पश्चिम एशिया से भारत के लिए अब अच्छी खबरें आने लगी हैं। दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर खुल गया है। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर होने के बाद से भारत की ओर तेल और गैस लेकर आ रहे जहाजों का सिलसिला लगातार जारी है। अब तक भारत आने वाले 30 से ज्यादा जहाज होर्मुज को पार कर चुके हैं, लेकिन दर्जनों जहाज अभी भी इस रास्ते से गुजरने के लिए कतार में खड़े हैं।
भारत के लिए क्यों इतना खास है होर्मुज
होर्मुज का यह समुद्री रास्ता सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद मायने रखता है। दुनिया भर में होने वाली कुल एनर्जी सप्लाई का पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। कतर से आने वाली गैस हो या खाड़ी देशों से मंगाया जाने वाला तेल, भारत अपना ज्यादातर माल इसी रास्ते से मंगाता है। LNG और LPG की खरीद के मामले में खाड़ी देश ही भारत के सबसे बड़े पार्टनर हैं, इसलिए इस रास्ते का बंद होना सीधे भारत की एनर्जी सप्लाई पर असर डालता है।
कितने जहाज पार कर चुके, क्या-क्या है उनमें
शिपिंग मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक भारत आने वाले अब तक 30 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं। इनमें से आधे जहाजों में LPG और LNG भरा हुआ है। इसके अलावा आठ जहाजों में बल्क कार्गो और सात क्रूड ऑयल टैंकर शामिल थे। इन 30 जहाजों में से 17 विदेशी झंडे वाले हैं, और इनमें सबसे ज्यादा पांच जहाज मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 मार्च से 17 जून के बीच 19 जहाजों ने होर्मुज को पार किया। वहीं ईरान और अमेरिका की ओर से MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद 11 जहाज सुरक्षित तरीके से इस जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं। इनमें से कुछ जहाज भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच चुके हैं और कुछ पहुंचने वाले हैं।
26 जहाज अब भी फंसे हैं समंदर में
राहत की खबरों के बीच चिंता की बात यह है कि भारत से जुड़े 26 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। फारस की खाड़ी होर्मुज के पश्चिम में पड़ती है और इन 26 जहाजों ने अब तक होर्मुज को पार नहीं किया है। इनमें भारतीय झंडे वाले जहाज भी हैं और भारत आने वाले विदेशी झंडे वाले जहाज भी। इन जहाजों में से तीन में ईंधन, दस में फर्टिलाइजर यानी खाद और बाकी 13 में दूसरा सामान लदा हुआ है।
कैसे शुरू हुआ था पूरा संकट
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था। इसके बाद से ही होर्मुज में हालात बिगड़ गए थे और जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ने लगा था। अब अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने के बाद यह अहम समुद्री रास्ता दोबारा खुल गया है, जिससे भारत की एनर्जी सप्लाई को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।













