वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की तेज तरक्की को नियंत्रित करने और इसके संभावित खतरों पर लगाम लगाने के लिए उठाई गई नई आवाजों का बीजिंग में तीखा विरोध शुरू हो गया है। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने शनिवार को प्रकाशित अपने एक विस्तृत लेख 'वी मस्ट पेस द फ्रंटियर' में दुनिया भर में एआई की गति को धीमा करने का आह्वान किया। अमोदेई का तर्क है कि सीमांत मॉडल्स के वैश्विक नियमन के लिए चीन के साथ तालमेल बिठाना अनिवार्य है, क्योंकि यह एक ऐसा सत्तावादी मुल्क है जिसके पास इस क्षेत्र की सबसे उन्नत क्षमताएं मौजूद हैं। इसके बावजूद चीनी हुकूमत और वहां का तकनीकी जगत इस प्रस्ताव को संदेह भरी नजरों से देख रहा है। यह अविश्वास इसलिए नहीं उपजा है कि चीन आंखें मूंदकर प्रतिस्पर्धा में भागना चाहता है या वह इस तकनीक से जुड़े जोखिमों को खारिज करता है, बल्कि बीजिंग का स्पष्ट मानना है कि उसके सामने एक पक्षपाती और अनुचित समझौता पेश किया जा रहा है।
बराबरी के दर्जे पर अड़ा बीजिंग और रणनीतिक बढ़त की मंशा
अमोदेई के इस प्रस्ताव की रूपरेखा पर नजर डालें तो इसमें सुझाव दिया गया है कि एआई की रफ्तार सुस्त करने की रणनीति का एक बेहद अहम हिस्सा यह होना चाहिए कि अमेरिका और दूसरे लोकतांत्रिक देश चीन जैसे देशों की तुलना में अपनी बढ़त को जितना मुमकिन हो उतना अधिक बनाए रखें। अपनी इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए उन्होंने अमेरिकी प्रशासन से चिप्स की तस्करी पर कड़े प्रतिबंध लगाने और चीनी कंपनियों द्वारा अनाधिकृत मॉडल डिस्टिलेशन को रोकने जैसे सख्त कदम उठाने की अपील की। अमोदेई ने यह दलील भी दी कि चीनी एआई उद्योग को कमजोर करने से वाशिंगटन को भविष्य में बातचीत की मेज पर अधिक रणनीतिक दबाव हासिल होगा, जिससे किसी समझौते पर पहुंचना आसान बन जाएगा। हालांकि, दबाव बनाने की इस कार्यप्रणाली से बीजिंग बातचीत के लिए कैसे प्रेरित होगा, इस पहलू पर उनके लेख में कोई स्पष्ट योजना नहीं पेश की गई। बाद में एक टेलीविजन साक्षात्कार के दौरान उन्होंने खुद यह स्वीकार किया कि उन्हें चीन के साथ बातचीत करने का कोई ठोस अंदाजा नहीं है।
चीन में एआई सुरक्षा को लेकर सक्रिय समुदाय भी इस दृष्टिकोण पर गंभीर आपत्ति जता रहा है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में व्हाइट हाउस के स्टाफ सदस्य रहे और तकनीकी हेज फंड इंटरकनेक्टेड कैपिटल के संस्थापक केविन शू के अनुसार, चीन का एआई सुरक्षा समुदाय निरंतर बढ़ रहा है और उसकी चिंताएं अमेरिकी प्रयोगशालाओं जैसी ही हैं। शू का कहना है कि असली खाई एंथ्रोपिक की उस सोच से पैदा हुई है जो बातचीत की शुरुआत करने से पहले चीन को प्रतिबंधित और शक्तिहीन करके खुद अधिकतम लाभ उठाना चाहती है, जबकि चीन केवल तभी संवाद के लिए तैयार होगा जब उसके साथ बराबरी का बर्ताव किया जाए। वहीं एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सेंटर फॉर चाइना एनालिसिस के सीनियर फेलो और स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन-सेंटर्ड एआई के डिजिटल फेलो एल्विन वांग ग्रेलिन ने बताया कि अमोदेई के निबंध में एआई की गति को सीमित करने की शर्त चीन पर बढ़त बढ़ाने से जुड़ी है, जिसके चलते चीनी पाठकों को यह प्रस्ताव पूरी तरह बनावटी और अविश्वसनीय महसूस होता है।
चीनी विदेश मंत्रालय की कड़ी प्रतिक्रिया और अस्तित्व का डर बनाम सत्ता की सुरक्षा
सोमवार को आयोजित एक आधिकारिक प्रेस वार्ता के दौरान जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन से इस लेख के संबंध में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता ने इस प्रस्ताव को डर का माहौल खड़ा करने वाला, टकराव को बढ़ावा देने वाला और दुर्भावनापूर्ण प्रतिस्पर्धा से प्रेरित बताया, जिससे एआई पर वैश्विक सहयोग के प्रयासों को गहरा धक्का लगेगा। इसके अगले ही दिन चीनी विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि चीन एआई के मामले में विकास और सुरक्षा दोनों को एक समान महत्व देता है। चीनी विश्लेषक और अधिकारी इस बात से नाराज हैं कि एक तरफ उनके मुल्क को वैश्विक शासन के लिए एक अनिवार्य भागीदार माना जा रहा है, और दूसरी तरफ उसे ऐसा प्रतिद्वंद्वी करार दिया जा रहा है जिसे हर हाल में कमजोर किया जाना जरूरी है।
