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राजस्थान चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा सियासी दांव, युवाओं को लुभाने के लिए शुरू हुआ खास डिजिटल अभियानराजस्थान
1 सित॰ 2026, 2:16 pm (56 मिनट पहले)· 2

राजस्थान चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा सियासी दांव, युवाओं को लुभाने के लिए शुरू हुआ खास डिजिटल अभियान

राजस्थान में आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने युवाओं और डिजिटल वोटर्स को अपने पाले में लाने के लिए Gen-Z कैंपेन का आगाज किया है। पार्टी इसके जरिए AI वर्कशॉप और करियर काउंसलिंग जैसे कई कदम उठा रही है।

आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के मद्देनजर राजस्थान में कांग्रेस पार्टी ने युवाओं और डिजिटल मतदाताओं को साधने की अपनी चुनावी तैयारियों को पूरी तरह से तेज कर दिया है। इसी सियासी रणनीति के तहत प्रदेश कांग्रेस सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म विभाग ने एक विशेष प्रोफेशनल Gen-Z कमेटी का गठन करने का औपचारिक ऐलान किया है और इसके साथ ही 'GenZ for Change' अभियान की भी विधिवत शुरुआत कर दी है। पार्टी का पूरा जोर इस बात पर है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय रहने वाले युवाओं और पहली बार मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेने जा रहे Gen-Z वर्ग को सीधे तौर पर राजनीतिक मंच के साथ जोड़ा जाए।

इस पूरी रणनीति के पीछे पार्टी का मुख्य उद्देश्य डिजिटल युग के इन युवाओं तक अपनी पहुंच बनाना है। प्रदेश कांग्रेस सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म विभाग के चेयरमैन सुमित भगासरा ने इस संबंध में अपनी बात रखते हुए कहा कि Gen-Z वर्ग की अपनी अनूठी समस्याएं और भविष्य की बड़ी आकांक्षाएं होती हैं, जिन्हें उनकी ही उम्र और सोच के लोग यानी Gen-Z युवा ही सबसे बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। इसी मूल सोच को आधार बनाकर इस नए अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसके माध्यम से युवाओं से सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा और उनकी तमाम मुश्किलों तथा मांगों को एक मजबूत राजनीतिक मंच के जरिए आवाज दी जाएगी।

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कैरियर और तकनीक पर रहेगा विशेष फोकस

शुरू किए गए 'GenZ for Change' अभियान के दायरे को काफी व्यापक रखा गया है, जिसके अंतर्गत युवाओं के कौशल विकास और भविष्य को ध्यान में रखते हुए कई बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से अत्याधुनिक AI वर्कशॉप, स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम, करियर काउंसलिंग सत्र, इंटर्नशिप के अवसर और डिजिटल एम्पॉवरमेंट से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां शामिल की गई हैं। इसके अलावा आज के दौर में डिजिटल माध्यमों पर सक्रिय रहने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को किसी भी कानूनी अड़चन या समस्या से बचाने के लिए उन्हें लीगल सपोर्ट उपलब्ध कराने की भी पुख्ता योजना बनाई गई है ताकि वे स्वतंत्र रूप से काम कर सकें।

कांग्रेस पार्टी का साफ तौर पर दावा है कि इन तमाम आयोजनों और गतिविधियों का मकसद केवल युवाओं को सतही तौर पर अपने राजनीतिक दल से जोड़ना भर नहीं है, बल्कि उनके वास्तविक करियर, उनकी डिजिटल योग्यताओं और रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान करना भी है। पार्टी चाहती है कि युवा वर्ग को मुख्यधारा की राजनीति के साथ-साथ आर्थिक और तकनीकी मोर्चे पर भी पूरा समर्थन मिले, जिससे वे समाज में एक प्रभावी बदलाव लाने की स्थिति में आ सकें।

जिला स्तर तक पहुंचाई जाएगी कमेटी

इस पूरे अभियान को केवल प्रदेश स्तर की बैठकों तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसकी पहुंच को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर भी Gen-Z कमेटियों का गठन करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। ये जिला स्तरीय कमेटियां अपने-अपने क्षेत्रों के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाकर सीधे युवाओं के साथ संवाद स्थापित करेंगी। परिसरों में युवाओं से मिलने वाले सुझावों और उनकी स्थानीय समस्याओं का संकलन कर उन्हें प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व तक पहुंचाने का अहम कार्य इन्हीं कमेटियों के जिम्मे होगा। इस अनूठी पहल के जरिए कांग्रेस पार्टी डिजिटल स्पेस के साथ-साथ शिक्षण संस्थानों के परिसरों में भी अपनी सांगठनिक मौजूदगी को और अधिक सुदृढ़ करने के प्रयास में जुटी हुई है।

