अंतरराज्यीय मार्गों पर माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों के लिए कर प्रशासन की प्रक्रियाओं में एक बड़ा सुधार होने जा रहा है। अब हाईवे पर चलने वाले मालवाहक वाहनों को रास्ते में पड़ने वाले राज्यों के जीएसटी अधिकारी अपनी मर्जी से रोककर जांच नहीं कर सकेंगे। केंद्र और राज्यों के बीच बनी सहमति के अनुसार, माल ढुलाई के दौरान ट्रकों की नियमित जांच का अधिकार मुख्य रूप से उसी राज्य के पास रहेगा जहां से सामान लोड हुआ है या जिस राज्य में माल की डिलीवरी होनी है। ट्रांजिट राज्यों के अधिकारियों द्वारा की जाने वाली अनियोजित चेकिंग पर रोक लगाने के लिए यह व्यवस्था तैयार की गई है।
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में मिला प्रस्ताव को अनुमोदन
इस नीतिगत बदलाव को 8 अक्टूबर को आयोजित जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक के दौरान औपचारिक मंजूरी दी गई। नए दिशानिर्देशों के तहत अंतरराज्यीय माल ढुलाई में जांच का प्राथमिक अधिकार केवल माल के मूल स्रोत वाले राज्य और गंतव्य राज्य के कर विभागों तक ही सीमित किया जाएगा। रास्ते में पड़ने वाले मध्यवर्ती राज्यों के अधिकारी सामान्य कार्यप्रणाली के तहत इन वाहनों को नहीं रोक सकेंगे। हालांकि, यह नई व्यवस्था संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी रूप से लागू की जाएगी।
वाहन रोकने के लिए ज्वाइंट कमिश्नर स्तर की पूर्वानुमति अनिवार्य
नए प्रावधानों के तहत किसी भी वाणिज्यिक वाहन को मात्र संदेह अथवा औचक जांच के नाम पर रास्ते में रोकने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी वाहन की तलाशी लेनी भी है, तो उसके लिए अधिकारियों के पास पुख्ता खुफिया जानकारी या ठोस इनपुट होना आवश्यक बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, किसी भी वाहन को रोकने से पहले संबंधित अधिकारी को ज्वाइंट कमिश्नर या उससे वरिष्ठ पद के अधिकारी से औपचारिक मंजूरी लेनी होगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कर अनुपालन की आड़ में होने वाली अनावश्यक परेशानियों को खत्म करना और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है, जहां उन्हें जांच का स्पष्ट और वैध आधार दर्ज करना पड़ेगा।
ई-वे बिल और अनिवार्य वैधानिक दस्तावेजों के नियम रहेंगे बरकरार
नियमों में इस बदलाव का अर्थ यह कतई नहीं है कि माल परिवहन के लिए तय वैधानिक दस्तावेजों से कोई छूट मिल गई है। जीएसटी व्यवस्था के मौजूदा प्रावधानों के अनुरूप 50,000 रुपये या उससे अधिक मूल्य की सामग्री ले जाने पर ई-वे बिल जारी करना पूर्ववत अनिवार्य रहेगा। यह प्रावधान निर्धारित वैधानिक छूटों को छोड़कर अंतरराज्यीय तथा राज्य के भीतर होने वाले परिवहन दोनों पर समान रूप से लागू रहता है। नए नियम अमल में आने के बाद भी डिजिटल सिस्टम के माध्यम से ई-वे बिल और संबंधित टैक्स इनवॉइस का मिलान किया जाता रहेगा, इसलिए व्यापारियों और चालकों को अपने सभी कागजात दुरुस्त रखने होंगे।
ट्रांसपोर्टरों और कारोबारी जगत को मिलने वाले व्यावहारिक लाभ
वर्तमान व्यवस्था में ट्रांजिट राज्यों के टैक्स अधिकारी भी किसी भी मार्ग से गुजर रहे ट्रकों को रोककर कागजात की मांग कर लेते हैं, जिससे माल समय पर पहुंचाने में रुकावट आती है और अनावश्यक विवाद खड़े होते हैं। नए नियमों के बाद ऐसी स्थितियों में बदलाव आएगा। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई मालवाहक ट्रक दिल्ली से चलकर पंजाब जा रहा है और उसे हरियाणा सीमा क्षेत्र में रोका जाता है, तो आवश्यक अनुमति और ठोस इनपुट के अभाव में उस कार्रवाई की वैधता को चुनौती दी जा सकेगी। इससे अंतरराज्यीय लॉजिस्टिक्स की रफ्तार बढ़ेगी, अनावश्यक जांच का तनाव घटेगा और आपूर्ति श्रृंखला अधिक पारदर्शी बन सकेगी।















