माजरा क्या है
पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव अब थमता दिख रहा है। अमेरिका और ईरान शांति वार्ता पर राजी हो गए हैं, और इसी के साथ दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में गिने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल खोलने पर भी सहमति बन गई है। राष्ट्रपति Donald Trump ने खुद बताया कि शांति प्रस्ताव के मसौदे पर आगामी शुक्रवार को जेनेवा में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे।
होर्मुज के ब्लॉकेड की वजह से इसके दोनों ओर — फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी — दुनियाभर के कई जहाज अटके पड़े हैं। इन टैंकरों में LPG और तेल के साथ-साथ अन्य सामान भी लदा है, और आशंका जताई जा रही है कि इनमें भारत के भी कुछ टैंकर शामिल हैं। समझौते की खबर सामने आते ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आगे LPG से लेकर पेट्रोल-डीजल तक के दाम घटने की उम्मीद बंधी है।
भारत के लिए होर्मुज इतना अहम क्यों है
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है, और भारत के लिए इसका महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि देश के कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर पहुंचता है। यही कारण है कि खाड़ी क्षेत्र में हालात बिगड़ते ही भारत सरकार अपने समुद्री और ऊर्जा हितों की रक्षा के लिए सक्रिय हो गई थी।
केंद्र सरकार ने 31 मई को जानकारी दी थी कि उच्च प्राथमिकता वाला एक अभियान शुरू करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूद 13 भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना पर अमल किया जा रहा है। यह कदम ऐसे वक्त उठाया गया जब इलाके की सुरक्षा स्थिति लगातार पेचीदा होती जा रही थी। अब शांति समझौते पर सहमति के बाद इस अहम समुद्री मार्ग पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते की 14 मुख्य बातें
- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध का स्थायी और तत्काल अंत।
- अमेरिका की प्रतिबद्धता कि वह ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा और इस्लामी गणराज्य ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा।
- 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकाबंदी को पूरी तरह खत्म किया जाएगा।
- अमेरिका की प्रतिबद्धता कि वह ईरान के आसपास के इलाकों से अपनी सैन्य मौजूदगी हटा लेगा।
- ईरान द्वारा तय व्यवस्थाओं के तहत 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना।
- ईरानी तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनके उपोत्पादों पर लगे प्रतिबंध निलंबित करना तथा उनसे होने वाली आय तक ईरान की पूरी पहुंच पक्की करना।
- अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना पेश करना।
- परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों पर अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों तक वार्ता जारी रखना।
- ईरान द्वारा परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत परमाणु हथियार न बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराना।
- वार्ता की अवधि में अमेरिका द्वारा क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल न भेजने और नए प्रतिबंध न लगाने का वादा।
- ईरान की 24 अरब डॉलर की जमी हुई परिसंपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करना।
- समझौते के क्रियान्वयन पर निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग तंत्र खड़ा करना।
- अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के जरिए मान्यता देना।
- अंतिम वार्ता तभी शुरू होगी जब ईरान की आधी जमी हुई संपत्तियां जारी हों, तेल प्रतिबंध निलंबित हों और नौसैनिक नाकाबंदी हटा ली जाए।
भारत के कौन-कौन से जहाज फंसे हैं
पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय में निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया था कि मंत्रालय ने अलग-अलग एजेंसियों के साथ मिलकर भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए एक समन्वित योजना बनाई है। उनके मुताबिक मई के अंत तक होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में कुल 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद थे। इनमें एक एलपीजी टैंकर, पांच कच्चा तेल ले जाने वाले टैंकर, एक केमिकल या प्रोडक्ट टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर शामिल है। सरकार ने इन सभी जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया था।
शिपिंग मंत्रालय की तैयारी
समुद्री सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को देखते हुए संबंधित एजेंसियां चौबीसों घंटे हालात पर नजर रख रही हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया था कि उसके अधिकारी भारतीय मिशनों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के साथ लगातार तालमेल बनाए हुए हैं, ताकि भारतीय नाविकों की सलामती सुनिश्चित हो और समुद्री परिचालन बिना किसी रुकावट के चलता रहे। जहाजरानी महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) का बनाया आपातकालीन नियंत्रण कक्ष लगातार सक्रिय है, और इसकी स्थापना के बाद से मई के अंत तक उसे 10,800 से अधिक फोन कॉल और 24,000 से ज्यादा ईमेल मिल चुके थे।
क्या वाकई सस्ता होगा ईंधन
अगर फंसे टैंकर सुरक्षित भारत पहुंचते हैं और होर्मुज खुलने से आपूर्ति सहज होती है, तो LPG, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में नरमी आने की गुंजाइश बनती है। समझौते की खबर के बाद कच्चे तेल के दाम पहले ही गिरे हैं। हालांकि घरेलू स्तर पर गैस और तेल सस्ता होगा या नहीं, यह आखिरकार सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।













