राजस्थान के पाली जिले में रोहट इलाके की पहचान अब तक कड़ी और खारी जमीन के लिए होती रही है, जहां भूजल में नमक की मात्रा इतनी ज्यादा है कि आम फसलें उगाना भी किसानों के लिए एक चुनौती बन जाता है. लेकिन अब यही चुनौती एक नए मौके में बदलती दिख रही है. पाली के कृषि विज्ञान केंद्र और रोहट के कुछ प्रगतिशील किसानों ने मिलकर एक ऐसा प्रयोग किया है, जिसने इस बंजर और खारी जमीन पर विदेशी फल ड्रैगन फ्रूट उगाने की राह खोल दी है.
रोहट में खारे पानी ने वर्षों से किसानों को परेशान किया
पाली जिले के रोहट और उसके आसपास के इलाकों में खेती करने वाले किसानों के सामने सालों से एक ही समस्या रही है, जमीन में सेलिनिटी यानी लवणीयता और पानी का खारापन. इस वजह से किसानों के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता था कि आखिर किस फसल या फल की खेती की जाए, जो इस कठिन परिस्थिति में भी टिक सके और मुनाफा भी दे सके. इसी सवाल का हल निकालने के लिए कृषि विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सिंह तेतरवाल ने एक खास प्रोजेक्ट तैयार किया, जिसे आने वाले समय में क्षेत्र के किसानों के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है.
खारी मिट्टी में भी ड्रैगन फ्रूट ने दिखाए दमदार नतीजे
डॉ. तेतरवाल के मुताबिक रोहट और पाली के जिन हिस्सों में पानी खारा है और मिट्टी में भारी सेलिनिटी पाई जाती है, वहां ड्रैगन फ्रूट की खेती के नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे हैं. ड्रैगन फ्रूट में कम पानी में और लवणीय वातावरण में भी टिके रहने की गजब की क्षमता होती है. यही वजह है कि रोहट जैसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों के लिए यह एक नया और उभरता हुआ फल साबित हो सकता है.
पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नए फल अपनाने की सलाह
डॉ. तेतरवाल ने क्षेत्र के किसानों से कहा है कि जो लोग बरसों से सिर्फ पुरानी और पारंपरिक फसलें ही उगाते आए हैं, उन्हें अब अपनी सोच और तरीकों में बदलाव लाने की जरूरत है. अगर किसान अपने खेतों में ड्रैगन फ्रूट जैसे नए और ज्यादा कीमत दिलाने वाले फलों को शामिल करें, तो उनकी कमाई में बड़ा उछाल आ सकता है और आमदनी दोगुनी होने के आसार भी काफी बढ़ जाएंगे. उनका कहना है कि ड्रैगन फ्रूट एक ऐसा फल है, जो आगे चलकर रोहट और पाली के किसानों की आर्थिक हालत मजबूत कर उनकी किस्मत बदल सकता है.
प्रोजेक्ट से किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक आधार पर सही फल चुनने में सहारा
आमतौर पर खारे पानी के डर से किसान नया बाग लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते. डॉ. तेतरवाल के इस प्रोजेक्ट का मकसद यही है कि किसानों को वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर यह समझने में मदद मिले कि उनकी जमीन और पानी की गुणवत्ता के हिसाब से कौन सा फल सबसे मुफीद रहेगा. इस प्रोजेक्ट के तहत किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़ा तकनीकी मार्गदर्शन और प्रोत्साहन भी दिया जाएगा, ताकि रोहट और पाली के खेतों में खेती के तरीकों में एक नई शुरुआत हो सके और किसानों की तस्वीर बदल सके.













