भारतीय स्मार्टफोन बाजार के लिए त्योहारी सीजन की शुरुआत बेहद सुस्त रही है। बाजार विश्लेषण फर्म ओम्डिया के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में देश भर में मोबाइल फोन की कुल बिक्री में 26 प्रतिशत की भारी वार्षिक गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान कुल बिक्री का आंकड़ा सिमटकर 3.58 करोड़ यूनिट पर आ गया। यह आंकड़ा पिछले एक दशक में किसी भी तीसरी तिमाही के दौरान दर्ज की गई सबसे कमजोर बिक्री को दर्शाता है, क्योंकि वर्ष 2016 के बाद से अब तक इस तिमाही में कभी भी इतनी कम खरीदारी नहीं देखी गई थी।
शीर्ष पर सैमसंग की वापसी और चीनी ब्रांड्स की स्थिति
बाजार में आई इस व्यापक सुस्ती के बीच दक्षिण कोरियाई तकनीकी कंपनी सैमसंग ने एक बार फिर पहला स्थान अपने नाम कर लिया है। जुलाई से सितंबर की अवधि के दौरान सैमसंग ने लगभग 67 लाख स्मार्टफोन बेचे। हालांकि पिछले साल की तुलना में कंपनी की बिक्री में लगभग 1 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई, लेकिन 19 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ कंपनी शीर्ष पर बनी रही। सैमसंग ने इस तिमाही में अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रखने में कामयाबी पाई है।
दूसरी ओर, चीनी स्मार्टफोन निर्माता वीवो 64 लाख फोन की बिक्री के साथ बाजार में दूसरे स्थान पर रहा। शीर्ष पांच की सूची में शामिल अन्य प्रमुख ब्रांडों को भारी गिरावट का सामना करना पड़ा है। ओप्पो की बिक्री में 24 प्रतिशत की गिरावट आई और उसने इस दौरान 49 लाख स्मार्टफोन बेचे। वहीं, शाओमी की बिक्री में 28 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते वह केवल 47 लाख मोबाइल ही बाजार में भेज पाया।
प्रीमियम सेगमेंट में एप्पल की चाल और पांचवां स्थान
प्रीमियम फोन बाजार पर राज करने वाले एप्पल को भी इस तिमाही में गिरावट का झटका लगा है। कंपनी की बिक्री में पिछले साल की तुलना में 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके बावजूद कंपनी शीर्ष पांच स्मार्टफोन निर्माताओं में अपनी जगह बनाए रखने में सफल रही। इस अवधि के दौरान एप्पल ने देश में कुल 39 लाख आईफोन बेचे। आमतौर पर त्योहारी सीजन से पहले प्रीमियम ब्रांडों की मांग मजबूत रहती है, लेकिन इस बार प्रीमियम वर्ग में भी सुस्ती का असर स्पष्ट रूप से देखा गया है।
पारंपरिक त्योहारी तेजी गायब होने की मुख्य वजहें
आमतौर पर सितंबर का महीना भारत में बड़े ऑनलाइन शॉपिंग आयोजनों के लिए इन्वेंट्री तैयार करने का सबसे अहम वक्त माना जाता है। इसी दौरान ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भारी मांग की उम्मीद में कंपनियां भारी मात्रा में फोन भेजती हैं। ओम्डिया के मुख्य विश्लेषक संयम चौरसिया के अनुसार, इस बार बिक्री की गति काफी कमजोर साबित हुई है। इस सुस्ती के पीछे मुख्य रूप से ऑनलाइन माध्यमों पर खास तौर पर पेश किए जाने वाले नए हैंडसेट मॉडलों की कमी रही है।
इसके अलावा किफायती और बजट सेगमेंट में नए विकल्पों की सीमित उपलब्धता ने भी आम ग्राहकों को खरीदारी से दूर रखा। विश्लेषक के मुताबिक, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों पर दी जा रही प्रचार योजनाओं और छूट के बीच का फासला कम हो गया है। पहले ऑनलाइन बिक्री के दौरान मिलने वाले बेहद खास ऑफर्स ग्राहकों को बड़े पैमाने पर आकर्षित करते थे, लेकिन अब योजनाओं के बीच अंतर घटने से इंटरनेट के जरिए होने वाली बिक्री को मिलने वाला पारंपरिक त्योहारी फायदा काफी हद तक कमजोर पड़ गया।













