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भारत-चीन-पाक सीमा के पास ग्रीन प्रोजेक्ट्स पर सख्त पहरा, 1 किलोमीटर के दायरे में नई गतिविधियों पर रोकभारत
9 अग॰ 2026, 9:57 am (1 घंटे पहले)· 0

भारत-चीन-पाक सीमा के पास ग्रीन प्रोजेक्ट्स पर सख्त पहरा, 1 किलोमीटर के दायरे में नई गतिविधियों पर रोक

केंद्र सरकार ने LoC, LAC और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कड़े सुरक्षा नियम लागू किए हैं। इसके तहत सीमा से 1 किलोमीटर के दायरे में नए प्रोजेक्ट्स पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे।

नई दिल्ली: देश की सीमाओं के पास अब सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा किया जाने वाला है। अब इन संवेदनशील क्षेत्रों में केवल सेना के जवानों की तैनाती ही सुरक्षा का एकमात्र आधार नहीं होगी, बल्कि पर्यावरण और ऊर्जा परियोजनाओं की आड़ में होने वाली हर एक गतिविधि पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं के संचालन को लेकर नए और कड़े सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इन नए नियमों के अनुसार नियंत्रण रेखा यानी LoC, वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC और अंतरराष्ट्रीय सीमा से ठीक 1 किलोमीटर के दायरे में किसी भी नए प्रोजेक्ट की गतिविधि को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि इस विशेष पट्टी के भीतर भूमि उपयोग, किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य और ऊर्जा परियोजनाओं के मामले में सुरक्षा के पैमाने बेहद कड़े रहेंगे। सरकार की मंशा बिल्कुल स्पष्ट है क्योंकि बॉर्डर के बेहद नजदीक आकार लेने वाले ये विशाल ऊर्जा प्रोजेक्ट्स केवल बिजली पैदा करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वहां भूमि पर मालिकाना हक, विदेशी कंपनियों की हिस्सेदारी, काम करने वाले कर्मचारी, ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों की मौजूदगी सीधे तौर पर देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ जुड़ सकती है।

50 किलोमीटर के संवेदनशील दायरे में गृह मंत्रालय की मंजूरी अनिवार्य

टेलीग्राफ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक नए दिशानिर्देशों के दायरे में केवल 1 किलोमीटर की पट्टी ही नहीं आती, बल्कि उससे आगे के क्षेत्र को भी खुला नहीं छोड़ा गया है। LoC, LAC और अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर पूरे 50 किलोमीटर तक के क्षेत्र को बेहद संवेदनशील माना गया है। इस विस्तृत भूभाग में स्थापित होने वाले सोलर, विंड और हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स के लिए अब केंद्रीय गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा यदि कोई प्रस्तावित परियोजना अंतरराष्ट्रीय सीमा से 20 किलोमीटर के भीतर आती है, तो उसे रक्षा मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी भी प्राप्त करनी होगी। सबसे खास बात यह है कि यदि इन प्रोजेक्ट्स के लिए उपयोग होने वाली जमीन को किसी विदेशी कंपनी को ट्रांसफर किया जाता है, तो इसके लिए भी केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति लेनी जरूरी होगी। यानी अब सरकार केवल मशीनों और उपकरणों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि जमीन के स्वामित्व और वहां आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखना चाहती है।

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बॉर्डर से 1 किलोमीटर के दायरे में पूरी तरह पाबंदी

गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए इन नए नियमों के अनुसार LoC, LAC और अंतरराष्ट्रीय सीमा से 1 किलोमीटर के दायरे के भीतर किसी भी नए सोलर, विंड और हाइब्रिड एनर्जी प्रोजेक्ट को अनुमति नहीं दी जाएगी। इस प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी नए प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने या निर्माण कार्य शुरू करने की पूरी तरह मनाही होगी। इस कड़े कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखना बताया गया है।

वर्तमान समय में सरकार के पास सीमावर्ती क्षेत्रों में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए लगातार भारी संख्या में आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। इसी बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए इन नए नियमों के माध्यम से सभी विकास परियोजनाओं को सुरक्षा जांच के मजबूत दायरे में लाया गया है। वहीं 1 किलोमीटर से लेकर 50 किलोमीटर के बीच आने वाली परियोजनाओं को लेकर हर मामले की जांच उसकी गंभीरता के आधार पर अलग से की जाएगी और केस-टू-केस बेसिस पर मंजूरी दी जाएगी।

गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय का कड़ा पहरा

नई व्यवस्था के तहत सीमा से 50 किलोमीटर तक के पूरे क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया गया है। इस दायरे में आने वाली हर सोलर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजना को गृह मंत्रालय से सिक्योरिटी क्लियरेंस लेना ही होगा। यदि परियोजना अंतरराष्ट्रीय सीमा से 20 किलोमीटर के दायरे में स्थित है, तो रक्षा मंत्रालय से एनओसी लेना भी उतना ही जरूरी होगा। इन सभी परियोजनाओं के लिए जमीन के आवंटन की पूरी प्रक्रिया अब सीधे सुरक्षा मंजूरी से जोड़ दी गई है। इसके तहत सभी आवेदन केवल नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के पास जमा किए जाएंगे। इसके बाद संबंधित राज्य सरकार द्वारा जमीन के आवंटन को लेकर सैद्धांतिक मंजूरी दी जाएगी और प्रोजेक्ट की सटीक लोकेशन की जानकारी गृह मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय को आगे की जांच के लिए भेज दी जाएगी।

