राजस्थान के अलवर जिले में ग्रामीण राजनीति का एक बेहद दिलचस्प और नया स्वरूप देखने को मिला है। रैणी पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले गढ़ ग्राम पंचायत के मतदाताओं ने इस बार किसी अनुभवी चेहरे के बजाय 21 वर्ष की एक नौजवान छात्रा पर अपना भरोसा जताया है। उच्च शिक्षा हासिल कर रहीं प्रेरणा नरुका ने चुनावी मैदान में कदम रखा और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 387 मतों के अंतर से शिकस्त देकर विजय हासिल की।
पारिवारिक परिवेश और जनसेवा का सफर
सार्वजनिक जीवन और जमीनी राजनीति से प्रेरणा का जुड़ाव नया नहीं है, बल्कि यह सीख उन्हें अपने घर से ही मिली है। उनके पिता तेजवीर सिंह वर्ष 2015 में गढ़ ग्राम पंचायत के मुखिया की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। अपने पिता को ग्रामीणों की बुनियादी परेशानियां हल करते और विकास योजनाएं लागू करते देखकर प्रेरणा के भीतर लोक सेवा की गहरी समझ विकसित हुई।
वह जयपुर में रहकर फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम की शिक्षा ग्रहण कर रही थीं। जब चुनावी प्रक्रिया के तहत गढ़ ग्राम पंचायत का सरपंच पद महिला वर्ग के लिए निर्धारित हुआ, तो उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के साथ ग्रामीण विकास की बागडोर संभालने का चुनौतीपूर्ण मार्ग चुना।
विकास और महिला साक्षरता पर रहेगा जोर
चुनावी परिणाम घोषित होते ही इलाके के बाशिंदों ने अपनी युवा प्रतिनिधि का विभिन्न स्थानों पर गर्मजोशी से अभिनंदन किया। नागरिकों ने युवा सोच और नई दृष्टि पर भरोसा जताते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।
पदभार संभालने की दिशा में आगे बढ़ते हुए नवनिर्वाचित सरपंच ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकताओं में बालिकाओं व महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना तथा गांव का सर्वांगीण बुनियादी विकास सुनिश्चित करना सबसे शीर्ष पर रहेगा।























