत्पादन मात्रा में बंट जाती है, जिससे मार्जिन में सुधार होता है। आगे चलकर इस तेजी की निरंतरता बाजार में मांग, कच्चे माल व ईंधन की लागत और आगामी तिमाहियों में अपने मार्जिन को बनाए रखने की कंपनी की क्षमता पर निर्भर करेगी।
निवेशकों के नजरिए से कंपनी का उत्पाद पोर्टफोलियो भी काफी अहम बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनी के कुल राजस्व का 87 फीसदी हिस्सा प्रीमियम टाइल्स की बिक्री से आया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि उच्च मूल्य वाले उत्पादों की मांग और बिक्री कंपनी के समूचे कारोबारी मॉडल के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।



















