ओडिशा के तटीय जिलों के बीच यात्रा और माल परिवहन को तेज बनाने के उद्देश्य से रामेश्वर से पारादीप बंदरगाह के बीच एक नया राजमार्ग ढांचा तैयार किया जा रहा है। 160.18 किलोमीटर लंबाई वाले इस आधुनिक गलियारे पर करीब ₹8,301 करोड़ की पूंजीगत लागत आने का खाका खींचा गया है। इस निर्माण से खुरदा, पुरी, केंद्रापड़ा और जगतसिंहपुर जैसे प्रमुख जिलों के बीच का आवागमन सुगम होगा, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के जरिए भुवनेश्वर तथा कटक के बाजारों को भी एक सीधा और बाधा-मुक्त परिवहन विकल्प हासिल हो सकेगा।
दो निर्माण चरणों में बंटा 160 किलोमीटर का गलियारा
इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को सुचारू निष्पादन के लिए दो स्वतंत्र निर्माण पैकेजों में विभाजित किया गया है। प्रथम पैकेज की कुल लंबाई 79.40 किलोमीटर तय की गई है, जिसके भीतर 76.84 किलोमीटर का बिल्कुल नया ग्रीनफील्ड संरेखण विकसित होगा। केवल इस पहले पैकेज पर ₹5,305 करोड़ का अनुमानित पूंजीगत खर्च निर्धारित है।
परियोजना का दूसरा चरण 80.78 किलोमीटर लंबे मार्ग को कवर करेगा, जिस पर लगभग ₹2,996 करोड़ की लागत आने की उम्मीद है। इन दोनों चरणों के संयुक्त बजट को मिलाकर पूरी परियोजना का वित्तीय आकार ₹8,301 करोड़ बैठता है। निर्माणकर्ता कंपनियों को निर्माण, परिचालन तथा सड़क के रख-रखाव के लिए दोनों पैकेजों में करीब 17.5 साल की रियायत अवधि सौंपी जाएगी।
अलग-अलग हिस्सों में चार लेन और दो लेन की रूपरेखा
ट्रैफिक के अनुमानित दबाव और स्थानीय आवाजाही की प्रकृति को ध्यान में रखकर इस हाईवे की चौड़ाई दो भिन्न स्वरूपों में रखी गई है। रामेश्वर से कोणार्क के मध्य का पूरा स्ट्रेच चार लेन चौड़ा निर्मित होगा, क्योंकि इस खंड पर तीर्थयात्रियों और भारी वाहनों का सघन दबाव रहता है। इसके उलट, कोणार्क से पारादीप बंदरगाह तक के हिस्से को पक्के शोल्डर के साथ दो लेन मार्ग के तौर पर तैयार किया जाएगा।
इंजीनियरिंग मानकों के तहत पूरे 160.18 किलोमीटर के रास्ते को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम डिजाइन गति के अनुकूल विकसित करने की योजना है। इस व्यवस्था से रामेश्वर और पारादीप के बीच यात्रा के मौजूदा समय में सीधे ढाई घंटे की बचत दर्ज की जाएगी। घुमावदार और संकरे रास्तों के बजाय सीधा मार्ग मिलने से भारी ट्रकों तथा कमर्शियल वाहनों के परिचालन खर्च और डीजल खपत में भी उल्लेखनीय कमी आ सकेगी।
नौ आर्थिक केंद्रों और पांच लॉजिस्टिक्स हब को गति
यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के विजन के अनुरूप तैयार की गई है, जिसका केंद्रीय उद्देश्य देश के बड़े उत्पादन केंद्रों को सीधे बंदरगाहों से लिंक करना है। इस नए गलियारे के रास्ते में कुल नौ आर्थिक केंद्र और पांच प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब आ रहे हैं, जिन्हें पोर्ट तक तेज पहुंच का सीधा लाभ मिलेगा।
पारादीप बंदरगाह पूर्वी समुद्री तट पर कोयला, कच्चे खनिज, स्टील और खाद्यान्न के समुद्री व्यापार का सबसे बड़ा आधार है। वर्तमान में मालवाहक ट्रकों को घनी आबादी वाले बाजारों और कस्बों से गुजरना पड़ता है, जिससे गति धीमी हो जाती है और मालवाहक जहाजों तक आपूर्ति में देरी होती है। नए हाईवे से बंदरगाह की लोडिंग-अनलोडिंग लाइन से सीधा संपर्क जुड़ने पर ओडिशा से होने वाले औद्योगिक और खनिज निर्यात में तेजी आएगी। साथ ही पुरी के जगन्नाथ मंदिर और कोणार्क के सूर्य मंदिर जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों की ओर पर्यटकों का आना-जाना बहुत सहज हो जाएगा।
लाखों मानव-दिवस रोजगार और स्थानीय ढाबों को संबल
सड़क निर्माण कार्य शुरू होते ही स्थानीय कार्यबल के लिए बड़े पैमाने पर आजीविका के साधन खुलेंगे। परियोजना के विस्तृत ब्योरे के मुताबिक इसके निर्माण चक्र के दौरान 53.61 लाख प्रत्यक्ष मानव-दिवस और 67.01 लाख अप्रत्यक्ष मानव-दिवस के रोजगार अवसर पैदा होने का आंकलन है।
निर्माण पूरा होने के उपरांत इस नए हाईवे के किनारे लॉजिस्टिक्स गोदाम, सर्विस स्टेशन, ढाबे और स्थानीय कृषि मंडियां विकसित होंगी, जिससे तटीय ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। खुरदा और पुरी से लेकर जगतसिंहपुर तक का तटीय इलाका प्राकृतिक आपदाओं और चक्रवातों के दौरान भी सुरक्षित निकासी मार्ग हासिल कर सकेगा।
























