राजधानी दिल्ली स्थित यशोभूमि में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सेमीकॉन इंडिया 2026 संपन्न हो गया है। इस भव्य सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, जिसका मुख्य केंद्रीय विषय 'सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम' निर्धारित किया गया था। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर दुनिया भर के 52 देशों के प्रतिनिधियों और 600 से अधिक कंपनियों के नीति-निर्माताओं ने एक साथ शिरकत की। सम्मेलन में वैश्विक तकनीकी सहयोग को दर्शाने के लिए जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन जैसे प्रमुख देशों ने अपने विशेष देश-पवेलियन स्थापित किए थे।
डिजाइनिंग के साथ उत्पादन में छलांग
सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वैश्विक मंच पर भारत की बदलती तकनीकी स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि भारत अब केवल सेमीकंडक्टर चिप्स की डिजाइनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विश्व बाजार की जरूरतों के लिए वास्तविक चिप उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी भी साझा की कि इस समय देश भर में कुल 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं पर सक्रिय रूप से कार्य चल रहा है। इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में 1 लाख करोड़ रुपये का भारी पूंजी निवेश किया गया है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर एक मजबूत विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
वैश्विक चिप उद्योग को मिले तीन अहम संकेत
इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मंच से संपूर्ण वैश्विक तकनीकी बाजार को तीन अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत प्राप्त हुए हैं। सबसे पहला और प्रमुख संकेत यह है कि सेमीकंडक्टर उत्पादन से जुड़े व्यापक तंत्र जैसे मशीनरी, कच्चा माल, टेस्टिंग प्रक्रिया और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की व्यापक उपस्थिति दर्ज की गई। भारत के भीतर एक सुदृढ़ विनिर्माण तंत्र स्थापित करने को लेकर इन विदेशी उद्यमों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि वैश्विक उद्योगपतियों के बीच भारतीय तकनीकी प्रतिभा सबसे बड़ा आकर्षण बनकर उभरी। दुनिया भर के बाजारों के लिए अत्याधुनिक समाधान तैयार करने के उद्देश्य से कई दिग्गज कंपनियां भारत में ही अनुसंधान एवं विकास यानी R&D क्षमताएं स्थापित करने और उनके विस्तार पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।
भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स पर दुनिया की नजर
तीसरा बड़ा संकेत वैश्विक पूंजी निवेश और विलय-अधिग्रहण से जुड़ा हुआ सामने आया। इन्फिनियन, NXP और टेराडाइन जैसी बहुराष्ट्रीय दिग्गज कंपनियों ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वे भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स के नवाचारों पर अत्यंत बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। इन वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भारतीय उद्यमियों द्वारा विकसित किए जा रहे तकनीकी समाधानों की सराहना की और कहा कि वे यहां निवेश के नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर कई कंपनियां आशाजनक भारतीय स्टार्टअप्स का पूर्ण अधिग्रहण करने के लिए भी तैयार हैं।
उभरती प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व की तैयारी
उद्योग जगत के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) के साथ आयोजित विशेष गोलमेज बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट आह्वान किया था कि भारत को दुनिया भर में नई उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अग्रणी वैश्विक लीडर बनकर सामने आना होगा। यह सम्मेलन उसी राष्ट्रीय संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में एक ठोस कदम बनकर उभरा है, जिसे सरकार की तकनीकी और प्रशासनिक टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने में जुटी है।


















