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उत्तराखंड के अल्मोड़ा में भारी भूस्खलन, मलबे की चपेट में आने से तीन लोगों की मौतभारत
1 सित॰ 2026, 2:14 pm (67 दिन पहले)· 2

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में भारी भूस्खलन, मलबे की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर क्षेत्र में भारी भूस्खलन के कारण एक मकान ढह गया, जिससे मलबे में दबकर तीन लोगों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दुखद हादसे पर गहरी संवेदना व्यक्त की है।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में कुदरत का कहर देखने को मिला है। यहां सोमेश्वर थाना क्षेत्र के वडयूडा गांव में भारी भूस्खलन की वजह से एक आवासीय मकान मलबे में तब्दील हो गया। इस भयंकर हादसे में मकान के भीतर मौजूद तीन लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई है। दुर्घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया और फौरन राहत एवं बचाव कार्यों को शुरू किया गया। घटनास्थल पर राज्य आपदा मोचन बल यानी SDRF, जिला पुलिस और दमकल विभाग की टीमें तुरंत सक्रिय हुईं और मलबे से तीनों शवों को बाहर निकाला गया। हालांकि, इसी मकान में मौजूद एक अन्य व्यक्ति चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बचने में कामयाब रहा जो घटना के समय बाहर के कमरे में सो रहा था। इस गंभीर हादसे के बाद राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर गहरा शोक प्रकट किया है।

सड़क मार्ग बंद होने के कारण पैदल पहुंचे बचावकर्मी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आज सुबह प्रशासन को यह दुखद सूचना मिली थी कि सोमेश्वर क्षेत्र के वडयूडा में एक मकान ढह गया है और लोग अंदर फंस गए हैं। खबर मिलते ही सरियापानी पोस्ट से उपनिरीक्षक पंकज डंगवाल के नेतृत्व में SDRF की टीम फौरन घटनास्थल के लिए रवाना हुई। हालांकि बचाव दल के लिए मौके पर पहुंचना आसान नहीं था क्योंकि घटनास्थल से लगभग 03 किलोमीटर पहले ही रास्ते पर मलबा आ जाने के कारण सड़क मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया था। इसके बाद SDRF के जवानों ने हार नहीं मानी और जरूरी रेस्क्यू उपकरणों के साथ पैदल ही उस दुर्गम रास्ते को तय करके घटनास्थल तक का सफर तय किया।

मलबे से तीन शव बरामद और एक की बची जान

मौके पर पहुंचने के बाद SDRF की टीम ने स्थानीय नागरिकों, दमकल विभाग और जिला पुलिस के साथ मिलकर युद्ध स्तर पर खोजबीन और बचाव अभियान चलाया। काफी मशक्कत के बाद बचाव दल ने मलबे के अंदर से तीन लोगों के शवों को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। मृतकों की पहचान प्रेमा देवी जिनकी उम्र 42 वर्ष है, कल्पना आर्या जिनकी उम्र 19 वर्ष है और मनीष कुमार जिनकी उम्र 18 वर्ष है, के रूप में हुई है। वहीं दूसरी ओर गुलाब राम नाम के एक अन्य व्यक्ति की जान बाल-बाल बच गई क्योंकि वे मुख्य कमरे के बजाय मकान के बाहर वाले हिस्से में सो रहे थे, जिस वजह से वे भवन ढहने के दौरान सुरक्षित बाहर निकलने में पूरी तरह सफल रहे। फिलहाल स्थानीय पुलिस ने सभी शवों को अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया गहरा दुख

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस भीषण हादसे पर गहरी वेदना व्यक्त की है। उन्होंने X पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि अल्मोड़ा के सोमेश्वर अंतर्गत ग्राम वडयूडा में अतिवृष्टि एवं भूस्खलन के कारण हुई जनहानि का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की है कि वे दिवंगतों की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और इस कठिन समय में उनके शोक संतप्त परिजनों को यह गहरा दुःख सहन करने की पूरी शक्ति प्रदान करें।

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सवाल-जवाब

अल्मोड़ा में यह हादसा कहां हुआ?
यह हादसा अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर थाना क्षेत्र के वडयूडा गांव में हुआ।
हादसे में कितने लोगों की मौत हुई है?
इस भूस्खलन और मकान ढहने की घटना में मलबे में दबकर तीन लोगों की मौत हो गई।
मृतकों की पहचान क्या है?
मृतकों की पहचान प्रेमा देवी (42 वर्ष), कल्पना आर्या (19 वर्ष) और मनीष कुमार (18 वर्ष) के रूप में हुई है।
क्या इस हादसे में कोई सुरक्षित भी बचा है?
हाँ, गुलाब राम नामक एक व्यक्ति मकान के बाहर वाले कमरे में सो रहे थे, जो सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे।
किस मुख्यमंत्री ने इस हादसे पर दुख व्यक्त किया है?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·66 दिन पहले

अल्मोड़ा की यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण और जलवायु परिवर्तन के खतरनाक मेल को उजागर करती है। सड़क मार्ग का अवरुद्ध होना और बचाव दलों का पैदल पहुंचना यह साबित करता है कि हिमालयी राज्यों में आपदा प्रबंधन के बुनियादी ढांचे को तुरंत अपग्रेड करने की सख्त जरूरत है। आने वाले दिनों में ऐसी भौगोलिक चुनौतियों से निपटने के लिए संवेदनशील ज़ोन्स में अर्ली वार्निंग सिस्टम और स्थानीय स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया बलों को मजबूत करना होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·66 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस त्रासदी में पुलिस और एसडीआरएफ की त्वरित कानूनी और बचाव कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह मामला केवल आपदा प्रबंधन तक सीमित नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रहे भूस्खलन और इस तरह के मकानों के ढहने की घटनाओं की गहन तकनीकी जाँच अनिवार्य होनी चाहिए। स्थानीय पुलिस और प्रशासन को यह देखना होगा कि क्या ऐसे संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी तो नहीं की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसे आपराधिक या प्रशासनिक मामलों में जवाबदेही तय की जा सके।

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