सिलिकॉन वैली और बीजिंग की प्राथमिकताओं में एक बुनियादी अंतर यह भी है कि चीनी हुकूमत इंसानी वजूद खत्म होने जैसे काल्पनिक खतरों को लेकर उतनी फिक्रमंद नहीं है जितनी अमेरिकी तकनीकी कंपनियां हैं। सेंटर फॉर अ न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी की विजिटिंग फेलो मिशेल नी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और एआई पर शोध करती हैं, के मुताबिक बीजिंग इन आवाह्नों पर भरोसा करने में असहज महसूस करता है क्योंकि वह एजीआई यानी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस की संभावनाओं को लेकर सशंकित है और इस बात पर संदेह करता है कि एआई मानवता के अस्तित्व के लिए कोई भयानक खतरा पैदा करेगा। नी के अनुसार, यद्यपि बीजिंग तकनीक पर नियंत्रण खोने के जोखिमों को पहचानने लगा है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि एआई चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शासन और देश की सामाजिक स्थिरता के लिए खतरा न बन जाए।
चीन के राज्य सुरक्षा मंत्री चेन यिक्सिन ने अपने एक हालिया लेख में रेखांकित किया था कि एआई राजनीतिक दुष्प्रचार, साइबर हमलों, जासूसी, सामाजिक अशांति और नए सैन्य खतरों को भड़का सकता है। चीनी मंत्री ने अमेरिकी लैब्स को लगातार परेशान करने वाले प्रलयकारी परिदृश्यों के बजाय व्यवस्था की आंतरिक सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया। मिशेल नी का यह भी कहना है कि चीनी नीति-निर्माता अमेरिकी कंपनियों द्वारा सुरक्षा के नाम पर उठाई जाने वाली मांगों को स्वार्थी चाल मानते हैं। चीनी विश्लेषकों का आकलन है कि अमेरिकी फर्में संभावित आईपीओ से पहले अपनी बाजार पूंजी बढ़ाने के लिए ऐसा नैरेटिव गढ़ती हैं या फिर अपने चीनी प्रतिद्वंद्वियों की रफ्तार रोकने की कोशिश कर रही हैं।
ओपन सोर्स मॉडल का दर्शन और आगामी राजनयिक वार्ता की उम्मीदें
संदेह का यह भाव चीन के घरेलू एआई उद्योग में भी व्यापक रूप से देखा जा रहा है, जो मुख्य रूप से कम लागत वाले ओपन-वेट मॉडल्स जारी करने पर केंद्रित रहा है। डीपसीक के एक शोधकर्ता ने रविवार को साझा किए गए अपने एक बहुचर्चित निबंध में लिखा कि एआई इंसानी समाज को दो अलग-अलग छोरों पर ले जा सकता है। पहला छोर वह है जहां शक्तिशाली एआई हर किसी के लिए सुलभ हो और जीवन स्तर को ऊंचा उठाए। दूसरा छोर वह है जहां मुट्ठी भर तकनीकी कंपनियां सबसे उन्नत प्रणालियों और उनसे जुड़े संसाधनों पर एकाधिकार कर लें, जिससे दूसरों के लिए बराबरी कर पाना नामुमकिन हो जाए। शोधकर्ता ने जोर देकर लिखा कि वह अभी भी मानते हैं कि सबसे उन्नत तकनीक हर किसी को खुले और किफायती तरीके से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि वह ऐसा करने के लिए एंथ्रोपिक या ओपनएआई पर भरोसा नहीं करते और विशेष तौर पर यह कतई नहीं चाहते कि एंथ्रोपिक सबसे उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या एजीआई पर अपना नियंत्रण स्थापित करे।
इन तमाम मतभेदों के बावजूद दोनों महाशक्तियों के बीच एआई सुरक्षा पर बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस महीने के आखिर में वाशिंगटन यात्रा प्रस्तावित है, जहां वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे, और इस बैठक से पहले दोनों पक्षों के बीच शुरुआती स्तर की बातचीत जारी होने की जानकारी सामने आई है। इस कूटनीतिक संवाद से धीरे-धीरे ही सही लेकिन सकारात्मक प्रगति की उम्मीदें बंधी हुई हैं, क्योंकि दोनों ही सरकारें साइबर सुरक्षा के खतरों, शक्तिशाली प्रणालियों के दुरुपयोग और सक्षम एआई मॉडल्स के अप्रत्याशित व्यवहार को लेकर समान रूप से चिंतित हैं।
मिशेल नी का मानना है कि दोनों तरफ ऐसे लोग मौजूद हैं जो वास्तविक रूप में एआई की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं, और इस बात की पूरी संभावना है कि वे सीमित दायरों वाले विषयों पर ईमानदारी से चर्चा कर सकते हैं। उनके अनुसार, इस संवाद को नतीजे तक पहुंचाने के लिए सबसे जरूरी कदम यह होगा कि दोनों देश एक-दूसरे की प्रतिबद्धताओं की पुष्टि करने का एक विश्वसनीय और पारदर्शी तरीका विकसित करें। वहीं दूसरी ओर, मैटस रिसर्च की फेलो क्रिस्टी लोक जैसी विश्लेषकों को डर है कि अमेरिकी टेक दिग्गजों द्वारा चीन को कमजोर करने की बयानबाजी उस नाजुक भरोसे को खत्म कर सकती है जिस पर कूटनीतिक बातचीत टिकी होती है। लोक का कहना है कि डारियो अमोदेई का यह लेख अंततः उल्टा असर डाल सकता है और उन चुनिंदा रास्तों को नुकसान पहुंचा सकता है जो उन खतरों को कम करने के लिए उपलब्ध हैं जिनकी गंभीरता का दावा वह खुद करते हैं।


















