कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ द्वारा अपने डिजिटल नेटवर्क और कामकाज के तरीकों में बड़े बदलाव करने के बावजूद खाताधारकों को अपने पैसे पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। दावों के निपटारे को तेज करने के लिए लाए गए आधुनिक तकनीकी ढांचे में कई तरह की अड़चनें बनी हुई हैं, जिसकी वजह से कई मामलों में भुगतान मिलने में 20 दिन से अधिक का वक्त खर्च हो रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए ईपीएफ अधिकारी संघ ने सरकार को एक पत्र भेजकर सिस्टम को पटरी पर लाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और प्रोफेशनल्स को तुरंत मैदान में उतारने की पुरजोर मांग उठाई है। संघ का कहना है कि जिस अपग्रेडेड सिस्टम को केवल 2 से 3 दिन के भीतर क्लेम का निपटारा करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया था, वह जमीनी स्तर पर अभी भी धीमी गति से चल रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच और महत्व
ईपीएफओ की पहुंच का दायरा देश के बहुत बड़े हिस्से पर फैला हुआ है। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार यदि इसके एक्टिव ग्राहकों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को मिला लिया जाए तो यह संस्था सीधे तौर पर लगभग 25 से 35 करोड़ नागरिकों के जीवन को प्रभावित करती है, जो कि देश की कुल आबादी का करीब पांचवां हिस्सा है। यही वजह है कि इस संस्थान का सुचारू रूप से चलना और अपनी सेवाएं तय समय पर देना केवल एक प्रशासनिक काम नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का विषय है। इसी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए संगठन अपनी पूरी कार्यप्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने की कोशिश कर रहा है ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
तकनीकी जानकारों और कर्मचारियों की भारी कमी
कामकाज में आ रही इस सुस्ती के पीछे मुख्य रूप से पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञों का अभाव बताया जा रहा है। संगठन से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि मंत्रालय इस मामले में उचित कदम उठाए तो पीएफ धारकों को भुगतान मिलने की राह बेहद आसान हो जाएगी। आंकड़ों के मुताबिक ईपीएफओ के बेहद अहम सूचना सेवा प्रभाग यानी आईएसडी में पिछले लंबे समय से सीधी नियुक्तियां नहीं हुई हैं। इस महत्वपूर्ण विभाग में अंतिम बार सीधी भर्ती आज से 22 साल पहले यानी साल 2004 में कराई गई थी। इसके बाद से स्थिति यह है कि इस प्रभाग के कई संयुक्त निदेशक और उप निदेशक या तो अपने पद से रिटायर हो चुके हैं या फिर इस्तीफा दे चुके हैं और दूसरी तरफ प्रतिनियुक्ति पर भी कोई नया अधिकारी नहीं आया है।
नेतृत्व और आईटी विकास से जुड़ी चुनौतियां
संगठन के भीतर तकनीकी मोर्चे पर नेतृत्व की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईपीएफओ पिछले तीन वर्षों से एक पूर्णकालिक मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी यानी सीटीओ का चयन करने में भी नाकाम साबित हुआ है। हालत यह है कि तकनीक और सॉफ्टवेयर से जुड़े तमाम विकास कार्य आंतरिक रूप से संभालने के बजाय सीडीएसी को आउटसोर्स कर दिए गए हैं। हालांकि तकनीकी स्तर पर कई तरह के सुधार किए गए हैं, लेकिन इस नए सिस्टम को जुलाई 2026 में टुकड़ों-टुकड़ों में ही लागू किया जा सका। मूल योजना यही थी कि ज्यादातर मामलों को ऑटो मोड के जरिए केवल 2 से 3 दिनों के भीतर निपटा लिया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अनेक मामलों में फाइलें 20 दिन से भी अधिक समय तक लटकी रह जाती हैं।



















