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राजस्थान के पाली में खारी और बंजर जमीन से उगेगा ड्रैगन फ्रूट, किसानों की तकदीर बदलने की तैयारीव्यापार
4 जुल॰ 2026, 12:24 pm (45 दिन पहले)· 3

राजस्थान के पाली में खारी और बंजर जमीन से उगेगा ड्रैगन फ्रूट, किसानों की तकदीर बदलने की तैयारी

पाली जिले के रोहट में खारे पानी और कड़ी जमीन के बीच कृषि विज्ञान केंद्र ने ड्रैगन फ्रूट की खेती का सफल प्रयोग किया है, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद जगी है.

राजस्थान के पाली जिले में रोहट इलाके की पहचान अब तक कड़ी और खारी जमीन के लिए होती रही है, जहां भूजल में नमक की मात्रा इतनी ज्यादा है कि आम फसलें उगाना भी किसानों के लिए एक चुनौती बन जाता है. लेकिन अब यही चुनौती एक नए मौके में बदलती दिख रही है. पाली के कृषि विज्ञान केंद्र और रोहट के कुछ प्रगतिशील किसानों ने मिलकर एक ऐसा प्रयोग किया है, जिसने इस बंजर और खारी जमीन पर विदेशी फल ड्रैगन फ्रूट उगाने की राह खोल दी है.

रोहट में खारे पानी ने वर्षों से किसानों को परेशान किया

पाली जिले के रोहट और उसके आसपास के इलाकों में खेती करने वाले किसानों के सामने सालों से एक ही समस्या रही है, जमीन में सेलिनिटी यानी लवणीयता और पानी का खारापन. इस वजह से किसानों के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता था कि आखिर किस फसल या फल की खेती की जाए, जो इस कठिन परिस्थिति में भी टिक सके और मुनाफा भी दे सके. इसी सवाल का हल निकालने के लिए कृषि विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सिंह तेतरवाल ने एक खास प्रोजेक्ट तैयार किया, जिसे आने वाले समय में क्षेत्र के किसानों के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है.

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खारी मिट्टी में भी ड्रैगन फ्रूट ने दिखाए दमदार नतीजे

डॉ. तेतरवाल के मुताबिक रोहट और पाली के जिन हिस्सों में पानी खारा है और मिट्टी में भारी सेलिनिटी पाई जाती है, वहां ड्रैगन फ्रूट की खेती के नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे हैं. ड्रैगन फ्रूट में कम पानी में और लवणीय वातावरण में भी टिके रहने की गजब की क्षमता होती है. यही वजह है कि रोहट जैसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों के लिए यह एक नया और उभरता हुआ फल साबित हो सकता है.

पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नए फल अपनाने की सलाह

डॉ. तेतरवाल ने क्षेत्र के किसानों से कहा है कि जो लोग बरसों से सिर्फ पुरानी और पारंपरिक फसलें ही उगाते आए हैं, उन्हें अब अपनी सोच और तरीकों में बदलाव लाने की जरूरत है. अगर किसान अपने खेतों में ड्रैगन फ्रूट जैसे नए और ज्यादा कीमत दिलाने वाले फलों को शामिल करें, तो उनकी कमाई में बड़ा उछाल आ सकता है और आमदनी दोगुनी होने के आसार भी काफी बढ़ जाएंगे. उनका कहना है कि ड्रैगन फ्रूट एक ऐसा फल है, जो आगे चलकर रोहट और पाली के किसानों की आर्थिक हालत मजबूत कर उनकी किस्मत बदल सकता है.

प्रोजेक्ट से किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक आधार पर सही फल चुनने में सहारा

आमतौर पर खारे पानी के डर से किसान नया बाग लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते. डॉ. तेतरवाल के इस प्रोजेक्ट का मकसद यही है कि किसानों को वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर यह समझने में मदद मिले कि उनकी जमीन और पानी की गुणवत्ता के हिसाब से कौन सा फल सबसे मुफीद रहेगा. इस प्रोजेक्ट के तहत किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़ा तकनीकी मार्गदर्शन और प्रोत्साहन भी दिया जाएगा, ताकि रोहट और पाली के खेतों में खेती के तरीकों में एक नई शुरुआत हो सके और किसानों की तस्वीर बदल सके.

सवाल-जवाब

रोहट के किसानों की सबसे बड़ी समस्या क्या रही है?
रोहट और आसपास के इलाकों में जमीन कड़ी और पानी खारा है, जिस वजह से सेलिनिटी सालों से किसानों के लिए बड़ी समस्या रही है.
ड्रैगन फ्रूट का यह प्रोजेक्ट किसने तैयार किया?
कृषि विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सिंह तेतरवाल ने किसानों को खारी जमीन के लिए सही फल चुनने में मदद करने के मकसद से यह प्रोजेक्ट तैयार किया.
खारी जमीन के लिए ड्रैगन फ्रूट को खास क्यों बताया जा रहा है?
ड्रैगन फ्रूट कम पानी और लवणीय वातावरण को सहन करने की क्षमता रखता है, इसलिए खारे इलाकों में भी इसके नतीजे बेहद शानदार रहे हैं.
इस प्रोजेक्ट से किसानों को क्या मदद मिलेगी?
किसानों को वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर सही फल चुनने में मदद मिलेगी, साथ ही ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और प्रोत्साहन भी दिया जाएगा.
क्या इससे किसानों की आय दोगुनी हो सकती है?
डॉ. तेतरवाल के मुताबिक ड्रैगन फ्रूट जैसे उच्च मूल्य वाले फल अपनाने से किसानों की आय में भारी बढ़ोतरी हो सकती है और उसे दोगुना करने के चांस भी बढ़ेंगे.
यह प्रोजेक्ट किस क्षेत्र के किसानों के लिए है?
यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से पाली जिले के रोहट और आसपास के खारे पानी वाले इलाकों के किसानों के लिए है.
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