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उत्तराखंड में रक्षाबंधन से पहले महंगाई की मार, सत्तर रुपये किलो हुई चीनी और बढ़े मिठाइयों के दामव्यापार
24 अग॰ 2026, 5:05 pm (5 घंटे पहले)· 0

उत्तराखंड में रक्षाबंधन से पहले महंगाई की मार, सत्तर रुपये किलो हुई चीनी और बढ़े मिठाइयों के दाम

रक्षाबंधन से पहले देहरादून में चीनी के दाम अड़तालीस रुपये से उछलकर सत्तर रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जिससे आम जनता और मिठाई कारोबारियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

रक्षाबंधन के पावन पर्व से ठीक पहले रसोई के मोर्चे पर आम जनता को तगड़ा झटका लगा है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पिछले डेढ़ महीने के भीतर चीनी के दाम आसमान छूने लगे हैं और जो चीनी पहले अड़तालीस रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वह अब सीधे सत्तर रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रही है। बाजार के जानकारों के अनुसार चीनी की कीमतों में करीब तीस से पैंतीस प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस अचानक आए उछाल ने न केवल आम परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है, बल्कि त्योहार के इस सीजन में मिठाई का व्यवसाय करने वाले दुकानदारों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।

त्योहारों के इस समय में मांग में अचानक तेजी आती है, लेकिन इसी दौरान कच्चे माल की उपलब्धता में कमी और मौसम से जुड़ी कुछ परेशानियों को इन बढ़ते दामों का मुख्य कारण बताया जा रहा है। स्थिति यह हो गई है कि केवल चीनी ही नहीं, बल्कि रसोई में इस्तेमाल होने वाले अन्य जरूरी सामान जैसे आटा, खाने का तेल, रिफाइंड और घी के दाम भी लगातार ऊपर जा रहे हैं। इन सभी चीजों के महंगे होने से हलवाइयों और मिठाई कारोबारियों की कुल लागत में भारी इजाफा हो रहा है, जिसका सीधा असर अब दुकानों पर बिकने वाली मिठाइयों के खुदरा मूल्यों पर साफ देखा जा सकता है।

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उत्तराखंड में बढ़ी लागत से मिठाई कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें

देहरादून के स्थानीय हलवाई अरुण कुमार गोयल का कहना है कि साल भर में त्योहारों और शादियों के सीजन ही ऐसे मौके होते हैं जब मिठाई का कारोबार सबसे ज्यादा होता है, लेकिन वर्तमान हालात में कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण दुकान चलाना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने बताया कि इस संकट से पहले जब रसोई गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए थे, तब उन्होंने ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ न डालते हुए मिठाइयों की कीमतों को स्थिर रखने की पूरी कोशिश की थी। हालांकि अब जब चीनी के साथ-साथ रिफाइंड, वनस्पति घी और शुद्ध देसी घी जैसी बुनियादी चीजें भी काफी महंगी हो गई हैं, तो दुकानदारों के लिए अपने खर्चों की भरपाई करना असंभव सा हो गया है।

बढ़ी हुई लागत के इस दबाव के चलते दुकानदारों ने आखिरकार हर तरह की मिठाई के दाम में चालीस रुपये तक की सीधी बढ़ोतरी कर दी है। इन नई कीमतों को तीस अगस्त से आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया गया है। कारोबारियों का यह भी कहना है कि फिलहाल ग्राहकों की तरफ से बहुत ज्यादा विरोध देखने को नहीं मिला है, क्योंकि लोग खुद बढ़ती महंगाई से वाकिफ हैं, लेकिन दुकानदारों के मन में भविष्य को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है कि अगर दाम और बढ़े तो ग्राहक कैसे टिकेंगे।

बाजार में कम हुई खरीदारी और रसोई का बिगड़ा बजट

बढ़ती महंगाई का यह असर सीधे तौर पर आम नागरिकों की क्रय शक्ति पर पड़ रहा है। देहरादून के एक अन्य स्थानीय निवासी मुकेश गुप्ता ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि दैनिक उपभोग की लगभग हर जरूरी चीज दिन-प्रतिदिन महंगी होती जा रही है। दाल, आटा, हरी सब्जियां और सरसों के तेल के बाद अब चीनी के भाव में आई इस तेजी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। उन्होंने एक वाकया साझा किया कि वह बाजार में दो किलो चीनी खरीदने की नीयत से घर से निकले थे, लेकिन जब दुकान पर सत्तर रुपये किलो का भाव सुना, तो वे केवल ढाई सौ ग्राम चीनी खरीदकर ही वापस लौटने को मजबूर हो गए।

मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए इस प्रकार की मूल्यवृद्धि के दौर में घर की गृहस्थी चलाना और बच्चों का खर्च संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। मुकेश गुप्ता ने केवल चीनी ही नहीं बल्कि रसोई में पकने वाली सब्जियों के लगातार बढ़ते दामों को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि यदि जरूरी चीजों के दाम इसी रफ्तार से बढ़ते रहे, तो आने वाले दिनों में आम परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना और घर का आर्थिक संतुलन बनाए रखना लगभग असंभव हो जाएगा।

सवाल-जवाब

देहरादून में चीनी के दाम कितने से बढ़कर कितने हो गए हैं?
देहरादून में चीनी के दाम अड़तालीस रुपये प्रति किलो से बढ़कर सत्तर रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
चीनी और अन्य चीजों के दाम बढ़ने से मिठाइयों पर कितना असर पड़ा है?
लागत बढ़ने के कारण दुकानदारों ने हर मिठाई के दाम में चालीस रुपये तक की बढ़ोतरी की है।
नई कीमतें कब से लागू की गई हैं?
मिठाइयों और अन्य जरूरी सामान की नई कीमतें तीस अगस्त से लागू कर दी गई हैं।
आम आदमी की खरीदारी पर इस महंगाई का क्या असर दिखा है?
महंगाई के कारण लोग दो किलो की बजाय केवल ढाई सौ ग्राम चीनी खरीदने को मजबूर हो गए हैं।
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