लखीमपुर खीरी जिले में हर साल मानसून के मौसम के दौरान भारी बारिश और बाढ़ का प्रकोप किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इस क्षेत्र से बहने वाली शारदा सहित कई प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ने से खेतों में पानी भर जाता है, जिससे धान, मक्का, मूंगफली और उड़द जैसी महत्वपूर्ण खरीफ फसलों को भारी क्षति पहुंचती है। खेतों में कई दिनों तक पानी खड़े रहने की वजह से लहलहाती फसलें पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं, जिससे अन्नदाताओं को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। ऐसी गंभीर परिस्थितियों में किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक बड़ा संबल बनकर सामने आती है।
प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को बचाने की चुनौती
देशभर में प्राकृतिक आपदाओं के कारण हर साल किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। कभी भीषण सूखा, कभी बाढ़, तो कभी अत्यधिक वर्षा, जलभराव और तेज आंधी जैसी आपदाएं किसानों की महीनों की कठिन मेहनत को कुछ ही पलों में बर्बाद कर देती हैं। फसल तबाह हो जाने के बाद किसान के सामने अगली फसल के लिए पूंजी जुटाने और अपने परिवार का गुजर-बसर करने का संकट खड़ा हो जाता है। इसी आर्थिक क्षति की भरपाई में मदद करने और किसानों को संबल देने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का संचालन किया जा रहा है, ताकि आपदा के समय उन्हें राहत मिल सके।
खरीफ सीजन की फसलों के लिए बीमा का शानदार अवसर
खरीफ सीजन के दौरान किसान मुख्य रूप से धान, मक्का, मूंगफली और उड़द की खेती करते हैं। इस बार लखीमपुर खीरी जिले में केला की फसल को भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में शामिल किया गया है, जो किसानों के लिए एक राहत भरी खबर है। कृषि विभाग की तरफ से किसानों को लगातार यह सलाह दी जा रही है कि वे तय समय सीमा के भीतर अपनी फसलों का बीमा अवश्य करवा लें। जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में आगे आएं और अपनी खरीफ फसलों का बीमा कराकर खुद को सुरक्षित करें।
बीमा कराने की प्रक्रिया को लेकर किसानों को यह बताया गया है कि वे अपने नजदीकी क्षेत्रीय बैंक की शाखा, जन सेवा केंद्र या फिर भारत सरकार के प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आसानी से बीमा प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। फसल का बीमा कराने के लिए किसानों को अपनी खेती और बोई गई फसल से जुड़ी जरूरी जानकारियां सटीक रूप से देनी होती हैं। बैंक से जुड़े ऋणी किसानों के मामले में बीमा की प्रक्रिया नियमों के तहत अलग हो सकती है, जबकि गैर-ऋणी किसान भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। किसानों को यह भी सलाह दी जाती है कि आवेदन के समय सभी विवरण सही भरें और बीमा से जुड़े सभी दस्तावेज संभाल कर रखें।
समस्या होने पर 14447 टोल-फ्री नंबर पर करें संपर्क
फसल बीमा से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने, अपनी शिकायत दर्ज कराने या फिर फसल खराब होने की स्थिति में उसकी सूचना देने के लिए किसानों के वास्ते एक विशेष व्यवस्था की गई है। किसान किसी भी सहायता के लिए 14447 टोल-फ्री नंबर का उपयोग कर सकते हैं। बारिश और बाढ़ के मौसम के दौरान किसानों को अपने खेतों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत होती है। यदि प्राकृतिक कारणों से फसल को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी समय पर सूचना देना और उससे जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखना बेहद उपयोगी साबित होता है। इसके अलावा, किसान अपने खेतों और फसलों की स्थिति की तस्वीरें भी सुरक्षित रख सकते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित दावों के समय सहायता मिल सके।



















