चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने सोमवार को चीन के वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक संबंधों और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में हुए सैन्य गतिरोध के बाद दोनों देशों द्वारा आपसी संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों के बीच यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा व्यापार और बढ़ता घाटा
राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव के बावजूद भारत और चीन के बीच व्यापारिक गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान चीन एक बार फिर अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 151.1 बिलियन USD तक पहुंच गया। हालांकि, व्यापार में बढ़ोतरी के साथ-साथ चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले वित्तीय वर्ष में चीन को होने वाले भारतीय निर्यात में 36.66 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे यह बढ़कर 19.47 बिलियन USD हो गया। दूसरी तरफ, चीन से होने वाले आयात में भी 16 प्रतिशत का इजाफा हुआ और यह 131.63 बिलियन USD के स्तर पर पहुंच गया। इस भारी आयात के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार का अंतर और अधिक चौड़ा हो गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.6 बिलियन USD के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो इससे पिछले वर्ष यानी 2024-25 में 99.2 बिलियन USD था।
राजदूत और चीनी वाणिज्य अधिकारी की मुलाकात के मायने
भारतीय राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने चीन के वाणिज्य मंत्रालय में एशियाई मामलों के विभाग के महानिदेशक वांग लिपिंग से मुलाकात की। इस बैठक के संबंध में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी साझा की। दूतावास ने बताया कि दोनों अधिकारियों ने द्विपक्षीय वार्ता तंत्र सहित व्यापार और वाणिज्यिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। इसके अलावा, आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने के तरीकों पर भी चर्चा की गई। बैठक में दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं।
भारतीय उद्योगों के लिए बाजार पहुंच की मांग
भारत काफी समय से बीजिंग से उन क्षेत्रों में बेहतर बाजार पहुंच प्रदान करने का आग्रह कर रहा है, जिनमें भारतीय कंपनियों को महारत हासिल है। इनमें IT सेवाएं, फार्मास्युटिकल्स और कृषि उत्पाद प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस बैठक से उम्मीद जताई जा रही है कि यह दोनों देशों के बीच व्यापारिक और वाणिज्यिक मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
गौरतलब है कि साल 2020 के सैन्य टकराव के बाद जमे हुए संबंधों को पिघलाने के लिए भारत और चीन लगातार कदम उठा रहे हैं। हाल के समय में दोनों देशों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू किया है, साथ ही वीजा सेवाओं और उड़ानों को भी बहाल कर दिया गया है। आर्थिक मोर्चे पर बातचीत के रास्तों को खुला रखने के प्रयासों के तहत उच्च स्तरीय वार्ता तंत्र को भी दोबारा सक्रिय किया गया है।













