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खेत की मेड़ पर थाई एप्पल लगाकर बढ़ाएं मुनाफा, पारंपरिक फसलों के साथ खाली जमीन बनेगी कमाई का जरियाव्यापार
19 सित॰ 2026, 7:34 pm (19 मिनट पहले)· 0

खेत की मेड़ पर थाई एप्पल लगाकर बढ़ाएं मुनाफा, पारंपरिक फसलों के साथ खाली जमीन बनेगी कमाई का जरिया

गेहूं, बाजरा या सरसों जैसी मुख्य फसलें छोड़े बिना किसान खेत की खाली मेड़ों पर थाई एप्पल के पौधे लगाकर अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं। छह महीने में फल देने वाले इस पौधे से स्थानीय मंडियों में लगभग 25 रुपये प्रति किलो तक का थोक भाव मिल सकता है।

खेती की बढ़ती लागत के दौर में अपनी नियमित उपज के साथ बागवानी जोड़ना किसानों के लिए आर्थिक मजबूती का बड़ा जरिया बन रहा है। अक्सर खेतों के किनारे, मेड़ और कुछ ऐसे कोने खाली छूट जाते हैं जहां ट्रैक्टर या हल से सामान्य जुताई संभव नहीं होती। ऐसी अप्रयुक्त जमीन पर थाई एप्पल के फलदार पौधे लगाकर किसान बिना किसी अतिरिक्त जमीन के अपनी कुल आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं। यह मॉडल पारंपरिक खेती के ढांचे को बिल्कुल छेड़े बिना खेत के हर हिस्से से पैदावार लेने की दिशा में बेहद व्यावहारिक साबित हो रहा है।

थाईलैंड से भारत के खेतों तक का सफर

थाई एप्पल मूल रूप से थाईलैंड का फल है, लेकिन बदलते कृषि प्रयोगों के चलते अब भारत के तमाम इलाकों में किसान इसे सफलता से उगा रहे हैं। भारतीय जलवायु में इसकी अनुकूलता और कम जगह में भरपूर फल देने की क्षमता के कारण बागवानी विशेषज्ञों के बीच यह काफी लोकप्रिय हो रहा है। जो किसान अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं, उनके लिए यह किस्म खेती के साथ फल उत्पादन का दोहरा लाभ उठाने का आसान रास्ता खोलती है।

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पारंपरिक फसलों को हटाने की जरूरत नहीं

इस कृषि मॉडल की सबसे व्यावहारिक खूबी यह है कि किसान को गेहूं, बाजरा, चना या सरसों जैसी अपनी मुख्य फसलों का रकबा कम नहीं करना पड़ता। मुख्य जमीन पर रबी और खरीफ की सामान्य फसलें जस की तस चलती रहती हैं, जबकि खेत की बाहरी मेड़ों पर कतारबद्ध तरीके से लगाए गए पौधे धीरे-धीरे मजबूत पेड़ों का रूप ले लेते हैं। इस तरह एक ही खेत से अनाज और फल दोनों की पैदावार एक साथ हासिल होती है, जिससे भूमि की समग्र उत्पादकता में जबरदस्त इजाफा दर्ज किया जाता है।

देखभाल, सिंचाई और छह महीने में पहली उपज

थाई एप्पल के पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित सार-संभाल करना जरूरी होता है ताकि वे स्वस्थ पेड़ के रूप में तेजी से पनप सकें। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक रोपाई के लगभग छह महीने बाद ही इसके पौधे फल देना शुरू कर देते हैं, जो किसानों के लिए शुरुआती स्तर पर ही आय की उम्मीद जगाता है। जैसे-जैसे पेड़ बड़ा और परिपक्व होता है, प्रति पेड़ फलों का कुल उत्पादन भी लगातार बढ़ता जाता है।

इसकी खेती की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें जैविक और देशी खाद का भरपूर इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे लागत नियंत्रण में रहती है। इसके अलावा, आम फलदार वृक्षों की तुलना में थाई एप्पल को पानी की भी अपेक्षाकृत काफी कम आवश्यकता होती है। यह पौधा दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता रखता है, यानी एक बार पेड़ तैयार हो जाने के बाद किसान आने वाले कई वर्षों तक लगातार फलों की तुड़ाई कर सकते हैं।

मंडी भाव और बाजार की स्थिति

थाई एप्पल की बाजार में मांग और मिलने वाली कीमतें अलग-अलग क्षेत्रों और स्थानीय मंडियों के हिसाब से घट-बढ़ सकती हैं। कुछ व्यापारिक केंद्रों पर इसका थोक भाव लगभग 25 रुपये प्रति किलो तक दर्ज किया गया है। कृषि जानकारों का सुझाव है कि बड़े पैमाने पर रोपाई करने से पहले किसानों को अपने नजदीकी बाजार और थोक मंडियों में जाकर थाई एप्पल की स्थानीय मांग, बिक्री के माध्यमों और वास्तविक थोक दरों की पड़ताल अवश्य कर लेनी चाहिए ताकि उपज तैयार होने पर उसे बेचने में कोई अड़चन न आए।

जमीन के बेहतर प्रबंधन से बढ़ेगा कुल मुनाफा

अनाज की खेती के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि एक पूरक फसल के रूप में थाई एप्पल को अपनाना समझदारी भरा कदम है। अनुपयोगी पड़ी किनारों की जमीन का योजनाबद्ध इस्तेमाल कर किसान अपने खेत के हर हिस्से को कमाई से जोड़ सकते हैं। यह तरीका छोटे और मझोले किसानों के लिए जोखिम घटाने और घरेलू आय को सालाना स्तर पर स्थिर करने का एक असरदार उपाय बनकर उभरा है।

सवाल-जवाब

थाई एप्पल के पौधे खेत में कहां लगाए जा सकते हैं?
इन्हें खेत की मेड़, किनारों की खाली जमीन और ऐसे अप्रयुक्त हिस्सों में लगाया जा सकता है जहां नियमित जुताई नहीं होती।
क्या थाई एप्पल लगाने के लिए पारंपरिक फसलें छोड़नी पड़ेंगी?
नहीं, किसान गेहूं, बाजरा, चना या सरसों जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ मेड़ों पर इसे उगा सकते हैं।
पौधा लगाने के कितने समय बाद फल आने लगते हैं?
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक थाई एप्पल के पौधे रोपने के लगभग छह महीने बाद फल देना शुरू कर देते हैं।
इसकी खेती में किस तरह की खाद और पानी की जरूरत होती है?
इसमें जैविक और देशी खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है और इसे पानी की भी अपेक्षाकृत कम आवश्यकता होती है।
थाई एप्पल का बाजार में क्या थोक भाव मिल सकता है?
कुछ स्थानों पर इसका थोक भाव लगभग 25 रुपये प्रति किलो तक दर्ज किया गया है, हालांकि यह स्थानीय मंडी की मांग पर निर्भर करता है।
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