अगर आपके घर के बाहर या गैराज में रखी निजी गाड़ी लंबे समय से बेकार खड़ी रहती है, तो उसे एक नियमित कमाई के साधन में तब्दील किया जा सकता है। वर्तमान समय में ओला, उबर जैसी प्रमुख कैब कंपनियों के साथ-साथ कॉर्पोरेट लीज, स्थानीय टैक्सी नेटवर्क और टूर एवं ट्रेवल्स के कारोबार में कमर्शियल कारों की आवश्यकता लगातार देखी जा रही है। ऐसे अवसरों का लाभ उठाकर वाहन मालिक हर दिन 2 से 3 हजार रुपये तक की आमदनी हासिल कर सकते हैं। हालांकि इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण नियम यह समझना है कि निजी इस्तेमाल वाली कार को बिना कानूनी बदलाव के सीधे व्यावसायिक गतिविधियों में उतारना मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के अंतर्गत पूरी तरह गैरकानूनी माना जाता है।
यदि कोई व्यक्ति सफेद नंबर प्लेट वाली गाड़ी का उपयोग यात्रियों को ढोने या व्यावसायिक लाभ के लिए करता पकड़ा जाता है, तो उस पर भारी चालान लगाया जा सकता है और कानूनन गाड़ी को जब्त भी किया जा सकता है। इसलिए गाड़ी को किसी भी व्यावसायिक काम में लगाने से पहले उसका पंजीकरण निजी श्रेणी से बदलकर कमर्शियल श्रेणी में करवाना कानूनी तौर पर अनिवार्य है। यद्यपि यह रूपांतरण एक औपचारिक सरकारी प्रक्रिया से होकर गुजरता है, लेकिन सही नियमों और चरणों की जानकारी होने पर इसे बेहद आसानी से पूरा कराया जा सकता है।
सफेद प्लेट से पीली प्लेट में बदलाव क्यों जरूरी है?
मोटर वाहन अधिनियम के कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, सफेद नंबर प्लेट का आवंटन केवल निजी और पारिवारिक आवागमन के लिए ही किया जाता है। जैसे ही किसी चारपहिया वाहन में किराए पर सवारी बैठाई जाती है अथवा भाड़े पर सामान ले जाया जाता है, वह गतिविधि तत्काल कमर्शियल श्रेणी के दायरे में आ जाती है। व्यावसायिक श्रेणी में दर्ज होते ही गाड़ी को पीली पृष्ठभूमि वाली नंबर प्लेट लगवाना जरूरी हो जाता है।
इसके अलावा कमर्शियल वाहनों के लिए लागू होने वाले रोड टैक्स, समय-समय पर होने वाली फिटनेस जांच, रूट परमिट तथा बीमा पॉलिसियों के नियम निजी गाड़ियों से पूरी तरह भिन्न होते हैं। जब आप क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय यानी आरटीओ से गाड़ी का स्टेटस विधिवत बदलवा लेते हैं, तो ट्रैफिक पुलिस या प्रवर्तन अधिकारियों के किसी भी कानूनी डर के बिना कार को स्वतंत्र टैक्सी के तौर पर या किसी ट्रेवल एजेंसी के साथ जोड़कर संचालित किया जा सकता है।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज
रूपांतरण के लिए आवेदन करने से पूर्व वाहन स्वामी को संबंधित कागजातों की मूल प्रतियां और स्व-प्रमाणित फोटोकॉपी तैयार रखनी चाहिए
- पंजीकरण प्रमाण पत्र: गाड़ी की मूल आरसी बुक अथवा कार्ड।
- आरटीओ फॉर्म: वाहन रूपांतरण तथा आवश्यकता पड़ने पर मालिकाना हक से संबंधित फॉर्म 22 और फॉर्म 29/30।
- कमर्शियल वाहन बीमा: निजी उपयोग वाली थर्ड-पार्टी या कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी व्यावसायिक काम में अमान्य होती है, इसलिए नया कमर्शियल इंश्योरेंस अनिवार्य है।
- प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र: वैध पीयूसीसी दस्तावेज।
