अमेरिकी डॉलर (USD) की पूर्व में आई गिरावट के बाद वित्तीय बाजार के जानकारों ने अपने पूर्वानुमानों को नए सिरे से तैयार किया है। इसके बावजूद शुरुआती 2027 तक डॉलर में हल्की मजबूती का रुख बने रहने की उम्मीद जताई जा रही है। ओसीबीस के रणनीतिकार सिम मोह सियोंग और क्रिस्टोफर वोंग का यह आकलन बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श का जैक्सन होल सम्मेलन के दौरान दिया गया आक्रामक बयान और अमेरिका में आर्थिक वृद्धि की मजबूत स्थिति डॉलर को निरंतर समर्थन दे रही है। इसके अलावा, महंगाई के स्तर में बनी स्थिरता भी इस बात की तस्दीक करती है कि केंद्रीय बैंक की नीतियां सख्त बनी रह सकती हैं, जिससे डॉलर इंडेक्स (DXY) में धीरे-धीरे ऊपर की ओर जाने की प्रवृत्ति बरकरार है।
नीतिगत अनिश्चितता और बाजार की प्रतिक्रिया
जानकारों के अनुसार, ट्रेजरी विभाग की ओर से यूरो और येन में अचानक किए गए हस्तक्षेप तथा विस्तारित बायबैक योजनाओं के कारण नीतिगत अनिश्चितता पैदा हुई थी, जिसकी वजह से डॉलर में पहले कमजोरी देखने को मिली थी। हालांकि, अब बाजार की स्थिति जून के बाद हुई एफओएमसी बैठक के जैसी ही नजर आ रही है, जहां निवेशक एक बार फिर महंगाई के जोखिमों और केंद्रीय बैंक की साख पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अमेरिकी श्रम बाजार का मजबूत बने रहना, महंगाई का नीचे न आना और फेडरल रिजर्व का अपनी साख बचाने का संकल्प यह दर्शाता है कि मौद्रिक नीति में सख्ती का रुख जारी रहेगा। यही वजह है कि डॉलर को लगातार आधार मिल रहा है, और मुद्रा बाजार में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।
विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख जोड़ियों का हाल
यूरोपीय सत्र के दौरान, ब्रिटिश पाउंड और डॉलर की जोड़ी (GBP/USD) मामूली गिरावट के साथ 1.3550 के स्तर से नीचे कारोबार कर रही है। मध्य पूर्व में जारी तनाव और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आक्रामक उम्मीदों के बीच डॉलर ने अपनी स्थिति में कुछ सुधार किया है, जिसका असर इस जोड़ी पर पड़ रहा है। उधर, यूरो और डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) यूरोपीय कारोबारी घंटों में 1.1600 के आसपास संघर्ष करती नजर आ रही है। बाजार के व्यापारी अब यूरो क्षेत्र के सामंजस्यपूर्ण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के शुरुआती आंकड़ों पर अपनी नजरें गड़ाए बैठे हैं, जिससे उन्हें आगे के कारोबार के लिए नई दिशा मिल सके। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में भी यूरोपीय सत्र की शुरुआत में मामूली गिरावट देखी गई और यह 4,430 डॉलर के आसपास टिक हुआ है, जो पिछले दिन के डेढ़ हफ्ते के निचले स्तर के काफी करीब है।
क्रिप्टोकरेंसी और वैश्विक बाजारों में सुस्ती
डिजिटल मुद्राओं के मोर्चे पर, पिछले सप्ताह दहाई अंकों की भारी गिरावट का सामना करने के बाद रिपल, कार्डानो और डॉगकॉइन अभी भी कमजोरी के दौर से गुजर रहे हैं। ये सभी टोकन अपने महत्वपूर्ण एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के आसपास तत्काल समर्थन की तलाश में हैं। तकनीकी दृष्टिकोण से यह संकेत मिलता है कि जैसे-जैसे तेजी का रुझान कम हो रहा है, एक्सआरपी, एडा और डॉगकॉइन की कीमतों में आगे चलकर और नरमी आ सकती है। इसके साथ ही, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी का सिलसिला जारी है। ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतों का ऊंचे स्तर पर बने रहना, निवेशकों द्वारा सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीद करना और राजकोषीय जोखिम प्रीमियम में बढ़ोतरी इस रुझान के मुख्य कारण माने जा रहे हैं। मध्य पूर्व के तनाव ने एक बार फिर तेल की कीमतों को 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंचा दिया है, भले ही यह उछाल बहुत बड़ा न रहा हो, लेकिन इसने लंबे समय तक ऊंची कीमतों के दौर को बल दिया है।
कच्चे तेल और डीजल बाजार की स्थिति
कच्चे तेल का बाजार भले ही कुछ महीने पहले की तुलना में शांत नजर आ रहा हो, लेकिन डीजल बाजार से बिल्कुल अलग संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, जो वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की तुलना में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम होता है, हाल ही में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है और इसने 102.00 डॉलर से थोड़ा ऊपर एक इंट्राडे रिकॉर्ड स्तर को छुआ है। इसी बीच, वर्तमान कारोबारी सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती दर्ज की गई है और यह 87.92 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 85.76 डॉलर से 2.52 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। तकनीकी संकेतकों के अनुसार, बाजार में 52-सप्ताह का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है और तकनीकी मापदंडों में मूविंग एवरेज का रुख सकारात्मक बना हुआ है, हालांकि सूचकांक वर्तमान में सीमित दायरे में कारोबार कर रहे हैं।



