इस दिशा में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से ताल्लुक रखने वाले Gen-Z प्रतिनिधियों ने भी खुलकर अपनी बात रखी और युवाओं से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर प्रकाश डाला। इस चर्चा में आईआईटीयन डेटा एनालिस्ट मोहित कुमार, एडवोकेट अनिरुद्ध सिंह, एसएमएस अस्पताल के डॉक्टर बंटी शर्मा और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पूजा चौधरी जैसे युवा चेहरे शामिल रहे, जिन्होंने अपनी कार्यशैली और अनुभवों के आधार पर युवाओं की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।

चुनाव से पहले सियासी समीकरण साधने की कोशिश

विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान में होने वाले आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी का यह कदम युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक और डिजिटल पकड़ को तेजी से मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर Gen-Z वर्ग को आधुनिक मुद्दों, तकनीक और आकर्षक डिजिटल अभियानों के माध्यम से अपने पाले में लाने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाती हुई नजर आ रही है। स्थानीय चुनावों के मुहाने पर खड़े इस राज्य में यह नया प्रयोग सियासी गलियारों में खासी चर्चा का विषय बना हुआ है।

सवाल-जवाब

राजस्थान कांग्रेस ने कौन सा नया अभियान शुरू किया है?
कांग्रेस ने युवाओं और डिजिटल मतदाताओं को जोड़ने के लिए 'GenZ for Change' कैंपेन की शुरुआत की है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य युवाओं को करियर, डिजिटल स्किल, रोजगार के मुद्दों पर जोड़ना और उनकी समस्याओं को राजनीतिक मंच तक पहुंचाना है।
प्रदेश कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग के चेयरमैन कौन हैं?
सुमित भगासरा इस विभाग के चेयरमैन हैं।
कैंपेन के तहत किस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे?
इसके तहत AI वर्कशॉप, स्किल डेवलपमेंट, करियर काउंसलिंग, इंटर्नशिप और डिजिटल एम्पॉवरमेंट जैसे कार्यक्रम आयोजित होंगे।
क्या यह अभियान केवल प्रदेश स्तर तक सीमित रहेगा?
नहीं, इसे प्रदेश स्तर के अलावा जिला स्तर पर भी Gen-Z कमेटियों के गठन के जरिए विस्तारित किया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कौन-से प्रमुख Gen-Z प्रतिनिधि शामिल हुए?
इसमें मोहित कुमार, अनिरुद्ध सिंह, डॉ. बंटी शर्मा और पूजा चौधरी ने युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·37 मिनट पहले

कांग्रेस के इस डिजिटल और Gen-Z अभियान में कंटेंट क्रिएटर्स को लीगल सपोर्ट देने का प्रावधान एक दिलचस्प कानूनी और राजनीतिक पहलू है। साइबर कानूनों और सोशल मीडिया नियमों के इस दौर में, डिजिटल मंचों पर सक्रिय युवाओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना और करियर आधारित AI वर्कशॉप जोड़ना यह तय करता है कि राजनीतिक दल अब वर्चुअल स्पेस के संभावित कानूनी जोखिमों और सुरक्षा को भी समझ रहे हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·36 मिनट पहले

करन मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यदि हम उत्तर प्रदेश और अन्य हिंदी पट्टी के राज्यों के चुनावी परिदृश्य से तुलना करें, तो यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय चुनावों में इस तरह के डिजिटल प्रयोग क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय कर रहे हैं। एआई वर्कशॉप और करियर काउंसलिंग जैसे मुद्दों को सीधे स्थानीय निकायों और पंचायतों से जोड़ना यह दर्शाता है कि राजनीतिक दल अब केवल पारंपरिक रैलियों तक सीमित नहीं रहना चाहते। हालांकि, जमीनी स्तर पर इन डिजिटल कमेटियों का कितना प्रभाव पड़ता है और क्या यह रणनीति शहरी युवाओं के साथ ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं तक पहुंच बना पाती है, यह आगामी चुनावी परिणामों में ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा।

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