भारतीय कॉर्पोरेट जगत में कर्मचारियों की प्राथमिकताओं और रोजगार के रुझानों में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। रैंडस्टैड एम्प्लॉयर ब्रांड रिसर्च (आरईबीआर) 2026 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी टेक दिग्गज गूगल भारत में काम करने के लिहाज से सबसे आकर्षक नियोक्ता ब्रांड बनकर उभरा है। इस प्रतिष्ठित सूची में भारतीय बहुराष्ट्रीय दिग्गज टाटा समूह ने दूसरा स्थान हासिल किया है, जबकि वैश्विक ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न तीसरे स्थान पर रही है। इसी के साथ, रिपोर्ट ने देश के कार्यबल की वर्तमान मनस्थिति को भी रेखांकित किया है, जिसमें यह सामने आया है कि करीब 46 फीसदी भारतीय पेशेवर आगामी छह महीनों के भीतर अपनी मौजूदा नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं।
कार्यबल में नौकरी बदलने की तीव्र इच्छा और सर्वेक्षण का दायरा
इस अध्ययन में भारतीय कामकाजी संस्कृति की बदलती दिशा को विस्तार से दर्शाया गया है। आंकड़े बताते हैं कि बीते छह महीनों के दौरान लगभग 32 फीसदी कर्मचारी पहले ही अपनी नौकरी बदल चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ 46 फीसदी कर्मचारी निकट भविष्य में नए अवसरों की तलाश में हैं। यह रिपोर्ट दुनिया भर के 34 प्रमुख बाजारों में 1.75 लाख से अधिक उत्तरदाताओं से प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। भारत के विशेष संदर्भ में देखें तो देश भर के करीब 3,500 से ज्यादा सक्रिय यूज़र्स ने इस सर्वेक्षण में हिस्सा लेकर अपनी राय दर्ज कराई है।
भारत की शीर्ष 10 सबसे आकर्षक नियोक्ता कंपनियां
सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थलों की सूची में शीर्ष तीन के बाद दक्षिण कोरियाई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी सैमसंग इंडिया ने चौथा पायदान हासिल किया है। भारत की प्रमुख आईटी सेवा प्रदाता कंपनी इन्फोसिस पांचवें स्थान पर रही है, जिसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज छठे और एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी आईटीसी समूह सातवें स्थान पर है। हिंदुस्तान यूनिलीवर ने सूची में आठवां स्थान प्राप्त किया है, जबकि वाहन और इंजीनियरिंग क्षेत्र का प्रमुख नाम महिंद्रा एंड महिंद्रा नौवें पायदान पर है। कंप्यूटर तकनीक से जुड़ी कंपनी डेल टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने इस शीर्ष 10 की सूची में दसवां स्थान हासिल किया है।
कर्मचारियों के निर्णयों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चलता है कि भारतीय कर्मचारी अब केवल आकर्षक पैकेज तक सीमित नहीं हैं। नियोक्ता का चुनाव करते समय उनके लिए काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन यानी वर्क-लाइफ बैलेंस सबसे महत्वपूर्ण मानदंड बन गया है। इसके अलावा, संस्थान में समान अवसर की उपलब्धता, करियर में प्रगति की स्पष्ट संभावनाएं, प्रतिस्पर्धी वेतन एवं अतिरिक्त लाभ तथा कंपनी की बाजार में अच्छी प्रतिष्ठा ऐसे पांच प्रमुख आधार हैं जिनके आधार पर पेशेवर किसी कंपनी में शामिल होने का मन बनाते हैं।
कंपनियों के लिए नई प्रतिभा रणनीति अपनाने की चुनौती
रैंडस्टैड इंडिया के प्रबंध निदेशक नारायण अय्यर के अनुसार, जब लगभग आधे कर्मचारी नौकरी बदलने की सोच रहे हों, तो कंपनियों को सतही सुविधाओं से आगे बढ़कर ठोस ढांचागत नीतियां बनानी होंगी। कर्मचारियों की आकांक्षाएं संस्थानों की पारंपरिक संरचनात्मक क्षमताओं से कहीं अधिक तेजी से विकसित हो रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत जिस तरह वैश्विक निवेश आकर्षित कर रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है, उसमें केवल वही संगठन सफल होंगे जो अपनी प्रतिभा प्रबंधन रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करेंगे। भविष्य उन्हीं नियोक्ताओं के पक्ष में होगा जो कर्मचारियों के विकास, निष्पक्षता, लचीलेपन और उचित पुरस्कार के बीच संतुलन स्थापित कर सकेंगे।
संतुलित नियोक्ता का नया दौर और डिजिटल क्षेत्र की मांगें
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि भारत का जॉब मार्केट अब संतुलित नियोक्ता के युग में प्रवेश कर रहा है। आज के समय में संगठनों को केवल नौकरी देने के बजाय अर्थपूर्ण कार्य, करियर वृद्धि, समावेशी माहौल, मानसिक कल्याण और आकर्षक वेतन का एक समग्र पैकेज देना होगा। हालांकि सभी उद्योगों में कर्मचारियों की उम्मीदें काफी हद तक एक जैसी हैं, लेकिन डिजिटल और टेक क्षेत्र के पेशेवर प्रतिस्पर्धी पैकेज को बहुत ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। यदि इस क्षेत्र के पेशेवरों को करियर में आगे बढ़ने के मौके नहीं मिलते, तो उनके नौकरी छोड़ने की संभावना सबसे अधिक होती है।



















