महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कैडिला फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी कुछ प्रमुख दवाओं की बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम का मुख्य कारण दवा के ब्रांड नामों में समानता का होना है, जिससे मरीजों और डॉक्टरों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने का खतरा था। अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के तहत पूरे राज्य से करीब 2.45 करोड़ रुपये मूल्य की दवाओं का स्टॉक भी जब्त कर लिया गया है। इस कार्रवाई का सीधा असर एसीलॉक 150, एसीलॉक 150 प्लस, एसीलॉक 300 और एसीलॉक 300 प्लस ब्रांड की दवाओं पर पड़ा है। इन दवाओं में रैनिटिडीन और फैमोटिडीन जैसे सक्रिय औषधीय घटक यानी API का इस्तेमाल किया जाता है।
बाजार से स्टॉक वापस मंगाने का निर्देश
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे बाजार में मौजूद इन सभी दवाओं के स्टॉक को तुरंत प्रभाव से वापस मंगाएं। विशेष रूप से एसीलॉक 150 प्लस और एसीलॉक 300 प्लस की बिक्री पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने इस संबंध में चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यदि किसी दवा का नाम दूसरी दवा से मिलता-जुलता है, तो इससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मरीजों में गलत दवा को लेकर गंभीर भ्रम पैदा हो सकता है। गलत दवा के सेवन से मरीज की स्थिति में सुधार होने के बजाय उसके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका हमेशा बनी रहती है, जो कि जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील मामला है।
मंजूरी और नियमों का उल्लंघन
तुकाराम मुंढे के अनुसार, कंपनी को केवल रैनिटिडीन आधारित एसीलॉक 150 और एसीलॉक 300 के निर्माण के लिए अनुमति प्रदान की गई थी। हालांकि, बाद में कंपनी ने फैमोटिडीन आधारित दवाओं को एसीलॉक 150 प्लस और एसीलॉक 300 प्लस के नाम से बाजार में पेश कर दिया। इन दवाओं की ब्रांडिंग काफी हद तक पुरानी दवाओं के समान थी, जिससे स्पष्ट तौर पर भ्रम पैदा हुआ। एफडीए ने स्पष्ट किया है कि बदली हुई औषधि संरचना के साथ लगभग समान नाम का उपयोग करना स्थापित दिशानिर्देशों का सीधा उल्लंघन है।
गोदामों पर छापा और छापेमारी का विवरण
प्रशासन द्वारा 9 और 10 जुलाई को की गई सघन जांच के दौरान पुणे, नागपुर और ठाणे जिले के भिवंडी स्थित कंपनी के गोदामों पर छापेमारी की गई। इस दौरान कुल 2,45,37,490 रुपये की दवाएं जब्त की गईं। वर्तमान में इस मामले की जांच जारी है और प्राप्त तथ्यों के आधार पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।