विदेशी नागरिकों, कंपनियों और कर्मचारियों पर कड़ी निगरानी

सरकार ने सीमावर्ती देशों के नागरिकों को लेकर भी अत्यंत सख्त प्रावधान तय किए हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन जैसे पड़ोसी देशों से आने वाले इंजीनियरों, कर्मचारियों, स्टाफ के सदस्यों या फिर मजदूरों को इन ऊर्जा परियोजनाओं के काम में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति लेना अब अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही इन विदेशी नागरिकों के प्रोजेक्ट साइट पर आने और जाने की हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जाएगी।

प्रोजेक्ट विकसित करने वाली कंपनियों यानी डेवलपर्स के लिए यह जरूरी होगा कि वे अपने यहां काम करने वाले प्रत्येक कर्मचारी का पूरी तरह से पुलिस वेरिफिकेशन सुनिश्चित करें। उन्हें स्थानीय पुलिस और सीमा सुरक्षा बल यानी BSF की तरफ से समय-समय पर जारी किए जाने वाले सभी सुरक्षा निर्देशों का अक्षरशः पालन करना होगा। इससे बॉर्डर एरिया में कामकाज करने वाली कंपनियों के लिए सुरक्षा अनुपालन पहले के मुकाबले कहीं अधिक महत्वपूर्ण और कड़ा हो गया है।

एंटी-ड्रोन सिस्टम और समर्पित पुलिस चौकी की व्यवस्था

इन नए नियमों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि सुरक्षा व्यवस्था को केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि प्रोजेक्ट साइट पर व्यापक और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करना अनिवार्य किया गया है। इनमें अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम भी शामिल हैं। इन सभी सुरक्षा प्रणालियों को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF या फिर संबंधित राज्य की पुलिस द्वारा संचालित किया जाएगा और इस पर आने वाला पूरा खर्च संबंधित प्रोजेक्ट डेवलपर को ही वहन करना होगा। इसके अलावा हर एक संवेदनशील परियोजना में निर्माण गतिविधियों और सुरक्षा पर लगातार नजर रखने के लिए एक समर्पित पुलिस चौकी की स्थापना करने का भी प्रावधान किया गया है। इसका मतलब साफ है कि प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य शुरू होने के बाद भी सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और पहरा लगातार जारी रहेगा।

जमीन के हस्तांतरण पर भी केंद्र की सख्त नजर

नई गाइडलाइंस में जमीन के मालिकाना हक और ट्रांसफर को लेकर भी बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं। प्रोजेक्ट के संचालन के लिए उपयोग की जाने वाली भूमि को केंद्र सरकार की स्पष्ट मंजूरी के बिना किसी भी विदेशी कंपनी को ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। इस प्रकार के किसी भी कार्य के लिए गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी सहित सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां लेना अनिवार्य होगा। सरकार का इस संबंध में स्पष्ट रूप से यह कहना है कि इन नियमों को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए पूरी सावधानी से तैयार किया गया है, और साथ ही कारोबार में सुगमता यानी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का भी पूरा ध्यान रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में देश के लिए जरूरी ऊर्जा परियोजनाएं पूरी तरह बंद न हों, लेकिन उनकी तमाम गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी जांच और सतत निगरानी के दायरे में सुरक्षित रूप से चलती रहें।

सवाल-जवाब

सीमा के कितने दायरे में नए ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर पूरी रोक लगाई गई है?
LoC, LAC और अंतरराष्ट्रीय सीमा से 1 किलोमीटर के दायरे में किसी भी नए सोलर, विंड और हाइब्रिड प्रोजेक्ट की गतिविधि पर पूरी रोक लगा दी गई है।
कितने किलोमीटर के दायरे में गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य की गई है?
सीमा से 50 किलोमीटर तक के संवेदनशील क्षेत्र में आने वाले सभी प्रोजेक्ट्स के लिए गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य है।
रक्षा मंत्रालय से एनओसी लेना कितने किलोमीटर के दायरे में जरूरी है?
अंतरराष्ट्रीय सीमा से 20 किलोमीटर के भीतर प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए रक्षा मंत्रालय से एनओसी लेना जरूरी किया गया है।
प्रोजेक्ट साइट पर एंटी-ड्रोन सिस्टम कौन संचालित करेगा?
प्रोजेक्ट साइट पर एंटी-ड्रोन सिस्टम को CISF या राज्य पुलिस द्वारा संचालित किया जाएगा और इसका खर्च डेवलपर उठाएगा।
किन देशों के नागरिकों को प्रोजेक्ट में शामिल करने के लिए केंद्र की अनुमति चाहिए?
पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन जैसे पड़ोसी देशों के इंजीनियरों, कर्मचारियों या मजदूरों को शामिल करने के लिए केंद्र की अनुमति जरूरी है।
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