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एवरग्रांडे संकट के पांच साल बाद भी नहीं संभला चीन का घर बाजार, बीजिंग का नया दांव ग्रीन टेक और EV परव्यापार
55 मिनट पहले· 0

एवरग्रांडे संकट के पांच साल बाद भी नहीं संभला चीन का घर बाजार, बीजिंग का नया दांव ग्रीन टेक और EV पर

एवरग्रांडे संकट के पांच साल बाद भी चीन का घर बाजार ढांचागत ठहराव में फंसा है। कॉमर्जबैंक के डॉ. हेनरी हाओ के मुताबिक रियल एस्टेट निवेश 2021 के शिखर का सिर्फ 53 प्रतिशत रह गया है और बीजिंग अब पूंजी ग्रीन टेक और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर मोड़ रहा है।

चीन का रियल एस्टेट संकट अब अपने छठे साल में दाखिल होने वाला है, और कॉमर्जबैंक के डॉ. हेनरी हाओ का साफ कहना है कि जल्द किसी बड़ी वापसी की उम्मीद न रखें। एवरग्रांडे संकट ने जब चीन के प्रॉपर्टी बूम में पहली दरार डाली थी, उसे पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन यह सेक्टर आज भी ऐसी सुस्ती में फंसा है जिसे वे ढांचागत ठहराव कहते हैं। अब बीजिंग ने भी मान लिया है कि उसका पुराना ग्रोथ इंजन थम चुका है।

यह गिरावट जुलाई 2026 में अपने पांच साल पूरे करेगी। बड़े शहरों में कीमतें कहीं कहीं जरूर संभली हैं, फिर भी पूरे देश का घर बाजार अब भी जमा हुआ है। निर्माण चक्र के हाओ के विश्लेषण से लगता है कि यह कोई अस्थायी गिरावट नहीं है जो भरोसा लौटते ही उछल जाएगी, बल्कि एक लंबी चलने वाली तब्दीली है, क्योंकि नीति बनाने वाले जानबूझकर अर्थव्यवस्था को नई बुनियाद पर ले जा रहे हैं।

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आंकड़े बताते हैं कि बाजार कितना ठंडा है

इस गिरावट का पैमाना कच्चे आंकड़ों में सबसे साफ दिखता है। रियल एस्टेट में निवेश अब जुलाई 2021 के अपने शिखर का महज 53 प्रतिशत रह गया है, यानी बिल्डर नए प्रोजेक्ट्स में उस चरम दौर के मुकाबले मुश्किल से आधा पैसा लगा रहे हैं। नए घरों का निर्माण शुरू होना यानी हाउसिंग स्टार्ट्स तो और भी तेजी से गिरा है, जो पहले के स्तर का सिर्फ 24 प्रतिशत बचा है। जब इतने कम नए प्रोजेक्ट जमीन पर उतर रहे हों, तो तय है कि यह सेक्टर आने वाले सालों तक कुल अर्थव्यवस्था पर बोझ बना रहेगा।

जो एक आंकड़ा थोड़ा बेहतर दिखता है वह है घरों का पूरा होना यानी हाउसिंग कंप्लीशन, जो अपने पुराने शिखर के 55 प्रतिशत पर टिका है। लेकिन हाओ याद दिलाते हैं कि यह मजबूती असल मांग की निशानी नहीं है। यह पूरी तरह नीतियों की देन है, उन पहले से बिक चुके फ्लैटों को पूरा करने के सरकारी दबाव का नतीजा है जो संकट आते ही अधूरे छूट गए थे, न कि नए घरों की किसी सच्ची भूख का।

राष्ट्रीय स्तर पर L आकार, शहरों के बीच K आकार

पूरे देश के स्तर पर हाओ कीमतों की चाल को L आकार का बताते हैं, यानी एक तीखी गिरावट और उसके बाद लंबा सपाट दौर, जहां किसी तेज V आकार की रिकवरी के आसार नहीं हैं। लेकिन इस राष्ट्रीय औसत के नीचे तस्वीर बंट जाती है। वे इसे K आकार का बंटवारा कहते हैं, जहां अलग अलग शहरों की किस्मत एक दूसरे से तेजी से दूर जा रही है। टॉप टियर शहरों में कीमतें कुछ हद तक स्थानीय रूप से संभली हैं, जबकि निचले दर्जे के शहर लगातार कमजोर पड़ रहे हैं, जिससे सबसे मजबूत और सबसे कमजोर बाजारों की खाई और चौड़ी हो रही है।

