बिहार के केला और मखाना उगाने वाले किसानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। केंद्रीय कैबिनेट ने राज्य में NH-31 और NH-231 के खगड़िया-पूर्णिया हिस्से को दो लेन से चार लेन में बदलने की मंजूरी दे दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3936 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सड़क चौड़ी होने का सबसे ज्यादा फायदा खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया के किसानों को मिलने वाला है, क्योंकि इन्हीं इलाकों में मखाना और केले की खेती बड़े पैमाने पर होती है। यहां से यह उपज सिर्फ बिहार में ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों तक भेजी जाती है।
अब रास्ते में नहीं सड़ेगी फसल
अब तक सबसे बड़ी दिक्कत यही थी कि सड़कें तंग और टूटी होने के कारण फसल कई बार मंडी तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती थी। इसका सीधा नुकसान किसानों की जेब पर पड़ता था। सबसे ज्यादा परेशानी खगड़िया के केला किसानों को झेलनी पड़ती थी, क्योंकि केला ऐसा फल है जो बहुत तेजी से खराब होता है और इसके लिए एक-एक घंटे की देरी भारी पड़ती है। चार लेन की सड़क बन जाने के बाद यह सफर 3 से 4 घंटे की जगह घटकर सिर्फ डेढ़ से दो घंटे का रह जाएगा। तेज ढुलाई का मतलब है कि केला और मखाना जल्दी बाजार पहुंचेगा और किसानों को उनकी फसल की बेहतर कीमत मिल पाएगी।
बाढ़ में भी नहीं टूटेगा संपर्क
इस इलाके की एक और बड़ी मुसीबत हर साल आने वाली बाढ़ है। कोसी और गंगा नदी के उफान पर आने से यहां की सड़कें पानी में डूब जाती हैं और आवाजाही ठप हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए नई सड़क पर मजबूत ढांचा और बेहतर ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाएगा, ताकि बाढ़ के दिनों में भी रास्ता चालू रहे। यानी अब बारिश और बाढ़ भी किसानों की फसल को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने से नहीं रोक पाएगी।
पड़ोसी राज्यों तक आसान पहुंच
इस हाईवे के नए रूप में तैयार होने के बाद सीमांचल से पटना की दूरी तो कम होगी ही, साथ ही पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों तक आना-जाना भी सरल हो जाएगा। घुमावदार और खराब मोड़, तंग बॉटलनेक और घनी आबादी वाले शहरी तथा अर्ध-शहरी इलाकों में लगने वाले जाम से भी राहत मिलेगी।
बिहार को मिलेगा नया इकोनॉमिक कॉरिडोर
यह सड़क कुल पांच आर्थिक केंद्रों को आपस में जोड़ेगी, जिनमें एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क और दो फिशिंग व सीफूड पार्क शामिल हैं। इसके अलावा चार बड़े रेलवे स्टेशन, एक हवाई अड्डा, चार नेशनल हाईवे और दो राज्यों को मिलाकर कुल 11 लॉजिस्टिक्स केंद्र एक-दूसरे से जुड़ जाएंगे। इस तरह बिहार को जल्द ही एक बड़ा इकोनॉमिक कॉरिडोर मिलने जा रहा है, जो खेती से लेकर उद्योग तक को नई रफ्तार देगा।



















