हैदराबाद को यूं ही भारत की सिलिकॉन वैली नहीं कहा जाता. अब इसी शहर के कोकापेट इलाके में एक ऐसा प्रोजेक्ट आकार ले रहा है, जो शहर की पहचान और स्काईलाइन दोनों को बदलकर रख देगा. माय होम ग्रावा नाम के इस प्रोजेक्ट को देश के अब तक के सबसे बड़े और सबसे महत्वाकांक्षी कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज़ ठिकानों में गिना जा रहा है. करीब 40 मिलियन वर्ग फीट के नियोजित बिल्ट-अप एरिया में फैला यह विशाल बिजनेस पार्क आधुनिक कॉर्पोरेट इंफ्रास्ट्रक्चर के मायने ही बदलने जा रहा है.
पूरे प्रोजेक्ट की जान हैं इसके 8 आइकॉनिक टावर्स. करीब 180 मीटर ऊंचे ये गगनचुंबी टावर अपने आप में किसी अजूबे से कम नहीं. हर टावर में 35 ऑफिस लेवल्स और 7 बेसमेंट पार्किंग फ्लोर्स बनाए जा रहे हैं. डेवलपर का कहना है कि प्रोजेक्ट के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद यहां एक साथ 2.5 लाख से अधिक लोग काम कर सकेंगे. इतनी बड़ी क्षमता ही इसे दुनिया की दिग्गज आईटी कंपनियों और फॉर्च्यून 500 कंपनियों के लिए एक मुफीद ठिकाना बना देती है.
एशिया का सबसे बड़ा प्रीकास्ट प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट को सबसे अलग बनाती है इसके निर्माण की तकनीक. यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया का सबसे बड़ा प्रीकास्ट प्रोजेक्ट है. आसान भाषा में समझें तो इमारतों के बड़े-बड़े ढांचे को परंपरागत तरीके से साइट पर ईंट-दर-ईंट खड़ा करने के बजाय, उन्हें फैक्ट्री में पहले से तैयार कर लिया जाता है. फैक्ट्री में बने कंक्रीट ब्लॉक्स को फिर अत्याधुनिक मशीनों की मदद से साइट पर असेंबल करके खड़ा किया जा रहा है, जिससे निर्माण तेज और ज्यादा मजबूत होता है.
बिजली की किल्लत यहां काम करने वाली कंपनियों के लिए चिंता का विषय नहीं रहेगी. लगातार 24×7 बिना किसी रुकावट के बिजली देने के लिए इस बिजनेस पार्क के पास अपना खुद का समर्पित 220kV प्राइवेट पावर ग्रिड मौजूद है.
वॉक-टू-वर्क का तजुर्बा और लग्जरी अपार्टमेंट
माय होम ग्रावा को सिर्फ एक ऑफिस कॉम्प्लेक्स कहना नाइंसाफी होगी. यह दरअसल एक जीता-जागता इकोसिस्टम है, जो वॉक-टू-वर्क यानी घर से दफ्तर तक पैदल पहुंचने वाली संस्कृति को बढ़ावा देता है. इसी कैंपस में माय होम ग्रावा रेजिडेंसेस के नाम से प्रीमियम 4BHK लग्जरी अपार्टमेंट भी बनाए जा रहे हैं. इन बहुमंजिला इमारतों की खिड़कियों से उस्मान सागर और कोकापेट झील का खूबसूरत नजारा सामने खुलता है.
कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी यह प्रोजेक्ट पीछे नहीं है. भविष्य में प्रस्तावित रायदुर्ग-नेओपोलिस मेट्रो कॉरिडोर इसे शहर के बाकी हिस्सों से सीधे जोड़ देगा. ग्रीन आर्किटेक्चर पर आधारित यह पूरा प्रोजेक्ट भारत के रियल एस्टेट और कॉर्पोरेट जगत के लिए एक नया मील का पत्थर साबित होने जा रहा है.













