त्योहारी सीजन में गहनों और धातुओं की पारंपरिक खरीदारी से ठीक पहले बहुमूल्य धातुओं के घरेलू तथा वैश्विक बाजारों में नरमी का रुख बना हुआ है। घरेलू कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर 29 अक्टूबर तक पीली धातु का स्तर 1.43 लाख रुपये के दायरे में दर्ज किया गया, जबकि सफेद धातु का भाव 2 लाख रुपये के मनोवैज्ञानिक आंकड़े से नीचे लुढ़क चुका है। इस तेज गिरावट ने त्योहार पर खरीदारी की योजना बना रहे आम उपभोक्ताओं और बाजार में पूंजी लगाने वाले निवेशकों के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मौजूदा स्तर पर एंट्री लेना मुनाफे का सौदा होगा या कीमतों में और ज्यादा सुधार आने की प्रतीक्षा करनी चाहिए।
बाजार में मौजूदा सुस्ती और लंबी अवधि की संभावनाएं
कीमती धातुओं के वर्तमान व्यापारिक परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए ब्लू एस्टर कैपिटल और क्रेबाको ग्लोबल के संस्थापक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं फंड मैनेजर सिद्धार्थ सोगानी जैन ने स्पष्ट किया है कि लंबी समयावधि के लिहाज से इन धातुओं का बुनियादी ढांचा सकारात्मक बना हुआ है, मगर आगामी कुछ महीनों के दौरान दरों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विदेशी बाजारों में सोने का सौदा लगभग 4,085 डॉलर प्रति औंस पर देखा जा रहा है, वहीं चांदी करीब 60 डॉलर प्रति औंस के आसपास हाथ बदल रही है। ऐसे माहौल में विशेषज्ञों का मानना है कि समूची पूंजी एक ही झटके में झोंकने के बजाय किस्तों में खरीदारी की रणनीति अपनाना अधिक बुद्धिमानी भरा कदम होगा, जिसके साथ कुछ अतिरिक्त नकदी हाथ में बचाकर रखना भी जरूरी है।
वैश्विक संस्थाओं के अनुमान और बाजार के बड़े लक्ष्य
हालिया गिरावट के दौर के बावजूद वैश्विक स्तर पर भविष्य की कीमतों को लेकर उम्मीदें पूरी तरह बरकरार हैं। लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन यानी एलबीएमए द्वारा जारी 12 महीने के दृष्टिकोण में पीली धातु के 5,013 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंचने की संभावना जताई गई है, जबकि इसी अवधि में चांदी का भाव 94.70 डॉलर प्रति औंस तक जाने का आकलन पेश किया गया है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक इन आकलनों को अंतिम गारंटी मानने की भूल नहीं की जानी चाहिए। आने वाले महीनों में विभिन्न केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियां, मुद्रास्फीति के आंकड़े, अमेरिकी डॉलर सूचकांक की दिशा और व्यापक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम इन दोनों धातुओं के उतार-चढ़ाव को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेंगे। नतीजतन, केवल हाल की कीमतों में आई नरमी को आधार बनाकर आनन-फानन में बड़ा पूंजी आवंटन करना नुकसानदेह साबित हो सकता है।
चांदी की चाल में बढ़ता उतार-चढ़ाव और जोखिम प्रबंधन
सोने की तुलना में सफेद धातु के व्यवहार में कहीं अधिक तीखा उतार-चढ़ाव दर्ज किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चांदी जनवरी के दौरान 121.60 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक उच्च स्तर को छू चुकी थी, किंतु वहां से भारी मुनाफावसूली के चलते वर्तमान में यह लुढ़ककर करीब 60 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ टिकी है। वित्तीय सेवा फर्म यूबीएस के एक आकलन के अनुसार, दिसंबर 2026 तक सफेद धातु 70 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े को छू सकती है।
यह विश्लेषण संकेत देता है कि चांदी में आगे चलकर ठोस वापसी की पूरी गुंजाइश मौजूद है, लेकिन साथ ही इसमें अस्थिरता का जोखिम भी कई गुना ज्यादा है। ऐसे सभी निवेशकों को, जिन्हें निकट भविष्य में आकस्मिक तरलता अथवा धन की आवश्यकता पड़ सकती है, सफेद धातु में बहुत बड़ा दांव लगाने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
ब्याज दर चक्र और वैश्विक आर्थिक पैमानों का असर
कीमती धातुओं की दिशा तय करने में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। जब कभी अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचे पायदान पर बनाए रखता है या उनमें वृद्धि का सिलसिला जारी रखता है, तब बिना किसी निश्चित ब्याज अथवा आवर्ती आय वाली परिसंपत्तियों जैसे सोने और चांदी पर सीधा दबाव बनता है।
इसके समानांतर कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय दरें, मुद्रास्फीति का रुख, अमेरिका के वृहद आर्थिक आंकड़े, प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियों के तिमाही वित्तीय परिणाम और जटिल भू-राजनीतिक कारक भी बाजार की स्थिरता को चुनौती देते हैं। यदि इक्विटी बाजारों में बड़ी बिकवाली या तेज गिरावट गहराती है, तो नकदी की तत्काल जरूरतें पूरी करने के लिए निवेशक प्रायः अपने अन्य लाभदायक सौदे काटते हैं। ऐसे असामान्य परिदृश्यों में पारंपरिक रूप से सुरक्षित माने जाने वाले सोने और चांदी में भी अस्थायी तौर पर तेज गिरावट देखी जा सकती है।
पोर्टफोलियो आवंटन और त्योहारी खरीदारी की रणनीति
संपत्ति संतुलन के बुनियादी सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए सिद्धार्थ सोगानी जैन का सुझाव है कि प्रत्येक निवेशक को अपने पोर्टफोलियो को विभिन्न वित्तीय साधनों में संतुलित रखना चाहिए। एक स्वस्थ परिसंपत्ति आवंटन में मजबूत कंपनियों के इक्विटी शेयर्स, सुरक्षित फिक्स्ड इनकम बॉन्ड और सोने का उचित मिश्रण होना अनिवार्य है। उनके दृष्टिकोण से संपूर्ण पोर्टफोलियो का करीब 5 से 10 फीसदी हिस्सा सोने के लिए आवंटित करना एक संतुलित विकल्प साबित हो सकता है, जबकि चांदी को अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाली कमोडिटी मानते हुए इसका हिस्सा बेहद सीमित रखना ही समझदारी है।
त्योहारी अवसर पर यदि धातुओं की खरीद करनी ही है, तो एकमुश्त सौदा करने के बजाय विभिन्न कारोबारी सत्रों में थोड़ा-थोड़ा संचय करना चाहिए। इस विधि से किसी खास दिन की सबसे ऊंची कीमत पर फंसने का अंदेशा समाप्त हो जाता है। इसके अतिरिक्त, पर्याप्त नकदी अपने पास सुरक्षित रखना अनिवार्य है, ताकि बाजार में अप्रत्याशित गिरावट की स्थिति में रोजमर्रा की वित्तीय आवश्यकताओं के लिए किसी भी लाभदायक या रणनीतिक निवेश को औने-पौने दाम पर बेचने का दबाव न झेलना पड़े।


















