बिहार की राजधानी में आधुनिक तकनीकी आधारभूत ढांचे को रफ्तार देने के लिए सोमवार को कैबिनेट स्तर पर बड़ा फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में संपन्न हुई मंत्रिमंडल की बैठक में पटना स्थित गर्दनीबाग में प्रदेश का पहला टेक पार्क विकसित करने की योजना पर मुहर लगाई गई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) करने की प्रशासनिक हरी झंडी मिल चुकी है। राज्य के आईटी विभाग के मुताबिक, बिहार वित्त (संशोधन) नियमावली के प्रावधानों के अंतर्गत नामांकन आधार पर एनबीसीसी (इंडिया) का चयन किया गया है, जिसके साथ शीघ्र ही आधिकारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
आईटी और विनिर्माण क्षेत्र में भारी निवेश आकर्षित करने का खाका
राजधानी पटना में प्रस्तावित गर्दनीबाग टेक पार्क राज्य के भीतर आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं (ITES) के पूरे तंत्र को एक नई पहचान देगा। प्रशासन का आकलन है कि आधुनिक कारोबारी सुविधाओं से लैस इस परिसर के जरिए बड़े महानगरों की तर्ज पर स्थानीय स्तर पर तकनीकी इकोसिस्टम मजबूत होगा। यह परिसर सूचना प्रौद्योगिकी के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण (ESDM) उद्योग से जुड़े निवेशकों को भी आकर्षित करेगा। नीतिगत स्तर पर इस परियोजना को बिहार आईटी पॉलिसी 2024 और बिहार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) पॉलिसी 2026 के साथ जोड़ा गया है, जिससे तकनीकी कंपनियों को राज्य में अपना कामकाज स्थापित करने में मदद मिलेगी।
रोजगार के नए मौके और युवाओं के पलायन पर रोक की रणनीति
सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस टेक हब के विकसित होने के बाद 100 से ज्यादा देशी-विदेशी कंपनियों के यहां निवेश करने की प्रबल संभावना है। इसके संचालन से सीधे तौर पर 5,000 से अधिक कुशल पेशेवरों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य बिहार के शिक्षित व तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को गृह राज्य में ही करियर के बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना है। इससे आजीविका की खोज में बड़े शहरों की ओर रुख करने वाले युवाओं के पलायन पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
दरभंगा में लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो हब के लिए बजट संशोधन
औद्योगिक और वाणिज्यिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के क्रम में मंत्रिमंडल ने दरभंगा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के समीप बनने वाले लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो हब के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला लिया। इस परियोजना के वास्ते कुल 49.9973 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना है, जिसके लिए पूर्व में 50 एकड़ भूमि हेतु 138 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। हालांकि, भूमि मुआवजे के नए आकलन और दरों में हुई वृद्धि के बाद कैबिनेट ने संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति देते हुए इस बजट को बढ़ाकर 225 करोड़ रुपये कर दिया है। यह केंद्र तैयार होने से मिथिलांचल समेत पूरे उत्तर बिहार के फल, सब्जी और अन्य कृषि उत्पादों को हवाई मार्ग के जरिए देश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों व अन्य राज्यों तक शीघ्रता से पहुंचाने में उल्लेखनीय मदद मिलेगी।

















