महीने की पहली तारीख को ईंधन की कीमतों में होने वाले नियमित संशोधन के तहत 1 नवंबर को घरेलू स्तर पर हवाई ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल विपणन कंपनियों ने वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की दरों में वृद्धि के बाद विमान ईंधन की कीमतों में 1 प्रतिशत की तेजी की है। विमानन कंपनियों के कुल परिचालन बजट में ईंधन की लागत एक बड़ा हिस्सा होती है, जिसके चलते इस वृद्धि का सीधा असर आने वाले दिनों में हवाई यात्रियों की जेब पर पड़ने की संभावना बन रही है।
दिल्ली में हवाई ईंधन के नए दाम और हालिया रुझान
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 1 नवंबर से प्रभावी नए बदलाव के बाद एटीएफ की कीमत 137.12 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 138.50 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। ताजा संशोधन में लगभग सवा रुपये प्रति लीटर का इजाफा देखा गया है। इससे ठीक पहले अक्टूबर के महीने में एटीएफ की दरों में 13.22 प्रतिशत यानी लगभग 16 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई थी। इस तरह पिछले महज एक महीने की अवधि पर गौर करें तो विमान ईंधन की कीमतों में कुल मिलाकर 17 रुपये प्रति लीटर से भी अधिक की तेजी आ चुकी है।
विमानन कंपनियों की बढ़ती लागत और किरायों पर दबाव
विमानन क्षेत्र के लिए जेट ईंधन की लागत में उछाल हमेशा एक गंभीर वित्तीय चुनौती पेश करता है। किसी भी विमानन कंपनी के कुल संचालन व्यय में अकेले एटीएफ की हिस्सेदारी करीब 35 से 40 फीसदी तक बैठती है। लागत का इतना बड़ा हिस्सा सीधे कच्चे तेल और रिफाइनिंग दरों से बंधा होने के कारण जब भी ईंधन महंगा होता है, एयरलाइंस के कुल मुनाफे और परिचालन मार्जिन पर सीधा दबाव बनने लगता है। ऐसी स्थिति में कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए फ्यूल सरचार्ज का सहारा लेती हैं, जिससे हवाई टिकट सीधे तौर पर महंगे हो जाते हैं।
यात्रियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ की आशंका
ईंधन की दरों में इस ताजा बढ़ोतरी के बाद एयरलाइंस द्वारा टिकटों पर अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगाने पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इसके बावजूद देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो ने हाल के दिनों में हवाई किराये में बढ़ोतरी किए जाने के संकेत पहले ही दे दिए थे। लगातार दो महीनों में ईंधन की लागत में हुए संचयी इजाफे को देखते हुए त्योहारी और आगामी यात्रा सीजन में हवाई यात्रियों को अतिरिक्त किराया चुकाना पड़ सकता है।


