इस सबके पीछे कुछ ऐसी ताकतें हैं जिन्हें पलटना आसान नहीं। मांग सुस्त पड़ चुकी है, बिल्डरों के लिए फंडिंग सख्त हो गई है, और देश की बदलती आबादी का मतलब है कि सप्लाई को खपाने के लिए नए खरीदार पहले से कम आ रहे हैं। यही तीनों कारण मिलकर बाजार को जल्दी उबरने नहीं दे रहे।

बीजिंग की सीमित कोशिश

सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी, लेकिन उसका मकसद उतना बड़ा नहीं जितना बाहर के लोग समझते हैं। किसी नए बूम को भड़काने के बजाय अधिकारी इस गिरावट को इस तरह संभालना चाहते हैं कि यह व्यवस्थित बनी रहे। उन्होंने होम लोन की ब्याज दरें घटाई हैं, खरीदारों को शुरू में जमा करनी पड़ने वाली डाउन पेमेंट कम की है, और स्थानीय सरकारों पर जोर डाला है कि वे बिना बिके घर खरीदकर बाजार का ढेर हल्का करें। इनमें से हर कदम कुछ सहारा तो देता है, फिर भी हाओ का तर्क है कि बाजार पर ढांचागत अड़चनें इतनी गहरी हैं कि इनका असर दब जाता है।

अब पैसा कहां जा रहा है

इससे बड़ी बात सोच में आया बदलाव है। हाओ कहते हैं, "प्राथमिक ग्रोथ इंजन के तौर पर रियल एस्टेट का दौर निश्चित रूप से खत्म हो चुका है।" इसी सोच के साथ बीजिंग ने अपनी पूंजी पूरी तरह किसी और दिशा में मोड़ दी है। जो पैसा कभी फ्लैटों की ऊंची इमारतों में लगता था, उसे अब उस ओर भेजा जा रहा है जिसे अधिकारी नई उत्पादक शक्तियां कहते हैं, खासकर ग्रीन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक वाहन और उन्नत औद्योगिक उपकरण।

यह बदलाव पूरी कहानी को नए सिरे से पेश करता है। घर बाजार की कमजोरी सिर्फ ठीक करने वाली समस्या भर नहीं, बल्कि एक सोची समझी रीबैलेंसिंग का हिस्सा है, जिसमें दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सीमेंट और क्रेन की जगह कारखानों, बैटरियों और साफ ऊर्जा को अपनाने की कोशिश कर रही है। चीन पर नजर रखने वालों के लिए सबक यही है कि अगली तेजी शायद प्रॉपर्टी बाजार के दम पर नहीं आएगी। हाओ की नजर में यह ठहराव आगे भी बना रहेगा, और ग्रोथ अगर आएगी, तो किसी और दिशा से आएगी।

सवाल-जवाब

चीन का प्रॉपर्टी संकट कब से चल रहा है?
जुलाई 2026 में यह गिरावट अपने पांच साल पूरे करेगी, यानी यह एवरग्रांडे संकट के बाद का पांचवां साल होगा।
रियल एस्टेट में निवेश कितना गिर चुका है?
यह जुलाई 2021 के अपने शिखर का सिर्फ 53 प्रतिशत रह गया है।
हाउसिंग स्टार्ट्स और कंप्लीशन का क्या हाल है?
नए निर्माण की शुरुआत पुराने स्तर के 24 प्रतिशत पर आ गई है, जबकि घरों का पूरा होना 55 प्रतिशत पर टिका है जो पूरी तरह नीतियों की देन है।
L आकार और K आकार का क्या मतलब है?
राष्ट्रीय कीमतें L आकार में यानी गिरकर सपाट हैं, जबकि K आकार का मतलब है कि टॉप टियर शहर संभल रहे हैं और निचले दर्जे के शहर कमजोर पड़ रहे हैं।
बीजिंग ने बाजार को संभालने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने होम लोन की ब्याज दरें घटाई हैं, डाउन पेमेंट कम की है और स्थानीय सरकारों से बिना बिके घर खरीदने को कहा है।
अब चीन अपनी पूंजी कहां लगा रहा है?
बीजिंग पैसा ग्रीन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक वाहनों और उन्नत औद्योगिक उपकरणों की ओर मोड़ रहा है।
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