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क्रूड 70 डॉलर के करीब लुढ़का, ईरान की वापसी से भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीदव्यापार
25 जून 2026, 7:02 am (45 दिन पहले)· 2

क्रूड 70 डॉलर के करीब लुढ़का, ईरान की वापसी से भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरकर अमेरिका-ईरान तनाव से पहले वाले स्तर पर लौट आए हैं, जिससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की संभावना बढ़ गई है।

तेल की महंगाई से जूझ रहे भारतीय ग्राहकों के लिए एक अच्छी खबर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से नीचे आ गए हैं और भाव अब वहीं पहुंच गया है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच टकराव शुरू होने से पहले था। दिन के कारोबार में तो ब्रेंट क्रूड एक समय 70 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे फिसल गया था। फिलहाल यह 0.46 फीसदी की गिरावट के साथ 73.28 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा है। वहीं अमेरिकी कच्चा तेल भी लुढ़ककर 69.95 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

कच्चे तेल में आई इस बड़ी नरमी का सीधा फायदा यह हो सकता है कि देश के अंदर पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती का रास्ता खुले। बीते कुछ हफ्तों में मध्य-पूर्व में पैदा हुए संकट की वजह से तेल की कीमतों में जो जबरदस्त उछाल आया था, वह अब लगभग पूरी तरह गायब हो चुका है।

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दामों में गिरावट की असली वजह

कीमतों के इस तरह टूटने के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान की वैश्विक तेल बाजार में दोबारा वापसी है। अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति के बाद अब बड़ी तादाद में तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से अपनी ट्रैकिंग प्रणाली चालू रखते हुए सुरक्षित निकल रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि दुनिया भर में तेल की आपूर्ति एक बार फिर सामान्य पटरी पर लौटती दिख रही है।

इस समय खरीदारों की पौ-बारह है, क्योंकि बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता उम्मीद से कहीं ज्यादा हो गई है। रिफाइनरी कंपनियों और खरीदारों के पास मध्य-पूर्व से लेकर पश्चिम अफ्रीका तक, दुनिया के तमाम बड़े तेल निर्यातक इलाकों से लगातार नए सौदों के प्रस्ताव आ रहे हैं। माना जा रहा है कि ईरान के विशाल तेल भंडार के बाजार में उतरने से आने वाले दिनों में सप्लाई और बढ़ेगी, जिससे दाम और नीचे जा सकते हैं।

बाजार में दिखा बेयरिश कॉन्टैंगो

कीमतों में आई इस सुस्ती का असर ब्रेंट क्रूड के प्रॉम्प्ट स्प्रेड पर भी साफ नजर आने लगा है। बुधवार को तेल बाजार का यह बेहद अहम संकेतक मध्य-पूर्व में टकराव शुरू होने के बाद पहली बार तकनीकी तौर पर बेयरिश कॉन्टैंगो की स्थिति में पहुंच गया।

कमोडिटी जानकारों का कहना है कि बेयरिश कॉन्टैंगो का सीधा मतलब यही होता है कि इस वक्त बाजार में तुरंत मिलने वाले तेल की मांग के मुकाबले उसकी सप्लाई कहीं ज्यादा है। यह इस बात का तकनीकी इशारा है कि निकट भविष्य में भी कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रहने वाला है।

सवाल-जवाब

अभी ब्रेंट क्रूड का भाव क्या है?
ब्रेंट क्रूड फिलहाल 0.46 फीसदी की गिरावट के साथ 73.28 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जबकि दिन में यह एक समय 70 डॉलर के नीचे चला गया था।
अमेरिकी कच्चे तेल का भाव कितना है?
अमेरिकी कच्चा तेल लुढ़ककर 69.95 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
कच्चे तेल में गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?
सबसे बड़ी वजह ईरान की वैश्विक तेल बाजार में दोबारा एंट्री है, जिससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई बढ़ रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की इसमें क्या भूमिका है?
अमेरिका-ईरान के बीच समझौते के बाद बड़ी संख्या में तेल टैंकर अपनी ट्रैकिंग प्रणाली चालू रखकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजर रहे हैं, जिससे आपूर्ति सामान्य हो रही है।
क्या इससे भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?
कच्चे तेल में आई भारी गिरावट से घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम सस्ते होने की तगड़ी संभावना बन रही है।
बेयरिश कॉन्टैंगो का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि बाजार में तुरंत मिलने वाले तेल की मांग के मुकाबले सप्लाई ज्यादा है, जो आगे भी कीमतों पर दबाव बने रहने का तकनीकी संकेत है।
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