वेदांता लिमिटेड की पावर सब्सिडियरी के शेयरों में कारोबारी सत्र के दौरान थोड़ी रिकवरी देखने को मिली, लेकिन अंततः यह हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन अपने 52-वीक लो के करीब बंद हुआ। यह गिरावट वेदांता पावर की ओर से डिमर्जर के बाद पहली बार जारी किए गए तिमाही नतीजों के ठीक बाद आई है, जिसमें कंपनी को मुख्य तौर पर वन-टाइम कॉस्ट के चलते भारी घाटा उठाना पड़ा है।
शुक्रवार, 7 अगस्त को बीएसई पर वेदांता पावर का शेयर 0.84 प्रतिशत की गिरावट के साथ 35.47 रुपये पर बंद हुआ। इस कारोबार के दौरान कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 13,870.15 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। दिनभर के कारोबार में इस स्टॉक ने 36.33 रुपये का इंट्राडे हाई और 35.31 रुपये का निचला स्तर छुआ।
हालांकि इस तिमाही में कंपनी को वन-टाइम लॉस और कुछ अल्पकालिक ऑपरेशनल बाधाओं का सामना करना पड़ा है, लेकिन इसका लॉन्ग-टर्म बिजनेस मॉडल काफी मजबूत स्थिति में है। कंपनी के पास 74 प्रतिशत यानी 3,080 मेगावाट के लॉन्ग-टर्म पावर परचेस कॉन्ट्रैक्ट्स हैं। इसके अलावा, 85 प्रतिशत सुरक्षित घरेलू कोल लिंकेज, 1,130 करोड़ रुपये की मजबूत कैश पोजीशन और अपग्रेडेड क्रेडिट रेटिंग्स इसे सपोर्ट करती हैं। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही तक शक्ति यूनिट 1 की बहाली पूरी हो जाएगी और वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही तक लगभग 600 मेगावाट की नई यूनिट 2 का विस्तार शुरू हो जाएगा, जिससे मुनाफा फिर से पटरी पर आ जाएगा।
शेयर डॉट मार्केट बाय फोनपे के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के अनुसार, तकनीकी चार्ट पर यह स्टॉक लगभग 50 रुपये के उच्च स्तर से फिसलने के बाद भारी गिरावट का सामना कर चुका है। चार्ट पर साफ डाउनवर्ड ट्रेंड दिखाई दे रहा है, जहां स्टॉक अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज यानी 37.93 रुपये के आसपास के 20 टीईएमए से नीचे गिरकर 33.82 रुपये के करीब ट्रेड कर रहा है। बिकवाली के दौरान हाई ट्रेडिंग वॉल्यूम इस बात का संकेत देते हैं कि पीक पर पहुंचने के बाद बड़े मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने मुनाफावसूली की है।
खुदरा निवेशकों को सलाह देते हुए मयंक जैन ने गिरते हुए चाकू को पकड़ने से बचने की हिदायत दी है। उनका कहना है कि केवल इसलिए किसी शेयर को खरीद लेना क्योंकि वह अपने ऊपरी स्तर से गिरने के बाद सस्ता लग रहा है, बहुत जोखिम भरा हो सकता है जबकि कीमत अभी भी लगातार नीचे की ओर फिसल रही है। इस समय छोटे निवेशकों के लिए सबसे समझदारी भरी रणनीति यह है कि वे इंतजार करें और स्थिति पर नजर बनाए रखें। जल्दबाजी में कूदने के बजाय उस समय का इंतजार करें जब कीमत स्थिर हो जाए और मजबूत खरीदारी वॉल्यूम के साथ मूविंग एवरेज से ऊपर दोबारा लौटने या कोई स्पष्ट तकनीकी रिवर्सल पैटर्न बनाने का संकेत मिले।
वित्तीय आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का नेट कंसोलिडेटेड लॉस 423 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान अवधि में कंपनी को 88 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ था। इसके अलावा, दिसंबर तिमाही में कंपनी ने 139 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। समीक्षाधीन तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 2,607 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के 1,986 करोड़ रुपये की तुलना में 31 प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में ऑपरेशंस से कुल रेवेन्यू 2,684 करोड़ रुपये था।



















