भारतीय परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में भारतीय रेलवे ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेलवे नेटवर्क पर ट्रेनों की आवाजाही को सुगम बनाने, माल ढुलाई की रफ्तार बढ़ाने और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के उद्देश्य से कुल ₹675 करोड़ की तीन बड़ी परियोजनाओं पर मुहर लगाई गई है। इन पहलों के तहत उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और आसपास के रेल रूटों का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिससे भविष्य में ट्रेन दुर्घटनाओं के जोखिम को न्यूनतम करने में मदद मिलेगी।
मुरादाबाद मंडल में कवच 4.0 पर खर्च होंगे 170 करोड़ रुपये
उत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाले मुरादाबाद मंडल के शेष बचे 712 रूट किलोमीटर हिस्से में आधुनिक कवच 4.0 प्रणाली स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस कार्य के लिए ₹170 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम रेल सुरक्षा कवच के रूप में काम करता है। यह प्रणाली आपात स्थिति या मानवीय चूक के कारण सिग्नल ओवरशूट होने की दशा में ट्रेन को स्वतः नियंत्रित करने में सक्षम है। जरूरत पड़ने पर यह सिस्टम अपने आप ब्रेक लगा देता है और निर्धारित गति सीमा को बनाए रखता है, जिससे आमने-सामने या पीछे से होने वाली ट्रेनों की टक्कर की आशंका काफी हद तक टल जाती है।
समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर बदलेगी सिग्नलिंग व्यवस्था
पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल में यात्रियों और मालगाड़ियों के संचालन को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा रहे हैं। इस मंडल के 21 स्टेशनों पर पुराने पैनल इंटरलॉकिंग सिस्टम को पूरी तरह हटाकर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली लगाई जाएगी। इस परियोजना पर ₹233 करोड़ खर्च किए जाएंगे। कंप्यूटर आधारित यह तकनीक तकनीकी खराबी का तुरंत पता लगाने, रखरखाव के कार्यों को आसान बनाने और समग्र ट्रेन संचालन को व्यवस्थित रखने में मददगार साबित होगी। इसके अलावा, यह उन्नत सिग्नलिंग नेटवर्क भविष्य में इस क्षेत्र में कवच प्रणाली के विस्तार के लिए एक मजबूत तकनीकी आधार भी तैयार करेगा।
आद्रा और जॉयचंडीपहाड़ के बीच बनेगी नई बाईपास लाइन
मालगाड़ियों की आवाजाही को गति देने और मुख्य मार्गों पर Passenger ट्रेनों का दबाव कम करने के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे में एक नई बाईपास लाइन बिछाई जाएगी। आद्रा और जॉयचंडीपहाड़ के बीच बनने वाली इस 11 किलोमीटर लंबी नई बाईपास लाइन के निर्माण के लिए ₹272 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इस परियोजना के मूर्त रूप लेने से औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाले माल की ढुलाई कहीं अधिक सुचारु हो सकेगी। वर्तमान रूट पर ट्रेनों की भारी भीड़ और ऑपरेशनल बाधाएं कम होने से अतिरिक्त फ्रेट ट्रैफिक को संभालने की रेलवे की क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा।
सुरक्षा और क्षमता विस्तार की ओर एक और कदम
इन तीनों परियोजनाओं की प्रकृति और क्षेत्र भले ही अलग हों, लेकिन सबका साझा उद्देश्य भारतीय रेलवे की रीढ़ को मजबूत करना है। मुरादाबाद में अत्याधुनिक कवच प्रणाली लगने से जहां यात्री सुरक्षा पुख्ता होगी, वहीं समस्तीपुर में नई सिग्नलिंग से संचालन त्रुटिहीन बनेगा। इसके साथ ही, आद्रा-जॉयचंडीपहाड़ बाईपास माल परिवहन की राह की अड़चनों को दूर करेगा। कुल मिलाकर यह वित्तीय आवंटन देश के रेल यात्रियों और औद्योगिक सेक्टर दोनों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होने वाला है।



















