कारोबारी संगठनों की मंजूरी के साथ भारत और ब्रिटेन का व्यापार समझौता लागू, दोनों देशों के व्यापार में तेजी की उम्मीदव्यापार
3 घंटे पहले· 2

कारोबारी संगठनों की मंजूरी के साथ भारत और ब्रिटेन का व्यापार समझौता लागू, दोनों देशों के व्यापार में तेजी की उम्मीद

भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता प्रभावी हो गया है, जिससे टैरिफ में बड़ी कटौती के साथ वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है। दोनों देशों के उद्योग जगत ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया है।

भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे इंतजार के बाद हुआ मुक्त व्यापार समझौता आखिरकार प्रभावी हो गया है, और इसके साथ ही दोनों देशों के उद्योग और कारोबारी संगठनों ने इस नई शुरुआत का खुले दिल से स्वागत किया है। कारोबारी जगत का मानना है कि टैरिफ में हुई व्यापक कटौती से अब दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं को आना-जाना पहले से कहीं आसान और सस्ता हो जाएगा, और इसी वजह से आपसी व्यापार को एक नई रफ्तार मिलेगी।

पिछले साल दोनों प्रधानमंत्रियों ने किए थे हस्ताक्षर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके को भारत और ब्रिटेन की साझेदारी के लिए एक अहम पड़ाव करार दिया है। दरअसल इस समझौते की बुनियाद पिछले साल जुलाई में ही रखी गई थी, जब नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते यानी CETA पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के साथ जुड़े अनुमान काफी बड़े हैं। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच होने वाला सालाना व्यापार, जो इस समय करीब 48 अरब पाउंड के आसपास है, साल 2030 तक कम से कम दोगुना हो जाएगा। इतना ही नहीं, लंबी अवधि में इस समझौते से हर साल दोनों देशों की जीडीपी में करीब पांच अरब पाउंड की बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया गया है।

फाइनेंशियल और प्रोफेशनल सेवाओं में खुलेंगे नए रास्ते

सिटी ऑफ लंदन की लॉर्ड मेयर डेम सुसान लैंगली ने इस समझौते को कारोबार के लिहाज से बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा, ''यह समझौता हमारे कारोबारों के लिए व्यापार, निवेश और विस्तार, तीनों को आसान बना देगा। इससे फाइनेंशियल और प्रोफेशनल सर्विस के क्षेत्र में नए अवसर तैयार होंगे।'' ब्रिटेन की वित्तीय राजधानी की ग्लोबल एम्बेसडर ने अपनी भारत यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत में मौजूद संभावनाओं को उन्होंने बेहद करीब से महसूस किया है। उन्होंने CETA को दोनों देशों के लिए एक ''ऐतिहासिक'' समझौता बताया।

भारत के सबसे व्यापक समझौतों में से एक

एयरोनॉटिक्स से लेकर खाद्य क्षेत्र तक और स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर वित्तीय सेवाओं तक, इस समझौते के दायरे को देखते हुए इसे भारत के अब तक के सबसे व्यापक व्यापार समझौतों में गिना जा रहा है। इससे उन उद्योगों को खास सहारा मिलेगा जो लाखों लोगों को रोजगार देते हैं, जैसे कि कपड़ा, जूते-चप्पल और इंजीनियरिंग उत्पाद। यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के ग्रुप सीईओ डॉ. किशोर जयरमण ने कहा, ''CETA के लिए शुभकामनाएं। इस समझौते का लंबे समय से इंतजार था, और यह ब्रिटेन और भारत जैसी दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार और आर्थिक रिश्तों को नई गति देगा।''

कारोबारी जगत ने बताया ऐतिहासिक कदम

ग्रांट थॉर्नटन यूके के पार्टनर और साउथ एशिया बिजनेस ग्रुप के हेड अनुज चंदे ने भी इसे लेकर काफी उम्मीदें जताईं। उन्होंने कहा, ''दोनों देशों के लिए इसमें बहुत बड़ी संभावनाएं छिपी हैं। हर साल 25 अरब पाउंड के अतिरिक्त व्यापार का जो अनुमान लगाया जा रहा है, वह भी शायद असली क्षमता से कम ही है।'' वहीं स्टैंडर्ड चार्टर्ड की ग्रुप चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तनुज कपिलाश्रमी ने इस एफटीए को दुनिया के सबसे अहम डेवलपमेंट कॉरिडोर में से एक के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया।

अब तक भारत में कारोबार करना क्यों था मुश्किल

ब्रिटेन की संसद के एक विश्लेषण के मुताबिक, अब तक कंपनियों को भारतीय बाजार में कारोबार करते समय कई तरह की अड़चनों से जूझना पड़ता था। साल 2024 में यहां औसत आयात शुल्क 12 प्रतिशत था, जबकि ड्रिंक्स और तंबाकू पर यह 150 प्रतिशत, कपड़ों पर 255 प्रतिशत और ट्रांसपोर्ट उपकरण पर 125 प्रतिशत तक पहुंच जाता था। यही ऊंचे टैरिफ ब्रिटिश कंपनियों के लिए भारत में पैर जमाना मुश्किल बना रहे थे, और अब यही समझौता इन दिक्कतों को दूर करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।

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सवाल-जवाब

भारत और ब्रिटेन का यह व्यापार समझौता कब से लागू हुआ?
यह मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई से प्रभावी हो गया है।
CETA पर हस्ताक्षर कब और किसने किए थे?
पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस पर हस्ताक्षर किए थे।
2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार कितना बढ़ने का अनुमान है?
अनुमान है कि सालाना व्यापार मौजूदा करीब 48 अरब पाउंड के स्तर से कम से कम दोगुना हो जाएगा।
इस समझौते का जीडीपी पर क्या असर होगा?
लंबी अवधि में हर साल दोनों देशों की जीडीपी में करीब पांच अरब पाउंड की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
किन भारतीय उद्योगों को इससे फायदा मिलेगा?
कपड़ा, जूते-चप्पल और इंजीनियरिंग उत्पाद जैसे लाखों लोगों को रोजगार देने वाले उद्योगों को इससे सहारा मिलेगा।
2024 में भारत में आयात शुल्क कितना था?
औसत आयात शुल्क 12 प्रतिशत था, जबकि ड्रिंक्स और तंबाकू पर 150 प्रतिशत, कपड़ों पर 255 प्रतिशत और ट्रांसपोर्ट उपकरण पर 125 प्रतिशत तक टैरिफ लगता था।

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