- फाइनेंसर की एनओसी: यदि कार पर बैंक लोन अथवा फाइनेंस बकाया है, तो संबंधित वित्तीय संस्थान से जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र।
- पहचान व निवास प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी अथवा पासपोर्ट की प्रति।
- ड्राइविंग लाइसेंस: कमर्शियल श्रेणी का वाहन चलाने के लिए वैध लाइसेंस अथवा कमर्शियल बैज।
रूपांतरण की 5 प्रमुख चरणबद्ध प्रक्रियाएं
गाड़ी को निजी से टैक्सी में बदलने के लिए निर्धारित पांच प्रमुख चरणों का पालन करना पड़ता है
1. फाइनेंसर से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC)
यदि कार किसी बैंक या फाइनेंस कंपनी के ऋण पर ली गई है और लोन अभी चुकता नहीं हुआ है, तो सबसे पहले संबंधित ऋणदाता बैंक शाखा में संपर्क करना होगा। बैंक को वाहन के व्यावसायिक उपयोग में रूपांतरण की जानकारी देनी होगी। बैंक अपनी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के उपरांत आरटीओ के पते पर एनओसी जारी करता है। यदि वाहन पर कोई कर्ज नहीं है, तो इस चरण की आवश्यकता नहीं पड़ती।
2. नया कमर्शियल इंश्योरेंस लेना
निजी वाहन का साधारण बीमा व्यावसायिक नुकसान को कवर नहीं करता। इसके लिए मौजूदा बीमा कंपनी अथवा किसी अन्य मान्यता प्राप्त बीमा प्रदाता से संपर्क करके पुरानी पॉलिसी को कमर्शियल में एंडोर्स कराना होता है या बिल्कुल नई कमर्शियल पॉलिसी लेनी होती है।
3. आरटीओ में आवेदन और रोड टैक्स का समायोजन
परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट परिवहन सेवा पर जाकर व्हीकल अल्टरेशन विकल्प के तहत फॉर्म भरना होगा, अथवा स्थानीय आरटीओ काउंटर पर जाकर आवश्यक फॉर्म जमा किए जा सकते हैं। निजी वाहनों पर 15 वर्षों का एकमुश्त लाइफटाइम रोड टैक्स जमा रहता है, जबकि कमर्शियल गाड़ियों पर यह टैक्स त्रैमासिक या सालाना आधार पर लिया जाता है। आरटीओ के नियमानुसार शेष बचे लाइफटाइम टैक्स का समायोजन या रिफंड की प्रक्रिया तय की जाती है।
4. आरटीओ में फिजिकल इंस्पेक्शन
इसके पश्चात वाहन को प्रत्यक्ष जांच हेतु नजदीकी आरटीओ ले जाना अनिवार्य होता है, जहां मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) गाड़ी के विभिन्न हिस्सों का तकनीकी परीक्षण करता है। व्यावसायिक नियमों के तहत कई राज्यों में गाड़ियों में स्पीड गवर्नर (स्पीड लिमिटर), रियर पार्किंग सेंसर, हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी), व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी/जीपीएस) तथा पैनिक बटन लगे होना अनिवार्य बनाया गया है।
5. फिटनेस प्रमाण पत्र, परमिट और पीली नंबर प्लेट
एमवीआई द्वारा तकनीकी जांच पास होने के बाद वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट तैयार किया जाता है। इसके उपरांत कार्यक्षेत्र की जरूरत के अनुसार लोकल, स्टेट अथवा ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (एआईटीपी) के लिए आवेदन करना होता है। सभी विभागीय स्वीकृतियां पूरी होने के बाद आरटीओ से नई आरसी जारी होती है, जिसमें वाहन की श्रेणी कमर्शियल/टैक्सी दर्ज रहती है। अंत में अधिकृत डीलर के माध्यम से गाड़ी पर पीली पृष्ठभूमि वाली एचएसआरपी लगवाकर संचालन शुरू किया जा सकता है।



















